{"_id":"67f575ab2431c74c9503cd46","slug":"the-file-for-taking-action-against-the-doctors-and-employees-guilty-of-embezzlement-is-stuck-in-panchkula-gurgaon-news-c-25-1-mwt1003-102394-2025-04-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gurugram News: गबन में दोषी डाॅक्टर व कर्मचारियों पर कार्यवाही की फाइल पंचकूला में अटकी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gurugram News: गबन में दोषी डाॅक्टर व कर्मचारियों पर कार्यवाही की फाइल पंचकूला में अटकी
विज्ञापन
-75 लाख रुपये के दवा के बजट को किया गया था खुर्द बुर्द, रिकार्ड भी मिला था अधूरा
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह : पिनगवां सीएचसी में दवाओं के गबन मामले में दोषी पाए गए डॉक्टर व कर्मचारियों के विरुद्ध आरोप साबित होने के दो माह बाद भी कार्रवाई नहीं हुई है। जांच कमेटी ने इस बहुचर्चित मामले में एसएमओ गगन खटाना, यूसुफ फार्मेसिस्ट और प्रेम सिंह लेखा सहायक को जांच में दोषी मानते हुए अपनी रिपोर्ट सिविल सर्जन मांडीखेड़ा को कई महीने पहले सौंपी दी थी। दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पंचकूला में बैठे अधिकारी मामले को दबाए बैठे हैं। इसमें पंचकूला बैठे बाबुओं की मिलीभगत भी बताई जा रही है। इससे ग्रामीणों में रोष है।
गौरतलब है कि पिनगवां सीएचसी में मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना के नाम पर करीब दो साल पहले सरकार द्वारा दवा खरीदने के लिए 75 लाख रुपये का बजट दिया गया। इसे तत्कालीन एसएमओ गगन खटाना, फार्मसिस्ट यूसुफ और प्रेम सिंह लेखा सहायक ने दवा खरीदने के बजाए खुर्द बुर्द कर दिया। मामले से पर्दा तब उठा जब पिनगवां सीएचसी में दवा नहीं मिलने पर क्षेत्र के लोग बैरंग लौटने लगे। इसके बाद क्षेत्र के लोगों ने शिकायत के साथ साथ आरटीआई से भी जवाब मांगा। इसमें दवाइयों के बजट गबन मामले की तस्वीर साफ हो गई। इसके बाद सीएमओ द्वारा मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई। जो कई महीने तक मामले में लीपा पोती करती रही, लेकिन जब मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में पहुंचा तो कमेटी को जांच पूरी करनी पड़ी। जिसमें उक्त तीनों कर्मचारियों को दोषी ठहराया गया।
-- -
वर्जन
कमेटी की जांच रिपोर्ट को पंचकूला उच्च अधिकारियों के लिए भेजा हुआ है। अगर वहां से कोई जवाब मांगा जाएगा तो वह भी दिया जाएगा। अब मामले की कार्रवाई उच्च अधिकारियों के हाथों में है।
विज्ञापन
-डाॅ.सर्वजीत, सिविल सर्जन मांडीखेडा।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह : पिनगवां सीएचसी में दवाओं के गबन मामले में दोषी पाए गए डॉक्टर व कर्मचारियों के विरुद्ध आरोप साबित होने के दो माह बाद भी कार्रवाई नहीं हुई है। जांच कमेटी ने इस बहुचर्चित मामले में एसएमओ गगन खटाना, यूसुफ फार्मेसिस्ट और प्रेम सिंह लेखा सहायक को जांच में दोषी मानते हुए अपनी रिपोर्ट सिविल सर्जन मांडीखेड़ा को कई महीने पहले सौंपी दी थी। दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पंचकूला में बैठे अधिकारी मामले को दबाए बैठे हैं। इसमें पंचकूला बैठे बाबुओं की मिलीभगत भी बताई जा रही है। इससे ग्रामीणों में रोष है।
गौरतलब है कि पिनगवां सीएचसी में मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना के नाम पर करीब दो साल पहले सरकार द्वारा दवा खरीदने के लिए 75 लाख रुपये का बजट दिया गया। इसे तत्कालीन एसएमओ गगन खटाना, फार्मसिस्ट यूसुफ और प्रेम सिंह लेखा सहायक ने दवा खरीदने के बजाए खुर्द बुर्द कर दिया। मामले से पर्दा तब उठा जब पिनगवां सीएचसी में दवा नहीं मिलने पर क्षेत्र के लोग बैरंग लौटने लगे। इसके बाद क्षेत्र के लोगों ने शिकायत के साथ साथ आरटीआई से भी जवाब मांगा। इसमें दवाइयों के बजट गबन मामले की तस्वीर साफ हो गई। इसके बाद सीएमओ द्वारा मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई। जो कई महीने तक मामले में लीपा पोती करती रही, लेकिन जब मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में पहुंचा तो कमेटी को जांच पूरी करनी पड़ी। जिसमें उक्त तीनों कर्मचारियों को दोषी ठहराया गया।
विज्ञापन
वर्जन
कमेटी की जांच रिपोर्ट को पंचकूला उच्च अधिकारियों के लिए भेजा हुआ है। अगर वहां से कोई जवाब मांगा जाएगा तो वह भी दिया जाएगा। अब मामले की कार्रवाई उच्च अधिकारियों के हाथों में है।
विज्ञापन
-डाॅ.सर्वजीत, सिविल सर्जन मांडीखेडा।