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अब कहां जाएं हम... किस पर करें भरोसा
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गुरुग्राम (आशीष निगम)। मिलेनियम सिटी की 180 सोसाइटियों के रिहायशी टॉवरों में घटिया निर्माण की शिकायतें सामने आ रही हैं। यूनाइटेड एसोसिएशन ऑफ न्यू गुरुग्राम के उपाध्यक्ष प्रवीन मलिक इसकी विस्तृत रिपोर्ट बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन इमारतों को तीन श्रेणियों में चिह्न्ति किया जा रहा है। पहली सबसे ज्यादा खराब, दूसरी खराब और तीसरी सामान्य शिकायतों वाली इमारतें हैं। इसकी रिपोर्ट जल्द ही प्रशासन को सौंपी जाएगी ताकि समाधान निकाला जा सके।
कहना गलत न होगा कि सरकारी अधिकारियों, इंजीनियरों और बिल्डरों की मिलीभगत से हजारों लोग घटिया निर्माण के दलदल में फंस गए हैं। उन्हें मुआवजा मिलेगा या वैकल्पिक व्यवस्था दी जएगी..? अभी ये तय नहीं हो पाया है। वहीं अपने सपनों का आशियाना ढूंढ रहे सैकड़ों लोग भ्रम में पड़ गए हैं कि वह कहां जाएं.. किस पर भरोसा करें।
शहर में चारों ओर इन इमारतों के घटिया निर्माण पर बहस छिड़ी हुई है। एनबीसीसी (नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन) की ग्रीन व्यू सोसाइटी (सेक्टर 37-डी) के पीड़ित परिवारों को फ्लैट खाली करने के निर्देश दे दिए गए हैं। सेक्टर-109 स्थित चिनटेल्स पैराडाइसो में उचित मुआवजे की मांग को लेकर 14 फरवरी से क्रमिक भूख हड़ताल जारी है। इसी सेक्टर की रहेजा अथर्वा सोसाइटी, ब्रिक्स लुंबिनी में भी शिकायतें हैं। सीएचडी एवेन्यू (सेक्टर 71), श्रीवर्धमान मंत्रा (सेक्टर 67) में भी घटिया निर्माण का मामला सामने आ गया है।
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इधर, डीटीपी कार्यालय में आरडब्ल्यूए के माध्यम से बीते दो वर्षों से आईं घटिया निर्माण की गंभीर शिकायतों को सूचीबद्ध किया जा रहा है। विभाग की ओर से ऐसी 80 इमारतों की जांच पड़ताल करने की बात कही जा रही है। रोज सामने आ रहीं नई शिकायतों से इन इमारतों फ्लैट ले चुके लोग सहम गए हैं। उनकी जिंदगी भर की कमाई फंस गई है। अब उन्हें इसका कितना मुआवजा मिलेगा। कैसे और कब तक मिलेगा। तब तक वहां किस सुरक्षित स्थान पर जाएं। इन सवालों का जवाब भी नहीं मिल रहा है।
एक के बाद एक सोसाइटी में लगातार घटिया निर्माण की शिकायतें सामने आ रही हैं। जिससे आम आदमी में भय का माहौल है। अफसोसजनक है कि प्रशासनिक मशीनरी अब भी बिल्डरों पर कार्रवाई करने से बच रही है, जबकि बिल्डर बाउंसरों के माध्यम से लोगों की आवाज दबा रहे हैं।
-अंजन देवेश्वर, निवासी रहेजा अथर्वा अपार्टमेंट सेक्टर 109
ये बात समझ से परे हैं कि बिल्डरों पर कोई बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। आम आदमी खुद निर्माण कराए तो सरकारी विभाग सैकड़ों नियमों का हवाला देकर काम नहीं करने देते। अब कहां जाएं। कहां फ्लैट लें। कौन सा विभाग इनकी मजबूती की गारंटी देगा।
-अमित यादव, निवासी सेक्टर 109
फंस गए हैं हजारों लोग,
डीटीपी करें सख्ती
गुरुग्राम। पंचायत भवन एसोसिएशन के अध्यक्ष और रजिस्ट्री के जानकार एडवोकेट गजे सिंह यादव ने कहा कि पूरे शहर में घटिया निर्माण का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इन इमारतों में फ्लैट खरीदने वाले बुरी तरह फंस चुके हैं। मौजूदा व्यवस्था में फ्लैट खरीदने से पहले उसकी निर्माण गुणवत्ता सुनिश्चित करने का कोई पारदर्शी ठोस उपाय नहीं हैं। सरकार द्वारा नियुक्त किए गए अधिकारियों और विभागों की कार्यप्रणाली बिल्डर के पक्ष में ही काम करती है। जिसके चलते सभी प्रकार के सर्टिफिकेट बिल्डर को हासिल हो जाते हैं। फ्लैट खरीदने वाले को इन सर्टिफिकेट पर ही भरोसा करना होता है। अगर वह अपने स्तर पर सिविल इंजीनियरों से जांच कराएंगे तो इन इंजीनियरों को भी बिल्डर अपने पक्ष में मिला लेंगे। इससे एक नया भ्रष्टाचार पनपेगा। इसलिए बेहतर हो कि जिला नगर योजनाकार विभाग ही निर्माण के समय सख्ती से जांच पड़ताल करे। ओसी के नियमों में भी सख्ती बरती जाए।
