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Gurugram News: मजदूर नेता के घर क्राइम ब्रांच के छापे से उठे सवाल
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संगठनों ने एएसपी से की शिकायत, दो दिन में जांच नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
मानेसर। क्राइम ब्रांच की ओर से एक मजदूर नेता के घर मंगलवार सुबह छापा मारा गया। घटना के विरोध में कई जनसंगठनों ने उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर पुलिस अधीक्षक आयुष यादव से मुलाकात की और पूरे घटनाक्रम की जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
शिकायत के अनुसार मंगलवार सुबह चार-पांच लोग खुद को क्राइम ब्रांच का कर्मचारी बताकर सादे कपड़ों में बिना नंबर प्लेट की सफेद बोलेरो गाड़ी में मजदूर नेता और सीटू के जिला सचिव विनोद के घर पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने जोर-जोर से गेट खटखटाया और दरवाजा न खोलने पर परिवार के अन्य सदस्यों के घर भी जाकर दबाव बनाया। इस दौरान मोबाइल फोन की जांच कर परिवार को डराने-धमकाने की कोशिश की गई।
बताया गया कि घटना के समय विनोद घर पर मौजूद नहीं थे लेकिन उनकी पत्नी और छह वर्षीय बेटी घर में अकेले ही थे। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने विनोद के बारे में जानकारी लेने के साथ-साथ उनकी पत्नी पर दबाव बनाया और रिश्तेदार को जबरन बुलाकर गेट खुलवाने का प्रयास किया। जनसंगठनों का कहना है कि एनसीआर क्षेत्र में मजदूरों को न्यूनतम वेतन और बुनियादी सुविधाएं न मिलने से पहले ही असंतोष है। उन्होंने इसे गैरकानूनी और अस्वीकार्य बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। प्रतिनिधिमंडल ने एएसपी आयुष यादव को ज्ञापन सौंपकर दो दिन के भीतर निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं संगठनों ने चेतावनी दी है कि तय समय में कार्रवाई न होने पर वे प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। इस प्रतिनिधिमंडल में इंद्रजीत सिंह, प्रेमचंद, जगमति सांगवान, रामचंद्र सिवाच, सतबीर सिंह, प्रीत सिंह और अन्य सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मानेसर। क्राइम ब्रांच की ओर से एक मजदूर नेता के घर मंगलवार सुबह छापा मारा गया। घटना के विरोध में कई जनसंगठनों ने उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर पुलिस अधीक्षक आयुष यादव से मुलाकात की और पूरे घटनाक्रम की जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
शिकायत के अनुसार मंगलवार सुबह चार-पांच लोग खुद को क्राइम ब्रांच का कर्मचारी बताकर सादे कपड़ों में बिना नंबर प्लेट की सफेद बोलेरो गाड़ी में मजदूर नेता और सीटू के जिला सचिव विनोद के घर पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने जोर-जोर से गेट खटखटाया और दरवाजा न खोलने पर परिवार के अन्य सदस्यों के घर भी जाकर दबाव बनाया। इस दौरान मोबाइल फोन की जांच कर परिवार को डराने-धमकाने की कोशिश की गई।
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बताया गया कि घटना के समय विनोद घर पर मौजूद नहीं थे लेकिन उनकी पत्नी और छह वर्षीय बेटी घर में अकेले ही थे। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने विनोद के बारे में जानकारी लेने के साथ-साथ उनकी पत्नी पर दबाव बनाया और रिश्तेदार को जबरन बुलाकर गेट खुलवाने का प्रयास किया। जनसंगठनों का कहना है कि एनसीआर क्षेत्र में मजदूरों को न्यूनतम वेतन और बुनियादी सुविधाएं न मिलने से पहले ही असंतोष है। उन्होंने इसे गैरकानूनी और अस्वीकार्य बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। प्रतिनिधिमंडल ने एएसपी आयुष यादव को ज्ञापन सौंपकर दो दिन के भीतर निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं संगठनों ने चेतावनी दी है कि तय समय में कार्रवाई न होने पर वे प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। इस प्रतिनिधिमंडल में इंद्रजीत सिंह, प्रेमचंद, जगमति सांगवान, रामचंद्र सिवाच, सतबीर सिंह, प्रीत सिंह और अन्य सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे।
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