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Gurugram News: माता के जयकारों से गूंजे मंदिर, भक्तों का लगा रहा तांता
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प्रथम नवरात्र पर माता के प्रथम शैलपुत्री रूप की हुई पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। नवरात्रों के पहले दिन लोगों ने मंदिरों और घरों में कलश स्थापना कर नौ दिवसीय अनुष्ठान शुरू किया। श्रीमाता शीतला के मंदिर में काफी संख्या में लोगों ने माता के दर्शन किए। मंदिर के सत्संग हॉल में लगातार माता के जयकारे लगे। दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा था। मंदिर परिसर में माता के दर्शन पूजन और मुंडन के लिए आए परिवारों ने मन्नत का धागा बांधा। मंदिर के बाहर मेले में काफी रौनक दिख रही है। मिलेनियम सिटी में ग्रामीण मेले का स्वरूप देखने को मिल रहा है। मंदिर आने वाली महिलाएं सिंदूर, बद्धी, चूड़ियां, कड़े आदि के साथ बच्चों के खिलौने खरीद रही हैं।
मंदिर में बेसहारा बुजुर्गों के संगठन अर्थ सेवियर फाउंडेशन, कानूनी अधिकारों की जागरूकता के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से स्टॉल गया है। कैनविन फाउंडेशन की ओर से स्वास्थ्य जांच शिविर लगाई गई है।
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काश कि बन गया होता नया मंदिर:
कुरुक्षेत्र से आए मदन लाल अपने पोते के मुंडन के लिए सपरिवार गुरुग्राम की शीतला माता के मंदिर आए हैं। सुबह मुंडन के बाद परंपरा के अनुसार एक रात उन्हें मंदिर में गुजारनी है। मंदिर के पास एक खुली जगह पर पूरा परिवार धूप में चटाई डालकर बैठा है। मदन बताते हैं कि यह पीढि़यों की परंपरा रही है। रात के वक्त यहीं या आस-पास किसी शेड में चले जाएंगे। पहले मंदिर रुकने की जगह होती थी, जहां रुका करते थे। ऐसे दर्जनों परिवार मंदिर के पास जहां जगह मिल जाए, वहां बैठे या सोए नजर आते हैं।
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मंदिर परिसर का 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा निर्माण कार्य के कारण बंद है। पिछले सात साल से निर्माण कार्य चल रहा है मगर दूर दराज के लोगों की आस्था और विश्वास मंदिर निर्माण की कछुआ गति से डिगी नहीं है। कई परिवार दर्शन के लिए बने प्लेटफॉर्म के नीचे दरी या चादर बिछाकर लेटे नजर आए तो कुछ मंदिर परिसर के पड़ोस की जगह पर कुछ मेला परिसर में कहीं भी जमे थे। छोटे-छाेटे बच्चे, घूंघट निकाले नवविवाहिताएं, बुजुर्ग इस तरह की तमाम अव्यवस्थाओं को झेलने पर विवश हैं रहे हैं।
दिल्ली एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ग्रामीणों की कुल देवी के तौर माता शीतला की मान्यता रही है। माता के दरबार ही नए जोड़े आशीर्वाद लेते हैं और बच्चों के मुंडन होते हैं। मंदिर वर्ष 2017 में बनने के लिए बंद हुआ 2024 तक मंदिर का महज 20 फीसदी हिस्सा श्रद्धालुओं के लिए खुला है।
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ऊना से माता चिंतपूर्णी से जोत लाकर स्थापित किया:
