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Gurugram News: सरोगेसी से जन्मे बच्चे पर जैविक माता-पिता का अधिकार
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अदालत ने बच्चे की कस्टडी भी दी, चिकित्सकीय कारणों से दंपती ने लिया था सरोगेसी का सहारा
जिला मेडिकल बोर्ड ने भी दी थी मंजूरी
विराट त्यागी
गुरुग्राम। सरोगेसी से जुड़े एक मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश दिया। अदालत के अनुसार सरोगेट मां के जरिये जन्म लेने वाले बच्चे के कानूनी माता-पिता और बच्चे की कस्टडी का अधिकार जैविक माता-पिता को मिलेगा। यह आदेश अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार की अदालत ने सरोगेसी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 के तहत दायर आवेदन को मंजूर करते हुए दिया।मूलरूप से जम्मू-कश्मीर के जम्मू शहर के सेक्टर-1 निवासी ललित अबरोल और उनकी पत्नी मयंका कोहली ने सरोगेसी एक्ट के तहत अदालत में आवेदन दायर किया था। दंपती की ओर से बताया गया कि चिकित्सीय कारणों के चलते उन्हें सरोगेसी की जरूरत है। इसके लिए जिला मेडिकल बोर्ड, गुरुग्राम की ओर से आवश्यक प्रमाण पत्र भी जारी किया गया था। सरोगेसी के लिए छत्तीसगढ़ के बिलासपुर की रहने वाली 32 वर्षीय लक्ष्मी पथारी ने सरोगेट मां बनने की सहमति दी। वह विवाहित हैं और उनके दो बच्चे भी हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी और पेश किए गए दस्तावेजों व शपथ पत्रों की जांच की। कोर्ट ने पाया कि सरोगेसी के लिए कानून में निर्धारित जरूरी शर्तों का पालन किया गया है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सरोगेट मां लक्ष्मी से जन्म लेने वाले बच्चे के कानूनी माता-पिता ललित अबरोल और मयंका कोहली होंगे। बच्चे की कस्टडी भी इसी दंपती के पास रहेगी। यह आदेश बच्चे के जन्म के बाद बर्थ एफिडेविट के रूप में माना जाएगा। इससे बच्चे के माता-पिता और उसकी कस्टडी को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट रहेगी। अदालत में सरोगेसी को परोपकारी सरोगेसी बताया गया है। इसके तहत सरोगेट मां को किसी तरह का व्यावसायिक भुगतान नहीं किया जाएगा। केवल कानून के तहत अनुमत चिकित्सा और निर्धारित खर्च ही दिए जाएंगे। दंपती ने अदालत के समक्ष यह भी वचन दिया कि सरोगेसी से जन्म लेने वाले बच्चे को वे अपना बच्चा मानेंगे और उसकी पूरी जिम्मेदारी उठाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चे को किसी भी परिस्थिति में नहीं छोड़ेंगे।
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जिला मेडिकल बोर्ड ने भी दी थी मंजूरी
विराट त्यागी
गुरुग्राम। सरोगेसी से जुड़े एक मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश दिया। अदालत के अनुसार सरोगेट मां के जरिये जन्म लेने वाले बच्चे के कानूनी माता-पिता और बच्चे की कस्टडी का अधिकार जैविक माता-पिता को मिलेगा। यह आदेश अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार की अदालत ने सरोगेसी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 के तहत दायर आवेदन को मंजूर करते हुए दिया।मूलरूप से जम्मू-कश्मीर के जम्मू शहर के सेक्टर-1 निवासी ललित अबरोल और उनकी पत्नी मयंका कोहली ने सरोगेसी एक्ट के तहत अदालत में आवेदन दायर किया था। दंपती की ओर से बताया गया कि चिकित्सीय कारणों के चलते उन्हें सरोगेसी की जरूरत है। इसके लिए जिला मेडिकल बोर्ड, गुरुग्राम की ओर से आवश्यक प्रमाण पत्र भी जारी किया गया था। सरोगेसी के लिए छत्तीसगढ़ के बिलासपुर की रहने वाली 32 वर्षीय लक्ष्मी पथारी ने सरोगेट मां बनने की सहमति दी। वह विवाहित हैं और उनके दो बच्चे भी हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी और पेश किए गए दस्तावेजों व शपथ पत्रों की जांच की। कोर्ट ने पाया कि सरोगेसी के लिए कानून में निर्धारित जरूरी शर्तों का पालन किया गया है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सरोगेट मां लक्ष्मी से जन्म लेने वाले बच्चे के कानूनी माता-पिता ललित अबरोल और मयंका कोहली होंगे। बच्चे की कस्टडी भी इसी दंपती के पास रहेगी। यह आदेश बच्चे के जन्म के बाद बर्थ एफिडेविट के रूप में माना जाएगा। इससे बच्चे के माता-पिता और उसकी कस्टडी को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट रहेगी। अदालत में सरोगेसी को परोपकारी सरोगेसी बताया गया है। इसके तहत सरोगेट मां को किसी तरह का व्यावसायिक भुगतान नहीं किया जाएगा। केवल कानून के तहत अनुमत चिकित्सा और निर्धारित खर्च ही दिए जाएंगे। दंपती ने अदालत के समक्ष यह भी वचन दिया कि सरोगेसी से जन्म लेने वाले बच्चे को वे अपना बच्चा मानेंगे और उसकी पूरी जिम्मेदारी उठाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चे को किसी भी परिस्थिति में नहीं छोड़ेंगे।
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