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Gurugram News: जब शिक्षक ही न हों स्कूल में, तो कौन संवारेगा भविष्य
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- प्राइमरी स्कूल में 550 बच्चों के बीच मात्र चार अध्यापक
- सरकारी स्कूल में शिक्षक न होने से शिक्षण व्यवस्था प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। सरकारी स्कूल में शिक्षक न होने के कारण खिल्लूका स्कूल के छात्र बिना शिक्षा के खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं। सरकार का सब पढ़ें, सब बढ़ें का नारा भी फाइलों में ही सिमटकर रह गया है। अकेले खिल्लूका स्कूल में ही चौबीस अध्यापकों के खाली होना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार राजकीय माध्यमिक विद्यालय खिल्लूका में उर्दू के एक, अंग्रेजी के एक, साइंस के दो, सामाजिक अध्ययन के एक, संस्कृत के एक, ड्राइंग के एक और मुख्याध्यापक सहित कुल आठ पद खाली हैं। जिनके अभाव में 360 बच्चों की पढ़ाई अधूरी है।
इसके अलावा लगभग प्राइमरी स्कूल में 550 बच्चों को पढ़ाने के लिए मात्र चार अध्यापक ही कार्यरत हैं। जिनमें प्राइमरी के मुख्याध्यापक ऑफिस कार्य में ही व्यस्त रहते हैं। बाल वाटिका सहित छह कक्षाओं को तीन अध्यापक पढा रहे हैं। सरकार के नियमों के अनुसार प्राइमरी में सोलह पद खाली हैं। अध्यापकों के अभाव में गरीब बच्चों को न चाहते हुए भी प्राइवेट स्कूलों में जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि एक तरफ प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चे नहीं होने के कारण सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है। वहीं क्षेत्र के स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए अध्यापकों के पद खाली पड़े है। अभिभावक आरिफ हुसैन का कहना है कि सरकार गरीबों को निजी स्कूलों के हवाले कर रही है। जिसकी वजह से जनता का सरकारी स्कूलों से विश्वास उठता जा रहा है। पंचायत सदस्य अरशद अली और तौफीक, अभिभावक ईसा, सैकुलदीन, इस्माइल, रमजान खान , समसुद्दीन, अजरूद्दीन, मोहम्मद हनीफ, साहिद, रशीद अहमद, सलाउद्दीन, सलामुद्दीन आदि ने सरकार से मांग की है कि अध्यापकों की स्थाई भर्ती नहीं होने तक स्कूल में ऑन ड्यूटी अध्यापक भेजने की व्यवस्था की जाए। इस बारे में स्कूल के मुख्याध्यापक अमित कुमार का कहना है कि उच्च अधिकारियों से स्कूलों में रिक्त पड़े पदों के बारे में रिपोर्ट भेजी गई है। शीघ्र ही पदों को भरा जा सकता है।
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- सरकारी स्कूल में शिक्षक न होने से शिक्षण व्यवस्था प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। सरकारी स्कूल में शिक्षक न होने के कारण खिल्लूका स्कूल के छात्र बिना शिक्षा के खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं। सरकार का सब पढ़ें, सब बढ़ें का नारा भी फाइलों में ही सिमटकर रह गया है। अकेले खिल्लूका स्कूल में ही चौबीस अध्यापकों के खाली होना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार राजकीय माध्यमिक विद्यालय खिल्लूका में उर्दू के एक, अंग्रेजी के एक, साइंस के दो, सामाजिक अध्ययन के एक, संस्कृत के एक, ड्राइंग के एक और मुख्याध्यापक सहित कुल आठ पद खाली हैं। जिनके अभाव में 360 बच्चों की पढ़ाई अधूरी है।
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इसके अलावा लगभग प्राइमरी स्कूल में 550 बच्चों को पढ़ाने के लिए मात्र चार अध्यापक ही कार्यरत हैं। जिनमें प्राइमरी के मुख्याध्यापक ऑफिस कार्य में ही व्यस्त रहते हैं। बाल वाटिका सहित छह कक्षाओं को तीन अध्यापक पढा रहे हैं। सरकार के नियमों के अनुसार प्राइमरी में सोलह पद खाली हैं। अध्यापकों के अभाव में गरीब बच्चों को न चाहते हुए भी प्राइवेट स्कूलों में जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि एक तरफ प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चे नहीं होने के कारण सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है। वहीं क्षेत्र के स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए अध्यापकों के पद खाली पड़े है। अभिभावक आरिफ हुसैन का कहना है कि सरकार गरीबों को निजी स्कूलों के हवाले कर रही है। जिसकी वजह से जनता का सरकारी स्कूलों से विश्वास उठता जा रहा है। पंचायत सदस्य अरशद अली और तौफीक, अभिभावक ईसा, सैकुलदीन, इस्माइल, रमजान खान , समसुद्दीन, अजरूद्दीन, मोहम्मद हनीफ, साहिद, रशीद अहमद, सलाउद्दीन, सलामुद्दीन आदि ने सरकार से मांग की है कि अध्यापकों की स्थाई भर्ती नहीं होने तक स्कूल में ऑन ड्यूटी अध्यापक भेजने की व्यवस्था की जाए। इस बारे में स्कूल के मुख्याध्यापक अमित कुमार का कहना है कि उच्च अधिकारियों से स्कूलों में रिक्त पड़े पदों के बारे में रिपोर्ट भेजी गई है। शीघ्र ही पदों को भरा जा सकता है।
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