{"_id":"68dd66de56d50678ef0dbda2","slug":"ramleela-played-in-city-gurgaon-news-c-25-1-mwt1001-106751-2025-10-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gurugram News: मेरे लखन दुलारे, बोल कछु बोल, मत भैया को रुलाओ बोल कछु बोल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gurugram News: मेरे लखन दुलारे, बोल कछु बोल, मत भैया को रुलाओ बोल कछु बोल
Wed, 01 Oct 2025 11:07 PM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
Updated Wed, 01 Oct 2025 11:07 PM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज़ एजेंसी
फिरोजपुर झिरका। श्री रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित श्री रामलीला महोत्सव के चलते रावण अंगद संवाद, लक्ष्मण शक्ति की लीला का वर्णन किया गया। रामचंद्र के बिरहा को देखकर पंडाल में बैठे दर्शक भाव विभोर हो गए और महिलाओं की आंखों से आंसू छलक आए। इंद्रजीत और लक्ष्मण के युद्ध के दौरान इंद्रजीत मायावी अस्त्र का प्रयोग करते लक्ष्मण को युद्ध में शक्ति लगने के चलते मूर्छा में डाल देता है । मूर्छित अवस्था में हनुमान द्वारा लक्ष्मण को श्री रामचंद्र के शिविर की ओर लाया जाता है। जहां सुक्षेण वैद्य द्वारा हिमालय से एक जड़ी बूटी संजीवनी लाने के लिए हनुमान जी को भेजा जाता है। इस दौरान श्री रामचंद्र जब विलाप करते हैं। मेरे लखन दुलारे, बोल कछु बोल, मत भैया को रुलाओ बोल कछु बोल, इन पंक्तियों को जैसे ही श्री रामचंद्र के द्वारा गया जाता है वैसे ही दर्शन भाव विभोर हो जाते हैं।
श्री रामलीलाओं के दौरान सीता मैया के अपहरण के बाद श्री रामचंद्र की ओर से रावण को एक अंतिम चेतावनी के साथ-साथ मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम अपनी वानर सेना का नेतृत्व करते हैं और एक बार राजकुमार अंगद को दूत बनाकर लंका भेजते हैं। ताकि रावण माता सीता को सम्मान के साथ लौटा दे और युद्ध को विराम मिल सके। इस वृत्तांत में शिवा सोनी ने अंगद की भूमिका बखूबी निभाई। जैसे ही अंगद दूत बनकर लंका नगरी में प्रवेश करता है। लंका के लोग भयभीत हो जाते हैं। इसके बाद जमकर रावण-अंगद संवाद होता है। इसके बाद रावण की सेना और प्रभु श्री रामचंद्र की सेना के बीच युद्ध शुरू हो जाता है।
विज्ञापन
फिरोजपुर झिरका। श्री रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित श्री रामलीला महोत्सव के चलते रावण अंगद संवाद, लक्ष्मण शक्ति की लीला का वर्णन किया गया। रामचंद्र के बिरहा को देखकर पंडाल में बैठे दर्शक भाव विभोर हो गए और महिलाओं की आंखों से आंसू छलक आए। इंद्रजीत और लक्ष्मण के युद्ध के दौरान इंद्रजीत मायावी अस्त्र का प्रयोग करते लक्ष्मण को युद्ध में शक्ति लगने के चलते मूर्छा में डाल देता है । मूर्छित अवस्था में हनुमान द्वारा लक्ष्मण को श्री रामचंद्र के शिविर की ओर लाया जाता है। जहां सुक्षेण वैद्य द्वारा हिमालय से एक जड़ी बूटी संजीवनी लाने के लिए हनुमान जी को भेजा जाता है। इस दौरान श्री रामचंद्र जब विलाप करते हैं। मेरे लखन दुलारे, बोल कछु बोल, मत भैया को रुलाओ बोल कछु बोल, इन पंक्तियों को जैसे ही श्री रामचंद्र के द्वारा गया जाता है वैसे ही दर्शन भाव विभोर हो जाते हैं।
श्री रामलीलाओं के दौरान सीता मैया के अपहरण के बाद श्री रामचंद्र की ओर से रावण को एक अंतिम चेतावनी के साथ-साथ मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम अपनी वानर सेना का नेतृत्व करते हैं और एक बार राजकुमार अंगद को दूत बनाकर लंका भेजते हैं। ताकि रावण माता सीता को सम्मान के साथ लौटा दे और युद्ध को विराम मिल सके। इस वृत्तांत में शिवा सोनी ने अंगद की भूमिका बखूबी निभाई। जैसे ही अंगद दूत बनकर लंका नगरी में प्रवेश करता है। लंका के लोग भयभीत हो जाते हैं। इसके बाद जमकर रावण-अंगद संवाद होता है। इसके बाद रावण की सेना और प्रभु श्री रामचंद्र की सेना के बीच युद्ध शुरू हो जाता है।
विज्ञापन