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Gurugram News: सीएचसी में डाॅक्टर ने गलत महिला की कर दी नसबंदी, परिजनों में रोष
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- तावड़ू अस्पताल में चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी।
तावड़ू। शहर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में एक चौंकाने वाली चिकित्सकीय लापरवाही का मामला सामने आया है। जहां एक 28 वर्षीय महिला की गलती से नसबंदी कर दी गई। घटना 18 अगस्त की बताई जा रही, जब पीड़िता को महज दो महीने के गर्भपात (मिसकैरेज) के बाद सफाई के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था।
परिवार का आरोप है कि डॉक्टरों की टीम ने किसी अन्य महिला की नसबंदी करनी थी लेकिन ऊषा की कर दी, जिससे उनकी जिंदगी हमेशा के लिए प्रभावित हो गई है। अभी तक इस मामले में पुलिस को कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है।
इससे पहले 30 जुलाई को जिले के सामान्य अस्पताल मांडीखेड़ा में चिकित्सकों की लापरवाही सामने आई थी। जिसमें डिलीवरी के दौरान एक बच्चे का हाथ कट गया था। यह मामला बहुत तेजी से सुर्खियों में आया था। जिसमें राष्ट्रीय मानव अधिकार पंचकूला टीम ने संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट तलब की थी।
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पीड़िता के है सिर्फ एक बेटी
पीड़ित परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक ऊषा सैनी (28) पत्नी सुनील कुमार निवासी वार्ड नंबर एक तावडू दो महीने के गर्भपात के बाद सफाई प्रक्रिया के लिए सीएचसी तावडू में भर्ती हुईं। जहां अस्पताल स्टाफ की घोर लापरवाही से ऊषा की नसबंदी कर दी गई, जबकि यह नसबंदी किसी अन्य महिला के लिए निर्धारित थी। डॉक्टर वर्षा और उनकी टीम ने यह गलत कार्य दोपहर करीब तीन बजे किया। ऊषा के पति सुनील ने बताया कि उनके परिवार में पहले से ही एक लड़की है, और इस घटना से घरवालों में गहरा रोष व्याप्त है। वे अब डर रहे हैं कि ऊषा कभी दोबारा मां नहीं बन पाएंगी या नहीं। परिवार ने आरोप लगाया कि अस्पताल में कार्यरत महिला चिकित्सक की सीधी लापरवाही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल के सीनियर मेडिकल ऑफिसर (एसएमओ) डॉक्टर निहाल सिंह सोलंकी ने पीड़ित परिवार से बातचीत की। डॉ. निहाल ने इस घटना पर कड़ा संज्ञान लिया और कहा कि परिजनों और पीड़ित पक्ष के साथ पूरी हमदर्दी है। इसकी निष्पक्ष जांच करेंगे और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि उच्च अधिकारियों को पूरी स्थिति से अवगत करा दिया गया है। हालांकि, पीड़ित परिवार का आरोप है कि अगर जल्द न्याय नहीं मिला तो वे कानूनी रास्ता अपनाएंगे।
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संवाद न्यूज एजेंसी।
तावड़ू। शहर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में एक चौंकाने वाली चिकित्सकीय लापरवाही का मामला सामने आया है। जहां एक 28 वर्षीय महिला की गलती से नसबंदी कर दी गई। घटना 18 अगस्त की बताई जा रही, जब पीड़िता को महज दो महीने के गर्भपात (मिसकैरेज) के बाद सफाई के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था।
परिवार का आरोप है कि डॉक्टरों की टीम ने किसी अन्य महिला की नसबंदी करनी थी लेकिन ऊषा की कर दी, जिससे उनकी जिंदगी हमेशा के लिए प्रभावित हो गई है। अभी तक इस मामले में पुलिस को कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है।
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इससे पहले 30 जुलाई को जिले के सामान्य अस्पताल मांडीखेड़ा में चिकित्सकों की लापरवाही सामने आई थी। जिसमें डिलीवरी के दौरान एक बच्चे का हाथ कट गया था। यह मामला बहुत तेजी से सुर्खियों में आया था। जिसमें राष्ट्रीय मानव अधिकार पंचकूला टीम ने संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट तलब की थी।
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पीड़िता के है सिर्फ एक बेटी
पीड़ित परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक ऊषा सैनी (28) पत्नी सुनील कुमार निवासी वार्ड नंबर एक तावडू दो महीने के गर्भपात के बाद सफाई प्रक्रिया के लिए सीएचसी तावडू में भर्ती हुईं। जहां अस्पताल स्टाफ की घोर लापरवाही से ऊषा की नसबंदी कर दी गई, जबकि यह नसबंदी किसी अन्य महिला के लिए निर्धारित थी। डॉक्टर वर्षा और उनकी टीम ने यह गलत कार्य दोपहर करीब तीन बजे किया। ऊषा के पति सुनील ने बताया कि उनके परिवार में पहले से ही एक लड़की है, और इस घटना से घरवालों में गहरा रोष व्याप्त है। वे अब डर रहे हैं कि ऊषा कभी दोबारा मां नहीं बन पाएंगी या नहीं। परिवार ने आरोप लगाया कि अस्पताल में कार्यरत महिला चिकित्सक की सीधी लापरवाही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल के सीनियर मेडिकल ऑफिसर (एसएमओ) डॉक्टर निहाल सिंह सोलंकी ने पीड़ित परिवार से बातचीत की। डॉ. निहाल ने इस घटना पर कड़ा संज्ञान लिया और कहा कि परिजनों और पीड़ित पक्ष के साथ पूरी हमदर्दी है। इसकी निष्पक्ष जांच करेंगे और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि उच्च अधिकारियों को पूरी स्थिति से अवगत करा दिया गया है। हालांकि, पीड़ित परिवार का आरोप है कि अगर जल्द न्याय नहीं मिला तो वे कानूनी रास्ता अपनाएंगे।