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दोहरी मार झेलने को मजबूर गुरुग्राम के उद्योग

Mon, 10 May 2021 11:13 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 10 May 2021 11:13 PM IST
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The operation of buses from Gurugram to other states forced Gurugram industries to bear the brunt of double whammy
गुरुग्राम। कोरोना महामारी के कारण लोगों की नौैकरी व रोजगार छूट रहे हैं, वहीं उद्योग जगत भी इससे बच नहीं पा रहा। क्योंकि लॉकडाउन के कारण उत्पादों की मांग कम होने, श्रमिकों का पलायन औैर कच्चा माल नहीं मिलने के कारण औैद्योगिक इकाइयों में कामकाज ठप हो चुका है। पलायन रोकने के लिए काफी उद्योगपतियों ने श्रमिकों को लॉकडाउन में हरसंभव मदद का आश्वासन दिया था, जिस कारण उनको वेतन भी देेना पड़ रहा है। जिस कारण गुरुग्राम के उद्योगपति दोहरी मार झेल रहे हैं।
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श्रमिकों की बात करें तो प्रवासियों के गुरुग्राम से पलायन के बाद औद्योगिक इकाइयों में लगभग 40 फीसदी ही श्रमिक हैं। वहीं लॉकडाउन में भी इनमें से लोगों को पलायन अभी भी जारी है। ऐसे में उद्योगपतियों के आगे समस्या यह हैै कि अगर कोरोना संक्रमण का प्रभाव कम नहीं हुआ तो कैसे वे नुकसान सेे बच सकेंगे। औद्योगिक एसोसिएशन भी सरकार से सहायता की उम्मीद लगाए बैठी हैं, ताकि हरियाणा के उद्योग जगत को नुकसान से बचाया जा सके। लॉकडाउन का दूसरा सप्ताह शुरू हो चुका है, वहीं दिल्ली में पहले ही लॉकडाउन लगने पिछले काफी समय से मार्केट बंद हैं। जिस कारण औद्योगिक इकाइयों को पार्ट्स या एसेसरीज तैयार करने छोटे पुर्जे, एल्युमीनियम सहित अन्य कच्चा माल नहीं मिल रहा। ऐसे में इकाइयों में इमरजेंसी के लिए रखे स्टॉक सेे ही काम चलाना पड़ा, जबकि अब कंपनियों में यह स्टॉक भी खत्म होने लगा। जिस कारण प्रोडक्शन बंद हो जाएगा। औद्योगिक एसोसिएशन ने सरकार से मार्केट खोलने का मांग भी हैै, ताकि औैद्योगिक इकाइयों को कच्चा माल मिल सके।
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मारुति प्लांट बंद होने से हजारों कंपनियों ठप
मारुति सुजुकी इंडिया ने गुरुग्राम और मानेसर स्थित प्लांट को 16 मई तक बंद रखने की घोषणा की है। ऐसे में गुरुग्राम की हजारों कंपनियों पर इसका असर पड़ा है और उनके प्रोडक्शन का कार्य बंद करना या कम करना पड़ गया है। क्योंकि मारुति प्लांट में बनने वाली गाड़ियों में लगनेे वाले पार्ट अलग-अलग छोटी कंपनियों में बनाए जाते हैं।
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नुकसान झेलने को मजबूर उद्योगपति
गुरुग्राम सेे प्रवासियों का पलायन होने से कंपनियों में सिर्फ 35-40 फीसदी श्रमिक ही रह गए हैं। श्रमिकों का पलायन रोकने के लिए उद्योगपतियों ने लॉकडाउन के दौरान उनका वेतन देने एवं हरसंभव मदद करने का आश्वासन दिया था। ऐसे में काफी कंपनियों में कच्चा माल खत्म होने या प्रोडक्शन बंद होने के कारण कामकाज नहीं हो पा रहा। वहीं श्रमिकों को वेतन भी देना पड़ रहा, ताकि वे गुरुग्राम छोड़कर न जाएं। ऐसे में उद्योगपतियों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा हैै।
वर्जन
वर्तमान में उद्योग जगत काफी नाजुक दौर से गुजर रहा है। अगर कुछ दिनों में हालात नहीं सुधरे तो स्थिति गंभीर हो सकती है। उद्योगों को नुकसान से बचाने के लिए सरकार को उचित कदम उठाकर सहयोग करना होगा। कच्चे माल के लिए मार्केट खोलना चाहिए, ताकि प्रोडक्शन का काम शुरू हो सके। क्योंकि उद्योगपतियों को श्रमिकों का गुरुग्राम से पलायन रोकने के लिए खाली बैठाकर वेतन देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। - केके गांधी, अध्यक्ष, आईडीए सेक्टर-37, गुरुग्राम

प्रदेश सरकार और केन्द्र सरकार को कंपनियों को कच्चा माल और उत्पाद बनाने वाले पार्ट्स के बाजार खोलने चाहिए, ताकि कंपनियों को समय पर पार्ट्स मिल सकें। जिससे प्रोडक्शन का काम नहीं रुके। इस बारे में इंडस्ट्रियल एसोसिएशन द्वारा सरकार से मांग भी की जा चुकी है। लेकिन लॉकडाउन के दौरान इन बाजारों को खोलने का कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। - मनोज त्यागी, महासचिव, आईएमटी मानेसर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
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