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निगम में गांवों को शामिल करने के विरोध में ग्रामीणों ने निकाला मार्च
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गुरुग्राम। जिले के 39 गांवों को नगर निगम में शामिल करने के राज्य सरकार के निर्णय के विरोध में संबंधित गांवों के ग्रामीणों ने सड़क पर उतरना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने बृहस्पतिवार को पंचायत भवन से लघु सचिवालय तक मार्च निकाला। इस दौरान ग्रामीणों ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
नगर निगम में शामिल किए जा रहे 39 गांवों के ग्रामीणों ने बीरू सरपंच की अध्यक्षता में मार्च एवं नारेबाजी करने के बाद मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन दिया। उन्होंने ज्ञापन में कहा कि वे अपने गांवों को नगर निगम में शामिल करने के पक्ष में नहीं हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2009 में नगर निगम में शामिल किए गए 39 गांवों की स्थिति देखने के बाद अपने गांवों को निगम में शामिल करने का विरोध करने का निर्णय लिया है। इन गांवों में नगर निगम ने एक भी विकास कार्य नहीं किया है। इन गांवों में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। इस कारण इन गांवों की स्थिति स्लम जैसी हो चुकी है, वहीं नगर निगम ने इन गांवों में पॉश इलाकों की तरह नियम लागू कर दिए हैं, जबकि नगर निगम ने इन गांवों की कई हजार एकड़ ग्रामसभा भूमि एवं पंचायत के खाते में जमा करीब एक हजार करोड़ रुपये मिले हुए हैं। इसके बावजूद गांवों की सुध नहीं ली जा रही है और ग्रामीणों पर संपत्ति कर और भवन उप नियम लागू कर दिए हैं। ऐसा ही हाल उनके गांवों एवं उनका होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वह उनके गांवों को नगर निगम में शामिल करने के प्रस्ताव को निरस्त करें। इसके अलावा ग्राम पंचायतों को ही सशक्त बनाने का कार्य करें, अन्यथा वह कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। इस संबंध में उन्होंने तैयारी शुरू कर दी है।
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नगर निगम में शामिल किए जा रहे 39 गांवों के ग्रामीणों ने बीरू सरपंच की अध्यक्षता में मार्च एवं नारेबाजी करने के बाद मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन दिया। उन्होंने ज्ञापन में कहा कि वे अपने गांवों को नगर निगम में शामिल करने के पक्ष में नहीं हैं।
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ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2009 में नगर निगम में शामिल किए गए 39 गांवों की स्थिति देखने के बाद अपने गांवों को निगम में शामिल करने का विरोध करने का निर्णय लिया है। इन गांवों में नगर निगम ने एक भी विकास कार्य नहीं किया है। इन गांवों में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। इस कारण इन गांवों की स्थिति स्लम जैसी हो चुकी है, वहीं नगर निगम ने इन गांवों में पॉश इलाकों की तरह नियम लागू कर दिए हैं, जबकि नगर निगम ने इन गांवों की कई हजार एकड़ ग्रामसभा भूमि एवं पंचायत के खाते में जमा करीब एक हजार करोड़ रुपये मिले हुए हैं। इसके बावजूद गांवों की सुध नहीं ली जा रही है और ग्रामीणों पर संपत्ति कर और भवन उप नियम लागू कर दिए हैं। ऐसा ही हाल उनके गांवों एवं उनका होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वह उनके गांवों को नगर निगम में शामिल करने के प्रस्ताव को निरस्त करें। इसके अलावा ग्राम पंचायतों को ही सशक्त बनाने का कार्य करें, अन्यथा वह कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। इस संबंध में उन्होंने तैयारी शुरू कर दी है।
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