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Gurugram News: जुर्माने की राशि न भरने पर गुरुग्राम अदालत ने याचिकाकर्ता की पैरवी रोकी
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तीन हजार रुपये में से 1500 रुपये देने थे जिला बार एसोसिएशन के फंड में
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। अदालत के आदेशों की अनदेखी और हर्जाने की राशि जमा न कराने पर सिविल जज मनीष कुमार की अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने याचिकाकर्ता टीका राम को मामले में पैरवी करने से रोक दिया है। मुकदमे में देरी के लिए उस पर अतिरिक्त पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
पलवल के रघुनंदन उर्फ रुग्गी ने टीका राम के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर किया था। यह मुकदमा जमीन पर चहारदीवारी बनाने और कब्जे में दखल रोकने के लिए था। टीका राम ने इसे खारिज कराने के लिए अदालत में याचिका दी। 22 सितंबर 2025 को सिविल जज कोर्ट ने उसकी अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने टीका राम पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया। इसमें से पांच हजार रुपये वादी को और पांच हजार रुपये गुरुग्राम बार एसोसिएशन वेलफेयर फंड में देने का आदेश था।
हाईकोर्ट से मिली थी जुर्माने में राहत
टीका राम ने निचली अदालत के आदेश को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी। 22 दिसंबर 2025 को न्यायमूर्ति वीरेंद्र अग्रवाल ने जुर्माने को घटाकर 3,000 रुपये कर दिया, जिसमें 1,500 रुपये वादी को और 1,500 रुपये बार एसोसिएशन फंड को देने थे। हाईकोर्ट से राहत के बावजूद टीका राम ने यह राशि जमा नहीं कराई और उसकी आर्थिक तंगी का बहाना भी अदालत ने खारिज कर दिया। सिविल जज मनीष कुमार ने उसे तब तक पैरवी से रोका जब तक वह हाईकोर्ट के 3,000 रुपये और सिविल कोर्ट के अतिरिक्त पांच हजार रुपये का जुर्माना जमा नहीं कर देता। रोक की अवधि में हुई अदालती प्रक्रिया को बाद में चुनौती नहीं दी जा सकेगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। अदालत के आदेशों की अनदेखी और हर्जाने की राशि जमा न कराने पर सिविल जज मनीष कुमार की अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने याचिकाकर्ता टीका राम को मामले में पैरवी करने से रोक दिया है। मुकदमे में देरी के लिए उस पर अतिरिक्त पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
पलवल के रघुनंदन उर्फ रुग्गी ने टीका राम के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर किया था। यह मुकदमा जमीन पर चहारदीवारी बनाने और कब्जे में दखल रोकने के लिए था। टीका राम ने इसे खारिज कराने के लिए अदालत में याचिका दी। 22 सितंबर 2025 को सिविल जज कोर्ट ने उसकी अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने टीका राम पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया। इसमें से पांच हजार रुपये वादी को और पांच हजार रुपये गुरुग्राम बार एसोसिएशन वेलफेयर फंड में देने का आदेश था।
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हाईकोर्ट से मिली थी जुर्माने में राहत
टीका राम ने निचली अदालत के आदेश को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी। 22 दिसंबर 2025 को न्यायमूर्ति वीरेंद्र अग्रवाल ने जुर्माने को घटाकर 3,000 रुपये कर दिया, जिसमें 1,500 रुपये वादी को और 1,500 रुपये बार एसोसिएशन फंड को देने थे। हाईकोर्ट से राहत के बावजूद टीका राम ने यह राशि जमा नहीं कराई और उसकी आर्थिक तंगी का बहाना भी अदालत ने खारिज कर दिया। सिविल जज मनीष कुमार ने उसे तब तक पैरवी से रोका जब तक वह हाईकोर्ट के 3,000 रुपये और सिविल कोर्ट के अतिरिक्त पांच हजार रुपये का जुर्माना जमा नहीं कर देता। रोक की अवधि में हुई अदालती प्रक्रिया को बाद में चुनौती नहीं दी जा सकेगी।
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