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Gurugram News: ओवरलोड बताकर रोका था ट्रक का क्लेम, अब ब्याज के साथ करना होगा भुगतान

Tue, 05 May 2026 07:08 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 05 May 2026 07:08 PM IST
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Truck claim was stopped on the grounds of overload, now payment will have to be made with interest
जिला उपभोक्ता आयोग ने दिया कंपनी को आदेश, केएमपी एक्सप्रेसवे पर सड़क हादसे में हो गया था ट्रक क्षतिग्रस्त
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मानसिक प्रताड़ना के दो लाख और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च हुए 55 हजार रुपये भी देने होंगे

संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सड़क हादसे में क्षतिग्रस्त हुए ट्रक का 29.31 लाख रुपये का क्लेम रोकना बीमा कंपनी को भारी पड़ गया। अब कंपनी को ब्याज के साथ क्लेम राशि का भुगतान करना होगा। कंपनी का दावा था कि हादसे के समय ट्रक ओवरलोड था जिसकी वजह से वह क्लेम रोका गया। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने दिया है। क्लेम न मिलने पर मूल रूप से राजस्थान के अलवर निवासी अहमद ने आयोग में याचिका दायर की थी।
अहमद ने याचिका में आयोग को बताया कि उनके ट्रक का बीमा टाटा गिग्ना ट्रेलर ओरिएंटल इंश्योरेंस से था। 25 मई 2025 को केएमपी हाईवे पर मडकोला के पास सामने चल रहे एक ट्रक के अचानक ब्रेक लगाए जाने से उनका ट्रक पीछे से टकराकर पलट गया। हादसे में ट्रक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जिसकी मरम्मत का अनुमानित खर्च करीब 29.31 लाख रुपये आया। उन्होंने बीमा कंपनी को मरम्मत खर्च के लिए आवेदन किया जो खारिज कर दिया गया। कंपनी का तर्क था कि ट्रक में लिफ्ट एक्सेल के दो टायर गायब थे और दो टायर घिसे हुए थे। कंपनी ने गणित लगाते हुए दावा किया कि 22 टायरों के बजाय केवल 18 टायर ही काम कर रहे थे, जिससे गाड़ी की भार वहन क्षमता कम हो गई और तकनीकी रूप से वाहन 21.6% ओवरलोडेड माना गया।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने माना कि राजस्थान के खान एवं भूविज्ञान विभाग की ओर से जारी ई-पास के अनुसार, वाहन का वजन 54.72 मीट्रिक टन था और वाहन की आरसी के अनुसार उसकी क्षमता 55 मीट्रिक टन थी। इसलिय यह कानूनी सीमा के भीतर था। आयोग ने स्पष्ट किया कि जब सरकारी विभाग ने वजन को सही पाया है, तो बीमा कंपनी अपनी मर्जी से तकनीकी ओवरलोडिंग का तर्क देकर क्लेम खारिज नहीं कर सकती। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह 29.31 लाख रुपये नौ प्रतिशत की दर से याचिकाकर्ता को दें। इस दौरान उन्हें हुई मानसिक परेशानी पर दो लाख रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च के लिए 55 हजार रुपये देने होंगे।
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