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निगमायुक्त से फरियादियों का होगा सीधा संवाद
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गुरुग्राम। नगर निगम में आम लोगों की शिकायतों के समाधान के लिए एमजीसी समाधान डॉट कॉम नाम से ऑनलाइन पोर्टल शुरू होगा। खास बात यह रहेगी कि आम आदमी निगमायुक्त से सीधे मुलाकात कर अपनी समस्याएं बताएंगे। वहीं, निगमायुक्त संबंधित समस्याओं को सीधे विभाग के उच्चाधिकारी तक पहुंचाएंगे। सोमवार को निगमायुक्त ने आईटी विंग के अधिकारियों के साथ इस संबंध में बैठक की।
इसमें पोर्टल का नाम एमसीजी समाधान डॉट कॉम सुझाया। इस पोर्टल के शुरू होते ही लोग ऑनलाइन निगमायुक्त से अप्वाइंटमेंट लेकर अपनी समस्याएं बता सकेंगे। पोर्टल को बहुत ही सरल तरीके से विकसित किया जा रहा है। इसमें नागरिकों को अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर, ई-मेल का कॉलम भरकर मिलने की वजह बतानी होगी।
3, 5 और 7 दिन में होगा समाधान
शिकायत के लिए अलग-अलग श्रेणियां होंगी, जिनके हिसाब से समाधान के लिए 3, 5 व 7 दिन का समय निर्धारित किया जाएगा। निर्धारित समय पर अगर शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो शिकायत लंबित सेक्शन में चली जाएगी, जिस पर अधिकारियों से विस्तृत जवाब तलब किया जाएगा।
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खत्म होंगी बीच की कड़ियां
इसकी खास बात यह होगी कि शिकायत को निगमायुक्त समाधान करने वाले संबंधित अधिकारी को भेजेंगे। वहीं, इसकी एक कॉपी मॉनिटरिंग अधिकारी को भी फॉरवर्ड होगी। निगमायुक्त का सीधा दखल होने के कारण अधिकारी पर समस्या के समाधान का ज्यादा दबाव होगा। इससे बीच की कड़ियां खत्म होंगी। इसके साथ ही निगमायुक्त से मिलने वालों का रिकॉर्ड भी दुरुस्त रखना होगा।
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इसमें पोर्टल का नाम एमसीजी समाधान डॉट कॉम सुझाया। इस पोर्टल के शुरू होते ही लोग ऑनलाइन निगमायुक्त से अप्वाइंटमेंट लेकर अपनी समस्याएं बता सकेंगे। पोर्टल को बहुत ही सरल तरीके से विकसित किया जा रहा है। इसमें नागरिकों को अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर, ई-मेल का कॉलम भरकर मिलने की वजह बतानी होगी।
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3, 5 और 7 दिन में होगा समाधान
शिकायत के लिए अलग-अलग श्रेणियां होंगी, जिनके हिसाब से समाधान के लिए 3, 5 व 7 दिन का समय निर्धारित किया जाएगा। निर्धारित समय पर अगर शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो शिकायत लंबित सेक्शन में चली जाएगी, जिस पर अधिकारियों से विस्तृत जवाब तलब किया जाएगा।
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खत्म होंगी बीच की कड़ियां
इसकी खास बात यह होगी कि शिकायत को निगमायुक्त समाधान करने वाले संबंधित अधिकारी को भेजेंगे। वहीं, इसकी एक कॉपी मॉनिटरिंग अधिकारी को भी फॉरवर्ड होगी। निगमायुक्त का सीधा दखल होने के कारण अधिकारी पर समस्या के समाधान का ज्यादा दबाव होगा। इससे बीच की कड़ियां खत्म होंगी। इसके साथ ही निगमायुक्त से मिलने वालों का रिकॉर्ड भी दुरुस्त रखना होगा।