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लिगांनुपात : गुरुग्राम में कुछ सुधार, 18वें से 11वें पायदान पर आया
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गुरुग्राम। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ को आत्मसात करने के मामले में गुरुग्राम इस बार पिछड़ गया। हालांकि इस बार सात अंकों की छलांग के साथ 18वें से 11वें स्थान पर पहुंच गया है। जिले में घटता लिंगानुपात प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गया है। इस साल की पहली छमाही के जारी आंकड़ों के अनुसार गुरुग्राम में 1000 लड़कों पर 914 लड़कियों ने जन्म लिया है, जो पिछले साल के मुकाबले सात कम हैं। पिछले साल यह आंकड़ा 1000 लड़कों पर 921 लड़कियों का था। इस मामले में गुरुग्राम नूंह और पलवल से फिसड्डी साबित हुआ लेकिन फरीदाबाद से सात पायदान ऊपर है। पिछली बार फरीदाबाद छठे पायदान पर था जो इस बार 17वें पायदान पहुंच गया है, जबकि एक अंक की गिरावट के साथ पलवल आठवें और नूंह तीन नंबर की बढ़त के साथ दसवें नंबर पर है।
पिछले छह साल में हालांकि गुरुग्राम का लिंगानुपात सुधर रहा है। साल 2015 में 858 की दयनीय स्थिति से उभरते हुए पिछले वर्ष यानी 2020 में जिले ने 921 बेटियों के जन्म का आंकड़ा छुआ। साल दर साल स्थिति में सुधार होता गया। वर्ष 2016 मे 1000 लड़कों पर लड़कियों के जन्म का आंकड़ा 883 पहुंचा। 2017 और 2018 में 901 के आंकड़े पर पहुंचा। 2019 में यह आंकड़ा पहली बार 910 पर पहुंचा। 2020 ने रिकॉर्ड बनाते हुए 921 का आंकड़ा छुआ, जो अब घटकर 914 रह गया है।
रोहतक ने किया कमाल
साल 2021 के जनवरी से जून तक जारी हुए लिंगानुपात के आंकड़ों में रोहतक ने कमाल करते हुए आखिरी से पहले पायदान तक की छलांग लगाई है। इस साल के पहले छह महीनों में रोहतक में सबसे ज्यादा बेटियों की किलकारियां गूंजी हैं। रोहतक में एक हजार बेटों पर 962 बेटियों ने जन्म लिया है। पिछले साल यह आंकड़ा 912 था। झज्जर के हालात सबसे चिंताजनक हैं, जिला 11वें स्थान से सबसे निचले पायदान पर पहुंच गया है। यहां एक हजार बेटों पर 858 बेटियां ही जन्मी हैं। जनवरी से जून माह तक प्रदेश भर में 220841 बच्चों ने जन्म लिया। इनमें 115565 लड़के और 105255 लड़कियां जन्मी हैं। दूसरे नंबर पर चरखी दादरी जिला रहा, जहां 1335 लड़कों पर 1261 लड़कियों ने जन्म लिया। तीसरे नंबर पर पानीपत जिले में 6238 लड़कों पर 5848 लड़कियों ने जन्म लिया। महेंद्रगढ़ जिले में 2777 लड़कों पर 2586 लड़कियों का जन्म हुआ। रेवाड़ी में 3868 लड़कों पर 3585 लड़कियां जन्मीं। पंचकूला में 2395 लड़कों पर 2218 लड़कियों का जन्म हुआ। जींद में 4579 लड़कों पर 4236 बेटियां पैदा हुई।
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सीएम सिटी की हालत चिंताजनक
सीएम मनोहर लाल के गृह जिले करनाल में छह महीने में 11168 बच्चे जन्मे, जिनमें 5915 लड़के और 5253 लड़कियों की किलकारी गूंजी। करनाल जिला लिंगानुपात के मामले में 19वें नंबर पर है। पिछले साल करनाल 10वें स्थान पर था। इसके अलावा झज्जर और फतेहाबाद में लिंगानुपात के मामले में स्थिति बहुत खराब है।
छह महीनों में करेंगे सुधार : डीसी
उपायुक्त डॉ. यश गर्ग के मुताबिक यह शुरुआती छह महीनों के आंकड़े हैं। इनके मुताबिक हम पिछड़े जरूर हैं, लेकिन हालत इतनी चिंताजनक नहीं है। अगले छह महीनों में निश्चित ही इस हालात में सुधार करने का प्रयास होगा। स्वास्थ्य विभाग हरसंभव प्रयास कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरी तत्परता से अपना काम कर रही है। छह महीने बाद स्थिति जरूर बदलेगी।