रेलवे रोड स्थित माता चिंतपूर्णी मंदिर का नया भवन तैयार हो गया है। नवरात्र के पहले दिन माता चिंतपूर्णी की प्रतिमा समेत अन्य देवी देवताओं की प्रतिमा को सफेद पत्थर से बने मंदिर के नए रूप में स्थापित कर पूजा शुरू की गई। मंदिर को बहुत ही खूबसूरती से सजाया गया है। काफी संख्या में श्रद्धालुओं माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर में भक्तों के लिए फलाहार प्रसाद वितरण की भी व्यवस्था है। रेलवे रोड स्थित यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के ऊना स्थित चिंतपूर्णी माता का रूप हैं। वर्ष 1973 में सन्यासिनी लक्ष्मी देवी ने माता चिंतपूर्णी से जोत लाकर यहां उनकी मूर्ति स्थापित की थी। मंदिर के प्रबंधक सतीश वर्मा ने बताया कि मंदिर में अष्टमी को माता की चौकी का आयोजन किया जाएगा।
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सिनेमाहॉल बनना था मगर पिडिंया निकली तो मंदिर बनाया:
न्यू रेलवे रोड स्थित सुदर्शन माता मंदिर में प्रयागराज और इलाहाबाद से आए पंडितों के साथ मिलकर दुर्गासप्तशती का पाठ और यज्ञ हवन कर रहे हैं। इस मंदिर में मां दुर्गा की मूर्ति ऊपरी तल पर है। इसके नीचे माता वैष्णव देवी का स्वरूप देवी रूप पिंडिंयों के दर्शन के लिए लोग आ रहे हैं। मंदिर में भक्तों के लिए फलाहार प्रसाद की व्यवस्था भी है। यह मंदिर पुराने शहर के लोगों की आस्था का केंद्र है।
मंदिर के ट्रस्टी इंद्र राज मलिक बताते हैं कि उनके पिता जनकराज मलिक ने इस जमीन को सिनेमाहॉल बनाने के लिए लिया था। पुराने गुड़गांव गांव से सटे इस जगह पर एक पुराना तालाब (जोहड़) था। पुराने शहर का यह एक तरह से मुख्य इलाका था। मगर जब जोहड़ को बंद किया गया और नींव खोदी गई तो माता की पिंडिंया निकली। उन पिंडिंयों स्थापित कर वर्ष 1963 में यहां मंदिर का निर्माण किया गया। संभवत: कभी यहां मंदिर रहा होगा। उनके पिता ने कई तीर्थों की यात्रा की और हर तीर्थ स्थल से कुछ नायाब चीजें लाकर मंदिर में लगाई है।
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राम मंदिर में दुर्गासप्तशती और मानस पाठ
सेक्टर चार स्थित श्रीराम मंदिर को नवरात्रों के मौके पर सजा दिया गया है। यहां रामचरित मानस पाठ और सुबह शाम दुर्गासप्तशती का पाठ चल रहा है। गुफा वाले मंदिर नव दुर्गा मंदिर में भी चंडी पाठ किया जा रहा है। कलश स्थापना की गई है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। नवरात्रों के पहले दिन लोगों ने मंदिरों और घरों में कलश स्थापना कर नौ दिवसीय अनुष्ठान शुरू किया। श्रीमाता शीतला के मंदिर में काफी संख्या में लोगों ने माता के दर्शन किए। मंदिर के सत्संग हॉल में लगातार माता के जयकारे लगे। दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा था। मंदिर परिसर में माता के दर्शन पूजन और मुंडन के लिए आए परिवारों ने मन्नत का धागा बांधा। मंदिर के बाहर मेले में काफी रौनक दिख रही है। मिलेनियम सिटी में ग्रामीण मेले का स्वरूप देखने को मिल रहा है। मंदिर आने वाली महिलाएं सिंदूर, बद्धी, चूड़ियां, कड़े आदि के साथ बच्चों के खिलौने खरीद रही हैं।
मंदिर में बेसहारा बुजुर्गों के संगठन अर्थ सेवियर फाउंडेशन, कानूनी अधिकारों की जागरूकता के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से स्टॉल गया है। कैनविन फाउंडेशन की ओर से स्वास्थ्य जांच शिविर लगाई गई है।
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काश कि बन गया होता नया मंदिर:
कुरुक्षेत्र से आए मदन लाल अपने पोते के मुंडन के लिए सपरिवार गुरुग्राम की शीतला माता के मंदिर आए हैं। सुबह मुंडन के बाद परंपरा के अनुसार एक रात उन्हें मंदिर में गुजारनी है। मंदिर के पास एक खुली जगह पर पूरा परिवार धूप में चटाई डालकर बैठा है। मदन बताते हैं कि यह पीढि़यों की परंपरा रही है। रात के वक्त यहीं या आस-पास किसी शेड में चले जाएंगे। पहले मंदिर रुकने की जगह होती थी, जहां रुका करते थे। ऐसे दर्जनों परिवार मंदिर के पास जहां जगह मिल जाए, वहां बैठे या सोए नजर आते हैं।
