{"_id":"697b5ee5c0f957350f054867","slug":"villagers-file-reply-in-court-regarding-tikli-church-dispute-gurgaon-news-c-24-1-gur1002-78391-2026-01-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gurugram News: टीकली चर्च विवाद को लेकर ग्रामीणों ने अदालत में दाखिल किया जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gurugram News: टीकली चर्च विवाद को लेकर ग्रामीणों ने अदालत में दाखिल किया जवाब
विज्ञापन
अब 30 जनवरी को होगी सुनवाई, आरोप- निर्माण कार्य में तय नियमों और कानूनों का किया जा रहा खुला उल्लंघन
संवाद न्यूज एजेंसी
बादशाहपुर। टीकली गांव में चल रहे चर्च निर्माण को लेकर विवाद सिविल जज रश्मित कौर की अदालत में चल रहा है। इसकी सुनवाई के दौरान ग्रामीणों की ओर से अधिवक्ता मनीष शांडिल्य ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है। यह विवाद दिल्ली बाइबल फैलोशिप की ओर गांव में किए जा रहे चर्च निर्माण से जुड़ा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस निर्माण कार्य में तय नियमों और कानूनों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। माननीय अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई के लिए 30 जनवरी की तिथि निर्धारित की है। अब सबकी नजरें आगामी शुक्रवार को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।
इससे पहले 23 जनवरी को दिल्ली बाइबल फैलोशिप के वकील ने एक याचिका दायर कर इस केस को खारिज करने की मांग की थी। संस्था का तर्क था कि गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण की ओर से आवेदन खारिज होने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की है। मामला प्रशासनिक स्तर पर लंबित है, इसलिए यह सिविल अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।
विज्ञापन
वहीं, मंगलवार को सुनवाई के दौरान ग्रामीणों के अधिवक्ता मनीष शांडिल्य ने संस्था की दलीलों का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कोर्ट में स्पष्ट किया कि यदि कहीं भी नियमों और कानूनों का उल्लंघन होता है, तो सिविल अदालत को उस पर सुनवाई करने का पूर्ण अधिकार है। महज प्रशासनिक अपील दायर कर देने से अदालत की शक्तियां समाप्त नहीं हो जातीं।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बादशाहपुर। टीकली गांव में चल रहे चर्च निर्माण को लेकर विवाद सिविल जज रश्मित कौर की अदालत में चल रहा है। इसकी सुनवाई के दौरान ग्रामीणों की ओर से अधिवक्ता मनीष शांडिल्य ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है। यह विवाद दिल्ली बाइबल फैलोशिप की ओर गांव में किए जा रहे चर्च निर्माण से जुड़ा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस निर्माण कार्य में तय नियमों और कानूनों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। माननीय अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई के लिए 30 जनवरी की तिथि निर्धारित की है। अब सबकी नजरें आगामी शुक्रवार को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।
विज्ञापन
इससे पहले 23 जनवरी को दिल्ली बाइबल फैलोशिप के वकील ने एक याचिका दायर कर इस केस को खारिज करने की मांग की थी। संस्था का तर्क था कि गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण की ओर से आवेदन खारिज होने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की है। मामला प्रशासनिक स्तर पर लंबित है, इसलिए यह सिविल अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।
विज्ञापन
वहीं, मंगलवार को सुनवाई के दौरान ग्रामीणों के अधिवक्ता मनीष शांडिल्य ने संस्था की दलीलों का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कोर्ट में स्पष्ट किया कि यदि कहीं भी नियमों और कानूनों का उल्लंघन होता है, तो सिविल अदालत को उस पर सुनवाई करने का पूर्ण अधिकार है। महज प्रशासनिक अपील दायर कर देने से अदालत की शक्तियां समाप्त नहीं हो जातीं।