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Gurugram News: पुलिस अभिरक्षा किसी भी स्थिति में यातना या अमानवीय व्यवहार का लाइसेंस नहीं बन सकती
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पुलिस हिरासत में क्रूरता: मानवाधिकार आयोग ने सोहना अपराध शाखा पर जांच के आदेश दिए
29 और 30 जून की सीसीटीवी फुटेज अगली सुनवाई से पहले आयोग के सामने पेश करनी होंगी
अपराध शाखा सोहना पर हिरासत के दौरान अभियुक्त के पैर तोड़ने के लगे है आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। मानवाधिकार आयोग हरियाणा ने अपराध शाखा सोहना पर पुलिस हिरासत के दौरान एक अभियुक्त का पैर तोड़ने के आरोप पर स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने पुलिस को 29 और 30 जून के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। इन फुटेज को अगली सुनवाई से पहले आयोग के सामने पेश करना होगा। आयोग मामले में अगली सुनवाई 24 सितंबर को करेगा।
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ललित बत्रा ने कहा कि पुलिस अभिरक्षा पूछताछ का माध्यम हो सकती है। यह किसी भी स्थिति में यातना या अमानवीय व्यवहार का लाइसेंस नहीं बन सकती। मानवाधिकार आयोग ने यह कार्रवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, सोहना के 30 जून के आदेश पर की है। न्यायिक आदेश में अभियुक्त ने आरोप लगाया था कि 29 जून को उसे लॉकअप से बाहर निकाला गया।
अभियुक्त के आरोप और न्यायिक हस्तक्षेप
अभियुक्त ने आरोप लगाया कि 29 जून को उसे चार मुड़ी पर्चियों में से एक चुनने के लिए मजबूर किया गया था। पर्चियों पर मौत, फ्रैक्चर, गोली लगना और इनाम लिखा था। फ्रैक्चर लिखी पर्ची निकलने पर उसकी टांग तोड़ दी गई। आंखों पर पट्टी बांधकर दो ईंटों के बीच पैर रखकर भारी वस्तु से वार किया गया। बाद में उस पर डॉक्टर के सामने फ्लाईओवर से गिरने की बात कहने का दबाव बनाया गया। पुलिस रिमांड के बाद अभियुक्त को अदालत में पेश नहीं किया गया। पुलिस ने अदालत को बताया कि वह हिरासत से भागने की कोशिश में घायल हुआ था। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट ने स्वयं अस्पताल जाकर पुलिस अधिकारियों की अनुपस्थिति में अभियुक्त का बयान दर्ज किया था।
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आयोग के निर्देश और साक्ष्य संग्रह
न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बयान दर्ज करने के बाद मेडिकल बोर्ड गठित करने और स्वतंत्र जांच कराने के निर्देश दिए थे। आयोग ने पुलिस आयुक्त को 29 और 30 जून के सभी सीसीटीवी फुटेज, डीवीआर रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी को मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट, एमएलआर, एक्सरे, सीटी स्कैन और उपचार रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा गया है। यह सभी चिकित्सीय दस्तावेज आयोग के समक्ष पेश करने होंगे।
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29 और 30 जून की सीसीटीवी फुटेज अगली सुनवाई से पहले आयोग के सामने पेश करनी होंगी
अपराध शाखा सोहना पर हिरासत के दौरान अभियुक्त के पैर तोड़ने के लगे है आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। मानवाधिकार आयोग हरियाणा ने अपराध शाखा सोहना पर पुलिस हिरासत के दौरान एक अभियुक्त का पैर तोड़ने के आरोप पर स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने पुलिस को 29 और 30 जून के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। इन फुटेज को अगली सुनवाई से पहले आयोग के सामने पेश करना होगा। आयोग मामले में अगली सुनवाई 24 सितंबर को करेगा।
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ललित बत्रा ने कहा कि पुलिस अभिरक्षा पूछताछ का माध्यम हो सकती है। यह किसी भी स्थिति में यातना या अमानवीय व्यवहार का लाइसेंस नहीं बन सकती। मानवाधिकार आयोग ने यह कार्रवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, सोहना के 30 जून के आदेश पर की है। न्यायिक आदेश में अभियुक्त ने आरोप लगाया था कि 29 जून को उसे लॉकअप से बाहर निकाला गया।
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अभियुक्त के आरोप और न्यायिक हस्तक्षेप
अभियुक्त ने आरोप लगाया कि 29 जून को उसे चार मुड़ी पर्चियों में से एक चुनने के लिए मजबूर किया गया था। पर्चियों पर मौत, फ्रैक्चर, गोली लगना और इनाम लिखा था। फ्रैक्चर लिखी पर्ची निकलने पर उसकी टांग तोड़ दी गई। आंखों पर पट्टी बांधकर दो ईंटों के बीच पैर रखकर भारी वस्तु से वार किया गया। बाद में उस पर डॉक्टर के सामने फ्लाईओवर से गिरने की बात कहने का दबाव बनाया गया। पुलिस रिमांड के बाद अभियुक्त को अदालत में पेश नहीं किया गया। पुलिस ने अदालत को बताया कि वह हिरासत से भागने की कोशिश में घायल हुआ था। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट ने स्वयं अस्पताल जाकर पुलिस अधिकारियों की अनुपस्थिति में अभियुक्त का बयान दर्ज किया था।
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आयोग के निर्देश और साक्ष्य संग्रह
न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बयान दर्ज करने के बाद मेडिकल बोर्ड गठित करने और स्वतंत्र जांच कराने के निर्देश दिए थे। आयोग ने पुलिस आयुक्त को 29 और 30 जून के सभी सीसीटीवी फुटेज, डीवीआर रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी को मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट, एमएलआर, एक्सरे, सीटी स्कैन और उपचार रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा गया है। यह सभी चिकित्सीय दस्तावेज आयोग के समक्ष पेश करने होंगे।