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मंदिर परिसर का 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा निर्माण कार्य के कारण बंद है। पिछले सात साल से निर्माण कार्य चल रहा है मगर दूर दराज के लोगों की आस्था और विश्वास मंदिर निर्माण की कछुआ गति से डिगी नहीं है। कई परिवार दर्शन के लिए बने प्लेटफॉर्म के नीचे दरी या चादर बिछाकर लेटे नजर आए तो कुछ मंदिर परिसर के पड़ोस की जगह पर कुछ मेला परिसर में कहीं भी जमे थे। छोटे-छाेटे बच्चे, घूंघट निकाले नवविवाहिताएं, बुजुर्ग इस तरह की तमाम अव्यवस्थाओं को झेलने पर विवश हैं रहे हैं।
दिल्ली एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ग्रामीणों की कुल देवी के तौर माता शीतला की मान्यता रही है। माता के दरबार ही नए जोड़े आशीर्वाद लेते हैं और बच्चों के मुंडन होते हैं। मंदिर वर्ष 2017 में बनने के लिए बंद हुआ 2024 तक मंदिर का महज 20 फीसदी हिस्सा श्रद्धालुओं के लिए खुला है।
ऊना से माता चिंतपूर्णी से जोत लाकर स्थापित किया:
रेलवे रोड स्थित माता चिंतपूर्णी मंदिर का नया भवन तैयार हो गया है। नवरात्र के पहले दिन माता चिंतपूर्णी की प्रतिमा समेत अन्य देवी देवताओं की प्रतिमा को सफेद पत्थर से बने मंदिर के नए रूप में स्थापित कर पूजा शुरू की गई। मंदिर को बहुत ही खूबसूरती से सजाया गया है। काफी संख्या में श्रद्धालुओं माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर में भक्तों के लिए फलाहार प्रसाद वितरण की भी व्यवस्था है। रेलवे रोड स्थित यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के ऊना स्थित चिंतपूर्णी माता का रूप हैं। वर्ष 1973 में सन्यासिनी लक्ष्मी देवी ने माता चिंतपूर्णी से जोत लाकर यहां उनकी मूर्ति स्थापित की थी। मंदिर के प्रबंधक सतीश वर्मा ने बताया कि मंदिर में अष्टमी को माता की चौकी का आयोजन किया जाएगा।
सिनेमाहॉल बनना था मगर पिडिंया निकली तो मंदिर बनाया:
न्यू रेलवे रोड स्थित सुदर्शन माता मंदिर में प्रयागराज और इलाहाबाद से आए पंडितों के साथ मिलकर दुर्गासप्तशती का पाठ और यज्ञ हवन कर रहे हैं। इस मंदिर में मां दुर्गा की मूर्ति ऊपरी तल पर है। इसके नीचे माता वैष्णव देवी का स्वरूप देवी रूप पिंडिंयों के दर्शन के लिए लोग आ रहे हैं। मंदिर में भक्तों के लिए फलाहार प्रसाद की व्यवस्था भी है। यह मंदिर पुराने शहर के लोगों की आस्था का केंद्र है।
मंदिर के ट्रस्टी इंद्र राज मलिक बताते हैं कि उनके पिता जनकराज मलिक ने इस जमीन को सिनेमाहॉल बनाने के लिए लिया था। पुराने गुड़गांव गांव से सटे इस जगह पर एक पुराना तालाब (जोहड़) था। पुराने शहर का यह एक तरह से मुख्य इलाका था। मगर जब जोहड़ को बंद किया गया और नींव खोदी गई तो माता की पिंडिंया निकली। उन पिंडिंयों स्थापित कर वर्ष 1963 में यहां मंदिर का निर्माण किया गया। संभवत: कभी यहां मंदिर रहा होगा। उनके पिता ने कई तीर्थों की यात्रा की और हर तीर्थ स्थल से कुछ नायाब चीजें लाकर मंदिर में लगाई है।
राम मंदिर में दुर्गासप्तशती और मानस पाठ
सेक्टर चार स्थित श्रीराम मंदिर को नवरात्रों के मौके पर सजा दिया गया है। यहां रामचरित मानस पाठ और सुबह शाम दुर्गासप्तशती का पाठ चल रहा है। गुफा वाले मंदिर नव दुर्गा मंदिर में भी चंडी पाठ किया जा रहा है। कलश स्थापना की गई है।