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चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के निवासी नहीं देंगे मेंटेनेंस चार्ज
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गुरुग्राम। चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के निवासियों ने बिल्डर को मेंटेनेंस चार्ज देने से मना कर दिया है। लोगों का कहना है कि वह किसी भी कीमत पर चार्ज नहीं देंगे। सोसाइटी में किसी तरह का रखरखाव किया जा रहा है और न ही लोगों को कोई सहूलियत दी जा रही है। बावजूद इसके लाखों रुपये हर महीने लोगों से मेंटेनेंस चार्ज वसूला जा रहा है।
अब ऐसा नहीं होगा। शुल्क तभी दिया जाएगा जब सोसाइटी में हुए हादसे की पूरी जांच हो जाएगी और आरोपी की पहचान कर उस पर दोष सिद्ध कर लिया जाएगा। इस बीच बिल्डर प्रबंधन लगातार लोगों पर चार्ज देने का दबाव बना रहा है। बताया जा रहा है कि बिल्डर प्रबंधन की ओर से चार्ज नहीं देने की सूरत में कई सुविधाएं रोकने की धमकी भी दी जा रही है। लोगों ने जिला नगर योजनाकार, प्रवर्तन (डीटीपी, इंफोर्समेंट) को इसकी शिकायत देकर बिल्डर की मेंटेनेंस चार्ज वसूली पर रोक लगाने की मांग की है।
सोसाइटी की आरडब्ल्यूए के सदस्य संदीप बरसाईं के अनुसार हादसा फरवरी में हुआ था। नियम के अनुसार मेंटेनेंस चार्ज तीन महीने में एक बार जमा कराना होता है। इस लिहाज से जनवरी, फरवरी और मार्च का चार्ज जनवरी में ही जमा करा दिया गया था। अब अप्रैल से जून तक चार्ज जमा कराना था लेकिन सोसाइटी के लोगों ने चार्ज देने से मना कर दिया है। अप्रैल से लेकर जून तक का चार्ज कोई भी निवासी देने को तैयार नहीं है और न ही देंगे। संदीप के अनुसार जब सोसाइटी की मरम्मत आदि ही नहीं कराई जाती तो कैसा मेंटेनेंस चार्ज? इमारतें गिर रही है। आए दिन प्लास्टर गिर रहा है। लोग सहमे हैं और बिल्डर को मेंटेनेंस चार्ज की पड़ी है। कोई भी निवासी किसी भी सूरत में मेंटेनेंस चार्ज नहीं देगा।
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500 से अधिक परिवार कर गए पलायन
संदीप ने बताया कि सोसाइटी दो फेज में बनी है। पहले फेज में पांच टावर है, जबकि दूसरे फेज में चार। हादसा पहले फेज के डी टावर में हुआ था। 10 फरवरी को डी-टावर के छठे माले से लेकर पहली मंजिल तक के ड्राइंग रूम की छत गिरने से दो महिलाओं की मौत हो गई थी। इस फेज के लोग सबसे अधिक सदमे और डर में हैं। यही कारण है कि करीब 500 परिवार (करीब 2000 लोग) अभी तक यहां से पलायन कर चुके हैं। डी टावर में बने 64 फ्लैट तो हादसे के बाद ही खाली करा लिए थे। हादसे के डर से उसी दौरान बहुत से परिवार सोसाइटी छोड़कर चले गए। किराएदार तो सभी निकल लिए। कुछ मूल आवंटी बचे हैं। उनकी मजबूरी है। सोसाइटी के स्ट्रक्चरल ऑडिट (संरचनात्मक लेखा परीक्षण) का इंतजार है। डीटीपी से हुई मुलाकात में उन्हें 20 जून से परीक्षण का आश्वासन दिया है।
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अब ऐसा नहीं होगा। शुल्क तभी दिया जाएगा जब सोसाइटी में हुए हादसे की पूरी जांच हो जाएगी और आरोपी की पहचान कर उस पर दोष सिद्ध कर लिया जाएगा। इस बीच बिल्डर प्रबंधन लगातार लोगों पर चार्ज देने का दबाव बना रहा है। बताया जा रहा है कि बिल्डर प्रबंधन की ओर से चार्ज नहीं देने की सूरत में कई सुविधाएं रोकने की धमकी भी दी जा रही है। लोगों ने जिला नगर योजनाकार, प्रवर्तन (डीटीपी, इंफोर्समेंट) को इसकी शिकायत देकर बिल्डर की मेंटेनेंस चार्ज वसूली पर रोक लगाने की मांग की है।
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सोसाइटी की आरडब्ल्यूए के सदस्य संदीप बरसाईं के अनुसार हादसा फरवरी में हुआ था। नियम के अनुसार मेंटेनेंस चार्ज तीन महीने में एक बार जमा कराना होता है। इस लिहाज से जनवरी, फरवरी और मार्च का चार्ज जनवरी में ही जमा करा दिया गया था। अब अप्रैल से जून तक चार्ज जमा कराना था लेकिन सोसाइटी के लोगों ने चार्ज देने से मना कर दिया है। अप्रैल से लेकर जून तक का चार्ज कोई भी निवासी देने को तैयार नहीं है और न ही देंगे। संदीप के अनुसार जब सोसाइटी की मरम्मत आदि ही नहीं कराई जाती तो कैसा मेंटेनेंस चार्ज? इमारतें गिर रही है। आए दिन प्लास्टर गिर रहा है। लोग सहमे हैं और बिल्डर को मेंटेनेंस चार्ज की पड़ी है। कोई भी निवासी किसी भी सूरत में मेंटेनेंस चार्ज नहीं देगा।
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500 से अधिक परिवार कर गए पलायन
संदीप ने बताया कि सोसाइटी दो फेज में बनी है। पहले फेज में पांच टावर है, जबकि दूसरे फेज में चार। हादसा पहले फेज के डी टावर में हुआ था। 10 फरवरी को डी-टावर के छठे माले से लेकर पहली मंजिल तक के ड्राइंग रूम की छत गिरने से दो महिलाओं की मौत हो गई थी। इस फेज के लोग सबसे अधिक सदमे और डर में हैं। यही कारण है कि करीब 500 परिवार (करीब 2000 लोग) अभी तक यहां से पलायन कर चुके हैं। डी टावर में बने 64 फ्लैट तो हादसे के बाद ही खाली करा लिए थे। हादसे के डर से उसी दौरान बहुत से परिवार सोसाइटी छोड़कर चले गए। किराएदार तो सभी निकल लिए। कुछ मूल आवंटी बचे हैं। उनकी मजबूरी है। सोसाइटी के स्ट्रक्चरल ऑडिट (संरचनात्मक लेखा परीक्षण) का इंतजार है। डीटीपी से हुई मुलाकात में उन्हें 20 जून से परीक्षण का आश्वासन दिया है।