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आंदोलन के पक्ष में मुखर हो रहे जिले के किसान

Sun, 06 Dec 2020 12:06 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 06 Dec 2020 12:06 AM IST
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The farmers of the district are being vocal in favor of the movement
गुरुग्राम। सड़कों पर चल रहे आंदोलन को समर्थन देने वाले किसानों की संख्या जिले में भी लगातार बढ़ रही है। कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग के पक्ष में अब वे मुखर होने लगे हैं। किसानों को उम्मीद थी कि 5वें दौर की बातचीत के दौरान कृषि कानून वापस लेने पर सहमति बनेगी, लेकिन यह उम्मीद पूरी नहीं हुई। इसे लेकर जिले के किसानों में रोष है। उनका कहना है कि कृषि प्रधान देश में सरकार ने उनके हितों की अनदेखी की तो उसे पछताना पड़ेगा।
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किसानों की मांगें जायज हैं और सरकार को इन्हें पूरी करना चाहिए। किसान अन्नदाता है और रहेगा। केंद्र सरकार ने कृषि कानून वापस लेने चाहिए, क्योंकि भारत की पहचान कृषि एवं किसानों से ही है।
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- चौ. विजय सिंह, मऊ निवासी
कृषि कानूनों का सभी किसान विरोध कर रहे हैं, क्योंकि इनमें एमएसपी का प्रावधान नहीं है। सरकार को किसानों की मांग माननी चाहिए। अब दक्षिण हरियाणा के किसान भी आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में सड़कों पर उतरेंगे।
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- बिजेंद्र यादव, इंछापुरी निवासी
केंद्र सरकार को किसानों की मांग मानने के लिए दोबारा बातचीत करनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसानों से मिलकर विश्वास दिलाना चाहिए कि एमएसपी नहीं हटेगी। इस संबंध में किसानों के बीच विश्वास पैदा करने के लिए अध्यादेश लाना चाहिए।
- राजेंद्र यादव, डाडावास निवासी
सरकार को एमएसपी की लिखित गारंटी देनी चाहिए। सरकार की नीयत साफ है तो किसानों को गले लगाना चाहिए। किसानों की बात नहीं मानना दुर्भाग्यशाली है। सरकार को किसानों की नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
- राकेश यादव, इंछापुरी निवासी
सरकार पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने वाले नए-नए कानून बनाकर किसानों के हितों की अनदेखी कर रही है। कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया गया तो सरकार को पछताना पड़ेगा। देश का अन्नदाता सड़क पर आ चुका है और उसे चारों ओर से समर्थन मिल रहा है।

- विनोद कुमार सैनी, फर्रूखनगर, किसान
कृषि कानून किसानों के हित में नहीं हैं, इसीलिए हम इनका विरोध कर रहे हैं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। अपने हक के लिए किसान लड़ रहे हैं। लिहाजा सरकार को उनकी बात माननी चाहिए। यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
- शिव कुमार, सुल्तानपुर, किसान
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