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Gurugram News: एसीबी में शिकायत के बाद निगम के तोड़फोड़ आदेश के खिलाफ याचिका खारिज
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अदालत से
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-सिविल कोर्ट में राहत मांगने पर कानूनी रोक, डिविजनल कमिश्नर के समक्ष अपील का विकल्प
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। नगर निगम की ओर से जारी अवैध निर्माण को तोड़ने के आदेश के खिलाफ दायर याचिका को जिला अदालत ने खारिज कर दिया। यह आदेश सिविल जज जूनियर डिवीजन विशाल की अदालत ने दिया है।
याचिकाकर्ता मुकेश देवी ने अदालत में बताया कि उन्होंने 17 जुलाई 2020 को जमीन खरीदी थी। उस समय जमीन पर आवासीय मकान बना हुआ था। उनके अनुसार मकान का हाउस टैक्स नियमित रूप से जमा किया जा रहा है और बिजली कनेक्शन भी लगा हुआ है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि मकान की मरम्मत के दौरान नगर निगम के एक अधिकारी ने रिश्वत की मांग की। इसके विरोध में उन्होंने तीन मार्च 2026 को एंटी करप्शन ब्यूरो में शिकायत दी। आरोप है कि शिकायत के बाद निगम अधिकारियों ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया। याचिका में बताया गया कि 23 फरवरी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और इसके बाद सात अगस्त को मकान तोड़ने का आदेश दिया गया। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि आसपास समान स्थिति वाले मकानों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।
नगर निगम की ओर से अदालत में दलील दी गई कि नियमों के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद नियमानुसार तोड़ने का आदेश दिया गया। निगम के अनुसार याचिकाकर्ता को आदेश के खिलाफ डिविजनल कमिश्नर के समक्ष अपील करने का अधिकार है।
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अदालत ने माना कि हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 के तहत ऐसे मामलों में सिविल कोर्ट से तोड़फोड़ की कार्रवाई पर रोक या अन्य राहत मांगने पर स्पष्ट कानूनी प्रतिबंध है। याचिकाकर्ता के पास डिविजनल कमिश्नर के समक्ष अपील का वैधानिक उपाय उपलब्ध है। इसी आधार पर अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
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-सिविल कोर्ट में राहत मांगने पर कानूनी रोक, डिविजनल कमिश्नर के समक्ष अपील का विकल्प
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। नगर निगम की ओर से जारी अवैध निर्माण को तोड़ने के आदेश के खिलाफ दायर याचिका को जिला अदालत ने खारिज कर दिया। यह आदेश सिविल जज जूनियर डिवीजन विशाल की अदालत ने दिया है।
याचिकाकर्ता मुकेश देवी ने अदालत में बताया कि उन्होंने 17 जुलाई 2020 को जमीन खरीदी थी। उस समय जमीन पर आवासीय मकान बना हुआ था। उनके अनुसार मकान का हाउस टैक्स नियमित रूप से जमा किया जा रहा है और बिजली कनेक्शन भी लगा हुआ है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि मकान की मरम्मत के दौरान नगर निगम के एक अधिकारी ने रिश्वत की मांग की। इसके विरोध में उन्होंने तीन मार्च 2026 को एंटी करप्शन ब्यूरो में शिकायत दी। आरोप है कि शिकायत के बाद निगम अधिकारियों ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया। याचिका में बताया गया कि 23 फरवरी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और इसके बाद सात अगस्त को मकान तोड़ने का आदेश दिया गया। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि आसपास समान स्थिति वाले मकानों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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नगर निगम की ओर से अदालत में दलील दी गई कि नियमों के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद नियमानुसार तोड़ने का आदेश दिया गया। निगम के अनुसार याचिकाकर्ता को आदेश के खिलाफ डिविजनल कमिश्नर के समक्ष अपील करने का अधिकार है।
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अदालत ने माना कि हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 के तहत ऐसे मामलों में सिविल कोर्ट से तोड़फोड़ की कार्रवाई पर रोक या अन्य राहत मांगने पर स्पष्ट कानूनी प्रतिबंध है। याचिकाकर्ता के पास डिविजनल कमिश्नर के समक्ष अपील का वैधानिक उपाय उपलब्ध है। इसी आधार पर अदालत ने याचिका खारिज कर दी।