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Gurugram News: एमडब्ल्यूएसएल तकनीक से मास्टर सीवर लाइन होगी मजबूत
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सेक्टर-22/23 के बीच मास्टर रोड के साथ गुजर रही जर्जर सीवर लाइन होगी ठीक
नंबर गेम - 8.40 करोड़ रुपये होंगे खर्च
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सेक्टर-22/23 के बीच मास्टर रोड के साथ गुजर रही 1000 एमएम व्यास की मौजूदा मास्टर सीवर लाइन का सुदृढ़ीकरण एवं पुनर्वास किया जाएगा। इसके लिए मशीन वाउंड स्पाइरल लाइनिंग (एमडब्ल्यूएसएल) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस कार्य पर करीब 8.40 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
जीएमडीए के कार्यकारी अभियंता विभोर दुहन ने बताया कि मौजूदा सीवर लाइन की स्थिति का साइट सर्वे करने के साथ ही यांत्रिक तरीके से डी-सिल्टिंग की जाएगी। कार्य के दौरान सीवर का प्रवाह प्रभावित न हो, इसके लिए पंपिंग और बाईपास की व्यवस्था भी की जाएगी। सीवर लाइन की सफाई के बाद निकाली गई गाद और मलबे का नियमानुसार निस्तारण किया जाएगा। इसके अलावा एमडब्ल्यूएसएल तकनीक से लाइन की आंतरिक संरचना को मजबूत किया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि कार्य पूरा होने के बाद तीन वर्ष की दोष देयता अवधि (डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड) भी शामिल की गई है। इस अवधि में संबंधित एजेंसी को किसी भी प्रकार की कमी या खराबी सामने आने पर उसे बिना अतिरिक्त लागत के दूर करना होगा। उन्होंने कहा कि बताया कि यह लाइन 20 साल से ज्यादा पुरानी और जर्जर हालत में है। करीब 1100 मीटर लाइन को ठीक कराया जाना है। इससे मास्टर सीवर लाइन की क्षमता और मजबूती बेहतर होने की उम्मीद है। विभोर ने बताया कि एमडब्ल्यूएसएल तकनीक में मौजूदा सीवर लाइन को खोदकर बदलने के बजाय उसके भीतर नई लाइनिंग तैयार की जाती है। इससे सड़क की खुदाई कम होती है और यातायात व्यवस्था पर भी अपेक्षाकृत कम असर पड़ता है।
बसई लाइन पर जल्द शुरू होगा काम
जीएमडीए पुरानी बसई मास्टर सीवर लाइन की मरम्मत के लिए भी एमडब्ल्यूएसएल तकनीक का उपयोग करेगा। बसई रोड पर भी जर्जर सीवर लाइन को दुरुस्त करने का कार्य किया जाना है। यह कार्य एक ठेकेदार को अलाट कर दिया गया है। जल्द काम शुरू होने की उम्मीद है।
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नंबर गेम - 8.40 करोड़ रुपये होंगे खर्च
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सेक्टर-22/23 के बीच मास्टर रोड के साथ गुजर रही 1000 एमएम व्यास की मौजूदा मास्टर सीवर लाइन का सुदृढ़ीकरण एवं पुनर्वास किया जाएगा। इसके लिए मशीन वाउंड स्पाइरल लाइनिंग (एमडब्ल्यूएसएल) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस कार्य पर करीब 8.40 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
जीएमडीए के कार्यकारी अभियंता विभोर दुहन ने बताया कि मौजूदा सीवर लाइन की स्थिति का साइट सर्वे करने के साथ ही यांत्रिक तरीके से डी-सिल्टिंग की जाएगी। कार्य के दौरान सीवर का प्रवाह प्रभावित न हो, इसके लिए पंपिंग और बाईपास की व्यवस्था भी की जाएगी। सीवर लाइन की सफाई के बाद निकाली गई गाद और मलबे का नियमानुसार निस्तारण किया जाएगा। इसके अलावा एमडब्ल्यूएसएल तकनीक से लाइन की आंतरिक संरचना को मजबूत किया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि कार्य पूरा होने के बाद तीन वर्ष की दोष देयता अवधि (डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड) भी शामिल की गई है। इस अवधि में संबंधित एजेंसी को किसी भी प्रकार की कमी या खराबी सामने आने पर उसे बिना अतिरिक्त लागत के दूर करना होगा। उन्होंने कहा कि बताया कि यह लाइन 20 साल से ज्यादा पुरानी और जर्जर हालत में है। करीब 1100 मीटर लाइन को ठीक कराया जाना है। इससे मास्टर सीवर लाइन की क्षमता और मजबूती बेहतर होने की उम्मीद है। विभोर ने बताया कि एमडब्ल्यूएसएल तकनीक में मौजूदा सीवर लाइन को खोदकर बदलने के बजाय उसके भीतर नई लाइनिंग तैयार की जाती है। इससे सड़क की खुदाई कम होती है और यातायात व्यवस्था पर भी अपेक्षाकृत कम असर पड़ता है।
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बसई लाइन पर जल्द शुरू होगा काम
जीएमडीए पुरानी बसई मास्टर सीवर लाइन की मरम्मत के लिए भी एमडब्ल्यूएसएल तकनीक का उपयोग करेगा। बसई रोड पर भी जर्जर सीवर लाइन को दुरुस्त करने का कार्य किया जाना है। यह कार्य एक ठेकेदार को अलाट कर दिया गया है। जल्द काम शुरू होने की उम्मीद है।
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