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अरावली रेंज की भूमि आईओसीएल क्यों दी, दो माह में दें रिपोर्ट
Fri, 12 Feb 2021 01:40 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, हरियाणा
अमर उजाला ब्यूरो, हरियाणा
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Fri, 12 Feb 2021 01:40 PM IST
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अरावली रेंज
- फोटो : अमर उजाला
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने नियमों का उल्लंघन करने के आरोप वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला उपायुक्त गुरुग्राम और प्रभागीय वानिकी अधिकारी से ईमेल के माध्यम से दो महीने के अंदर रिपोर्ट मांगी है। यह आदेश एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एके गोयल की खंडपीठ ने जारी किए।
मानव आवा ट्रस्ट ने एनजीटी में याचिका दायर कर बताया था कि हरियाणा सरकार ने इंडियन ऑयल कार्पोरेशन लिमिटेड आईओसीएल को गुरुग्राम स्थित अरावली रेंज की चक्करपुर गांव में 1500 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की है। वन विभाग ने उपायुक्त को बताया था कि विचाराधीन स्थल जंगल का हिस्सा था।ऐसे में उच्चतम न्यायालय के निर्णय के संदर्भ में इसका उपयोग गैर.वन उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता है।
अरावली रेंज के संबंध में गैर.वन उद्देश्यों के लिए वन भूमि का उपयोग भी एमओईएफ अधिसूचना का उल्लंघन है। इस प्रकरण में एनजीटी ने ट्रस्ट का तर्क सुनने के बाद वन भूमि के डायवर्जन का आरोप लगाते हुए उपायुक्त गुरुग्राम और प्रभागीय वनाधिकारी को निर्देश दिया कि वे इस प्रक्रिया के बाद कानून लागू करें। दोनों अधिकारी संयुक्त रूप से कार्रवाई की रिपोर्ट ई.मेल द्वारा दो महीने के भीतर दायर करें। एनजीटी ने यह भी कहा है कि हमें किसी अन्य पक्ष से प्रतिक्रिया मांगने की जरूरत नहीं है।
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मानव आवा ट्रस्ट ने एनजीटी में याचिका दायर कर बताया था कि हरियाणा सरकार ने इंडियन ऑयल कार्पोरेशन लिमिटेड आईओसीएल को गुरुग्राम स्थित अरावली रेंज की चक्करपुर गांव में 1500 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की है। वन विभाग ने उपायुक्त को बताया था कि विचाराधीन स्थल जंगल का हिस्सा था।ऐसे में उच्चतम न्यायालय के निर्णय के संदर्भ में इसका उपयोग गैर.वन उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता है।
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अरावली रेंज के संबंध में गैर.वन उद्देश्यों के लिए वन भूमि का उपयोग भी एमओईएफ अधिसूचना का उल्लंघन है। इस प्रकरण में एनजीटी ने ट्रस्ट का तर्क सुनने के बाद वन भूमि के डायवर्जन का आरोप लगाते हुए उपायुक्त गुरुग्राम और प्रभागीय वनाधिकारी को निर्देश दिया कि वे इस प्रक्रिया के बाद कानून लागू करें। दोनों अधिकारी संयुक्त रूप से कार्रवाई की रिपोर्ट ई.मेल द्वारा दो महीने के भीतर दायर करें। एनजीटी ने यह भी कहा है कि हमें किसी अन्य पक्ष से प्रतिक्रिया मांगने की जरूरत नहीं है।
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