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कहना गलत न होगा कि सरकारी अधिकारियों, इंजीनियरों और बिल्डरों की मिलीभगत से हजारों लोग घटिया निर्माण के दलदल में फंस गए हैं। उन्हें मुआवजा मिलेगा या वैकल्पिक व्यवस्था दी जएगी..? अभी ये तय नहीं हो पाया है। वहीं अपने सपनों का आशियाना ढूंढ रहे सैकड़ों लोग भ्रम में पड़ गए हैं कि वह कहां जाएं.. किस पर भरोसा करें।
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शहर में चारों ओर इन इमारतों के घटिया निर्माण पर बहस छिड़ी हुई है। एनबीसीसी (नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन) की ग्रीन व्यू सोसाइटी (सेक्टर 37-डी) के पीड़ित परिवारों को फ्लैट खाली करने के निर्देश दे दिए गए हैं। सेक्टर-109 स्थित चिनटेल्स पैराडाइसो में उचित मुआवजे की मांग को लेकर 14 फरवरी से क्रमिक भूख हड़ताल जारी है। इसी सेक्टर की रहेजा अथर्वा सोसाइटी, ब्रिक्स लुंबिनी में भी शिकायतें हैं। सीएचडी एवेन्यू (सेक्टर 71), श्रीवर्धमान मंत्रा (सेक्टर 67) में भी घटिया निर्माण का मामला सामने आ गया है।
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इधर, डीटीपी कार्यालय में आरडब्ल्यूए के माध्यम से बीते दो वर्षों से आईं घटिया निर्माण की गंभीर शिकायतों को सूचीबद्ध किया जा रहा है। विभाग की ओर से ऐसी 80 इमारतों की जांच पड़ताल करने की बात कही जा रही है। रोज सामने आ रहीं नई शिकायतों से इन इमारतों फ्लैट ले चुके लोग सहम गए हैं। उनकी जिंदगी भर की कमाई फंस गई है। अब उन्हें इसका कितना मुआवजा मिलेगा। कैसे और कब तक मिलेगा। तब तक वहां किस सुरक्षित स्थान पर जाएं। इन सवालों का जवाब भी नहीं मिल रहा है।
एक के बाद एक सोसाइटी में लगातार घटिया निर्माण की शिकायतें सामने आ रही हैं। जिससे आम आदमी में भय का माहौल है। अफसोसजनक है कि प्रशासनिक मशीनरी अब भी बिल्डरों पर कार्रवाई करने से बच रही है, जबकि बिल्डर बाउंसरों के माध्यम से लोगों की आवाज दबा रहे हैं।
-अंजन देवेश्वर, निवासी रहेजा अथर्वा अपार्टमेंट सेक्टर 109
ये बात समझ से परे हैं कि बिल्डरों पर कोई बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। आम आदमी खुद निर्माण कराए तो सरकारी विभाग सैकड़ों नियमों का हवाला देकर काम नहीं करने देते। अब कहां जाएं। कहां फ्लैट लें। कौन सा विभाग इनकी मजबूती की गारंटी देगा।
-अमित यादव, निवासी सेक्टर 109
फंस गए हैं हजारों लोग,
डीटीपी करें सख्ती
गुरुग्राम। पंचायत भवन एसोसिएशन के अध्यक्ष और रजिस्ट्री के जानकार एडवोकेट गजे सिंह यादव ने कहा कि पूरे शहर में घटिया निर्माण का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इन इमारतों में फ्लैट खरीदने वाले बुरी तरह फंस चुके हैं। मौजूदा व्यवस्था में फ्लैट खरीदने से पहले उसकी निर्माण गुणवत्ता सुनिश्चित करने का कोई पारदर्शी ठोस उपाय नहीं हैं। सरकार द्वारा नियुक्त किए गए अधिकारियों और विभागों की कार्यप्रणाली बिल्डर के पक्ष में ही काम करती है। जिसके चलते सभी प्रकार के सर्टिफिकेट बिल्डर को हासिल हो जाते हैं। फ्लैट खरीदने वाले को इन सर्टिफिकेट पर ही भरोसा करना होता है। अगर वह अपने स्तर पर सिविल इंजीनियरों से जांच कराएंगे तो इन इंजीनियरों को भी बिल्डर अपने पक्ष में मिला लेंगे। इससे एक नया भ्रष्टाचार पनपेगा। इसलिए बेहतर हो कि जिला नगर योजनाकार विभाग ही निर्माण के समय सख्ती से जांच पड़ताल करे। ओसी के नियमों में भी सख्ती बरती जाए।