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Gurugram News: आईटी कंपनी में सात महीनों में किया दस करोड़ का गबन
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एकाउंट शाखा में तैनात था कर्मचारी, जांच के बाद केस दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सिविल लाइन थाना क्षेत्र की एक आईटी में काम करने के दौरान कर्मचारी ने दस करोड़ से ज्यादा का गबन किया। कंपनी के निदेशक ने पुलिस आयुक्त व आर्थिक अपराध शाखा को कर्मचारी के खिलाफ शिकायत की। जांच के बाद शुक्रवार को सिविल लाइन थाने में केस दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार सेक्टर 15 स्थित आईटी कंपनी के निदेशक जितेश अरोड़ा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि ग्रेटर नोएडा निवासी विनीत भाटी 19 जुलाई 2019 से कंपनी में वित्त प्रमुख के रूप में कार्यरत था। उसे कई वित्तीय और संबंधित जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। इसमें कंपनी के कई लेनदेन को अधिकृत करना भी शामिल था। जुलाई 2023 में वह मेडिकल अवकाश पर चला गया। इसके बाद कंपनी के कई लेन-देन बंद हो गए। काफी दिनों तक छुट्टी पर रहने और संदिग्ध लगने पर कंपनी ने आंतरिक जांच की। इस दौरान पता चला कि सात महीनों के दौरान आरोपी ने कंपनी के खातों से 10 करोड़ से ज्यादा की रकम अपने व्यक्तिगत खातों में भेजी। 9 जुलाई को आरोपी से इस रकम के बारे में पूछताछ की गई। इसके बाद उसके बैंक खाते की स्टेटमेंट चेक की गई। इस दौरान कंपनी को आरोपी द्वारा रकम शेयर बाजार में निवेश करने की जानकारी मिली। यह भी पता चला कि रकम की हेराफेरी करने के लिए कंपनी के खातों की पासबुक में गड़बड़ी की गई।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सिविल लाइन थाना क्षेत्र की एक आईटी में काम करने के दौरान कर्मचारी ने दस करोड़ से ज्यादा का गबन किया। कंपनी के निदेशक ने पुलिस आयुक्त व आर्थिक अपराध शाखा को कर्मचारी के खिलाफ शिकायत की। जांच के बाद शुक्रवार को सिविल लाइन थाने में केस दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार सेक्टर 15 स्थित आईटी कंपनी के निदेशक जितेश अरोड़ा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि ग्रेटर नोएडा निवासी विनीत भाटी 19 जुलाई 2019 से कंपनी में वित्त प्रमुख के रूप में कार्यरत था। उसे कई वित्तीय और संबंधित जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। इसमें कंपनी के कई लेनदेन को अधिकृत करना भी शामिल था। जुलाई 2023 में वह मेडिकल अवकाश पर चला गया। इसके बाद कंपनी के कई लेन-देन बंद हो गए। काफी दिनों तक छुट्टी पर रहने और संदिग्ध लगने पर कंपनी ने आंतरिक जांच की। इस दौरान पता चला कि सात महीनों के दौरान आरोपी ने कंपनी के खातों से 10 करोड़ से ज्यादा की रकम अपने व्यक्तिगत खातों में भेजी। 9 जुलाई को आरोपी से इस रकम के बारे में पूछताछ की गई। इसके बाद उसके बैंक खाते की स्टेटमेंट चेक की गई। इस दौरान कंपनी को आरोपी द्वारा रकम शेयर बाजार में निवेश करने की जानकारी मिली। यह भी पता चला कि रकम की हेराफेरी करने के लिए कंपनी के खातों की पासबुक में गड़बड़ी की गई।
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