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लघु सचिवालय में कोरोना संक्रमण की रोकथाम करने के लिए कदम उठाने बंद
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गुरुग्राम। जिले के लघु सचिवालय में भी कोरोना संक्रमण की रोकथाम करने के लिए कदम उठाने बंद कर दिए गए हैं। अब सचिवालय में आने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अन्य लोगों के स्वास्थ्य की जांच करनी बंद कर दी। इसके अलावा अनावश्यक तौर पर आने वाले लोगों से पूछताछ करने के साथ उन्हें रोकना भी बंद कर दिया गया है। वहीं सचिवालय के अंदर नाकेबंदी भी हटा दी गई है। इस तरह सचिवालय में कोरोना की रोकथाम का कार्य रामभरोसे हो गया है।
कोरोना संक्रमण बढ़ने के बीच करीब तीन माह पहले गुरुग्राम जिले के लघु सचिवालय में रोकथाम के लिए कई कदम उठाए गए थे, लेकिन अब कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए एक भी कदम नहीं उठाया जा रहा है, जबकि जिले में कोरोना संक्रमण के मामलों में अत्यधिक बढ़ोतरी हो गई है और रोजाना कोरोना संक्रमण के सौ से अधिक मामले सामने आ रहे है।
सचिवालय आने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों व अन्य लोगों की पहले की तरह थर्मल स्कैनिंग नहीं की जाती है। इसके अलावा सचिवालय में कार्य के लिए आने वालेे लोगों से भी पूछताछ नहीं की जाती है। इस कारण पहले की तरह उनको गेट पर रोकने की उम्मीद करना बेमानी होगा। इस तरह सचिवालय में कोरोना संक्रमित लोगों के प्रवेश की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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दूसरी ओर सचिवालय में अभी सैनिटाइज करने का भी सिलसिला बंद हो गया है, जबकि पहले रोजाना पूरे सचिवालय के कक्षों को सैनिटाइज किया जाता था। इस प्रकरण से सचिवालय भी कोरोना संक्रमण की चपेट में आने की संभावना बन गई है। सचिवालय में उपायुक्त समेत कई उच्च अधिकारियों के कार्यालय है। सचिवालय के सामने विकास सदन पहले ही कोरोना की चपेट में आ चुका है। यहां अतिरिक्त उपायुक्त के निजी स्टाप के तौर पर कार्यरत तीन कर्मचारी कोरोना संक्रमित हो चुके है।
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कोरोना संक्रमण बढ़ने के बीच करीब तीन माह पहले गुरुग्राम जिले के लघु सचिवालय में रोकथाम के लिए कई कदम उठाए गए थे, लेकिन अब कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए एक भी कदम नहीं उठाया जा रहा है, जबकि जिले में कोरोना संक्रमण के मामलों में अत्यधिक बढ़ोतरी हो गई है और रोजाना कोरोना संक्रमण के सौ से अधिक मामले सामने आ रहे है।
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सचिवालय आने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों व अन्य लोगों की पहले की तरह थर्मल स्कैनिंग नहीं की जाती है। इसके अलावा सचिवालय में कार्य के लिए आने वालेे लोगों से भी पूछताछ नहीं की जाती है। इस कारण पहले की तरह उनको गेट पर रोकने की उम्मीद करना बेमानी होगा। इस तरह सचिवालय में कोरोना संक्रमित लोगों के प्रवेश की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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दूसरी ओर सचिवालय में अभी सैनिटाइज करने का भी सिलसिला बंद हो गया है, जबकि पहले रोजाना पूरे सचिवालय के कक्षों को सैनिटाइज किया जाता था। इस प्रकरण से सचिवालय भी कोरोना संक्रमण की चपेट में आने की संभावना बन गई है। सचिवालय में उपायुक्त समेत कई उच्च अधिकारियों के कार्यालय है। सचिवालय के सामने विकास सदन पहले ही कोरोना की चपेट में आ चुका है। यहां अतिरिक्त उपायुक्त के निजी स्टाप के तौर पर कार्यरत तीन कर्मचारी कोरोना संक्रमित हो चुके है।