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पुलिस चार एंगिलों से कर रही है 10 करोड़ के फर्जी बीमा क्लेम की जांच

Sat, 26 Jun 2021 06:33 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 26 Jun 2021 06:33 PM IST
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Police is investigating fake insurance claim of 10 crores from four angles
गुरुग्राम। मानव रचना यूनिवर्सिटी के एमडी डॉ. प्रशांत भल्ला को फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर मृत बताकर उनकी दस करोड़ की बीमा राशि को हड़पने के प्रयास के मामले में अभी पुलिस किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है। हालांकि, इस मामले में चार अलग-अलग बिंदुओं पर जांच चल रही है।
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संकेत मिले हैं कि इस मामले में पुलिस को कई अहम जानकारियां मिली हैं लेकिन जांच पूरी होने तक कोई जानकारी लीक करना नहीं चाहती है। दूसरी ओर, एमडी भल्ला का भी मानना है कि उनकी डिटेल निकालने वाला बड़ा सिंडिकेट हैकर है। क्योंकि बीमा कंपनी और रजिस्ट्रार जन्म मृत्यु की साइड को हैक करना इतना आसान नहीं है।
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ये है तफ्तीश
डॉ. प्रशांत भल्ला के मामले में अब तक पुलिस जांच में यह सामने आ चुुका है कि उनका फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की साइट को हैक करके क्यूआर कोड को तोड़ा है। वहीं, बैंक में फर्जी तरीके से खाता खोलने और बीमा रिकार्डों को हैक करने में बड़े हैकर का काम है। इस सब के खुलासे के लिए पुलिस चार बिंदुओं को आधार बनाकर जांच कर रही है।
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इन बिंदुओं में क्यूआर कोड को कैसे तोड़ा गया। बीमा रिकॉर्ड को हैक किया गया और उसमें अटैच रिकॉर्ड को कैसे निकाला गया। एचडीएफसी बैंक में फर्जी तरीके से कैसे खाता खोला। इसके अलावा डॉ. भल्ला के कौन-कौन निकटवर्ती हैं जो उनकी गोपनीय जानकारी रखने वाले हैं। पुलिस की पड़ताल में इन सभी बिंदुओं को शामिल किया गया है। इसके लिए शहर की साइबर क्राइम पुलिस, क्राइम ब्रांच पुलिस के साथ दिल्ली की इनसे जुड़ी सरकारी और कॉरपोरेट स्तर के बड़ी आईटी सेल की मदद ली जा रही है।
बिंदु-1
आसान नहीं है स्वास्थ्य मंत्रालय का क्यूआर कोड तोड़ना
जन्म व मृत्यु के लिए भारत सरकार द्वारा बनाए जाने वाले प्रमाणपत्रों के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जिन क्यूआर कोड का उपयोग किया जाता है, उन्हें तोड़ना आसान नहीं है। इस मामले में साइट को हैक करके कोड को एडिट किया गया है। इस सब की पड़ताल के लिए आईटी सेल व साइबर क्राइम पुलिस जांच कर रही है। इस मामले में केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के जन्म मृत्यु रजिस्ट्रार से भी तकनीकी जानकारी ली जा रही है।
बिंदु-2
रिकॉर्ड को हैक कराने में बीमा कर्मियों का हाथ तो नहीं
यहां जांच का सबसे बड़ा विषय है कि आखिर बीमा कंपनी की साइट को हैक करके वहां से डॉ. भल्ला की पॉलिसी का रिकॉर्ड कैसे हैक कर लिया। यह काम बिना बीमा कंपनी के किसी कर्मचारी की मिलीभगत के संभव नहीं है। इसको लेकर भी पुलिस पूछताछ कर रही है।
बिंदु -3
बैंक में कैसे खुला फर्जी नाम से खाता
पीएनबी मेट लाइफ इंश्योरेंस बीमा कंपनी के क्लेम को खाते में ट्रांसफर कराने के लिए ठग पहले से ही डॉ. भल्ला की पत्नी दीपिका भल्ला के नाम से एचडीएफसी में खाता खुलवा चुके हैं। बिना दीपिका भल्ला की मौजूदगी के यह खाता कैसे खुल गया, ठगों के पास दीपिका के जरूरी प्रमाणपत्रों में आधार कार्ड, पैन कार्ड तथा अन्य प्रपत्र कैसे आए। दीपिका के नाम से आखिर कौन महिला एचडीएफसी बैंक में खाता खुलवाने के लिए पहुंची थी। यह पड़ताल एचडीएफसी के सीसीटीवी फुटेज से की जा रही है। बैंक ने बिना सत्यापन के फर्जी प्रमाणपत्रों से खाता कैसे खोल दिया। बैंक खाता खुलवाने के लिए ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर फर्जी थे। जिसका खुलासा अब तक की पुलिस जांच में हो चुका है। सूत्रों का कहना है कि मोबाइल नंबर तो अब स्विच आफ है। इस सब की गहनता से जांच की जा रही है।
बिंदु-4
निकटवर्तियों का भी हो सकता है हाथ
इस मामले में पुलिस भल्ला व और उनकी पत्नी के नजदीकियों, विवि और घर में कार्यरत स्टाफ पर भी नजर बनाए हुए है। पूरे मामले में दोनों पति-पत्नी के दस्तावेजों की गोपनीय जानकारी अगर हैकर तक पहुंची है तो इसमें उनके किसी निकटवर्ती का भी हाथ हो सकता है। इस एंगल पर भी जांच की जा रही है।
आधा दर्जन हिरासत में
पुलिस इस मामले में अब तक आधा दर्जन लोगों को हिरासत में ले चुकी है। इसमें बैंक, बीमा कंपनी के कर्मचारी सहित शहर के पुराने साइबर क्राइमों में संलिप्त अपराधी भी हैं। पुलिस का कहना है कि इनसे केस का खुलासा करने में काफी मदद मिल रही है। अन्य कई लोग भी शक के घेरे में हैं। करीब आधा दर्जन लोगों से अब भी इन सभी बिंदुओं से पूछताछ की जा रही है।
यह काम किसी बड़े स्तर के हैकर का हो सकता है। बैंक या बीमा कंपनी के कर्मचारियों की मिलीभगत हो सकती है। अभी तक की पुलिस जांच से संतुष्ट हूं। पूरे मामले की गहनता से जांच की जानी चाहिए।

- डॉ. प्रशांत भल्ला, एमडी, मानव रचना यूनिवर्सिटी
इस मामले में कई अहम जानकारियां मिल रही हैं। देश के कई विभागों की साइट को हैक करके 10 करोड़ का फर्जीवाड़ा करने की तैयारी थी। इसीलिए संबंधित विभाग, बैंक, इंश्योरेंस कंपनी के साथ कड़ियों को जोड़कर अपराधियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि जल्दी ही इस केस का खुलासा हो और अपराधी गिरफ्तार हों।
प्रीतपाल सांगवान, एसीपी क्राइम
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