जिलेवार लिंगानुपात का हाल
रोहतक -962
चरखी दादरी -945
पानीपत -937
महेंद्रगढ़ -931
रेवाड़ी -927
पंचकूला -926
जींद - 925
पलवल -923
सिरसा -923
नूंह -922
गुरुग्राम -914
कुरुक्षेत्र -911
अंबाला -909
हिसार -908
कैथल -902
यमुनानगर -900
फरीदाबाद -895
सोनीपत -888
करनाल -888
भिवानी -887
फतेहाबाद -862
झज्जर -858
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पिछले छह साल में हालांकि गुरुग्राम का लिंगानुपात सुधर रहा है। साल 2015 में 858 की दयनीय स्थिति से उभरते हुए पिछले वर्ष यानी 2020 में जिले ने 921 बेटियों के जन्म का आंकड़ा छुआ। साल दर साल स्थिति में सुधार होता गया। वर्ष 2016 मे 1000 लड़कों पर लड़कियों के जन्म का आंकड़ा 883 पहुंचा। 2017 और 2018 में 901 के आंकड़े पर पहुंचा। 2019 में यह आंकड़ा पहली बार 910 पर पहुंचा। 2020 ने रिकॉर्ड बनाते हुए 921 का आंकड़ा छुआ, जो अब घटकर 914 रह गया है।
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रोहतक ने किया कमाल
साल 2021 के जनवरी से जून तक जारी हुए लिंगानुपात के आंकड़ों में रोहतक ने कमाल करते हुए आखिरी से पहले पायदान तक की छलांग लगाई है। इस साल के पहले छह महीनों में रोहतक में सबसे ज्यादा बेटियों की किलकारियां गूंजी हैं। रोहतक में एक हजार बेटों पर 962 बेटियों ने जन्म लिया है। पिछले साल यह आंकड़ा 912 था। झज्जर के हालात सबसे चिंताजनक हैं, जिला 11वें स्थान से सबसे निचले पायदान पर पहुंच गया है। यहां एक हजार बेटों पर 858 बेटियां ही जन्मी हैं। जनवरी से जून माह तक प्रदेश भर में 220841 बच्चों ने जन्म लिया। इनमें 115565 लड़के और 105255 लड़कियां जन्मी हैं। दूसरे नंबर पर चरखी दादरी जिला रहा, जहां 1335 लड़कों पर 1261 लड़कियों ने जन्म लिया। तीसरे नंबर पर पानीपत जिले में 6238 लड़कों पर 5848 लड़कियों ने जन्म लिया। महेंद्रगढ़ जिले में 2777 लड़कों पर 2586 लड़कियों का जन्म हुआ। रेवाड़ी में 3868 लड़कों पर 3585 लड़कियां जन्मीं। पंचकूला में 2395 लड़कों पर 2218 लड़कियों का जन्म हुआ। जींद में 4579 लड़कों पर 4236 बेटियां पैदा हुई।
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सीएम सिटी की हालत चिंताजनक
सीएम मनोहर लाल के गृह जिले करनाल में छह महीने में 11168 बच्चे जन्मे, जिनमें 5915 लड़के और 5253 लड़कियों की किलकारी गूंजी। करनाल जिला लिंगानुपात के मामले में 19वें नंबर पर है। पिछले साल करनाल 10वें स्थान पर था। इसके अलावा झज्जर और फतेहाबाद में लिंगानुपात के मामले में स्थिति बहुत खराब है।
छह महीनों में करेंगे सुधार : डीसी
उपायुक्त डॉ. यश गर्ग के मुताबिक यह शुरुआती छह महीनों के आंकड़े हैं। इनके मुताबिक हम पिछड़े जरूर हैं, लेकिन हालत इतनी चिंताजनक नहीं है। अगले छह महीनों में निश्चित ही इस हालात में सुधार करने का प्रयास होगा। स्वास्थ्य विभाग हरसंभव प्रयास कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरी तत्परता से अपना काम कर रही है। छह महीने बाद स्थिति जरूर बदलेगी।
जिलेवार लिंगानुपात का हाल
रोहतक -962
चरखी दादरी -945
पानीपत -937
महेंद्रगढ़ -931
रेवाड़ी -927
पंचकूला -926
जींद - 925
पलवल -923
सिरसा -923
नूंह -922
गुरुग्राम -914
कुरुक्षेत्र -911
अंबाला -909
हिसार -908
कैथल -902
यमुनानगर -900
फरीदाबाद -895
सोनीपत -888
करनाल -888
भिवानी -887
फतेहाबाद -862
झज्जर -858