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गांवों में संपत्ति कर व भवन उप नियम लागू करने के मामले में निगम को घेरेंगे ग्रामीण

Thu, 17 Sep 2020 11:40 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 17 Sep 2020 11:40 PM IST
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Peoples against property tax
गुरुग्राम। नगर निगम द्वारा अपने अधीन गांवों में संपत्ति कर लगाने और भवन उप नियम लागू करने के फैसले पर अड़ने के कारण ग्रामीण अब उसे घेरने की रणनीति पर काम करेंगे। इस कड़ी में ग्रामीण नगर निगम से गांवों की पंचायत से मिली राशि, गांवों में विकास कार्यों पर किए गए खर्च, गांवों में उपलब्ध कराई गई सुविधाओं के बारे में ब्योरा मांगेंगे। इसके अलावा पंचायत की भूमि के उपयोग करने एवं ग्रामीण नगर निगम से गांवों में भवन उप नियम लागू करने की स्थिति होने के बारे में भी जानकारी लेंगे। इस संबंध में ग्रामीण आरटीआई लगाएंगे। वह आरटीआई तैयार करने में जुटे हुए हैं।
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नगर निगम के अधीन गांवों में संपत्ति कर लगाने एवं भवन उप नियम लागू करने का विरोध कर रहे ग्रामीणों का नेतृत्व कर रहे जजपा के जिला अध्यक्ष एवं वजीराबाद गांव के सरपंच रहे सूबे सिंह बोहरा ने बताया कि वह इन दोनों मामलों के संबंध में नगर निगम से कई बार बात कर चुके हैं, लेकिन नगर निगम के अधिकारी उनके तर्कों को महत्व नहीं दे रहे हैं। इस कारण उन्होंने नगर निगम को उसकी चाल में ही घेरने की तैयारी की है।
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उन्होंने बताया कि नगर निगम में शामिल करने के दौरान समस्त 38 गांवों की पंचायत के पास कई सौ करोड़ रुपये जमा थे। इसके अलावा सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि थी। यह राशि एवं भूमि नगर निगम के पास चली गई है। इस कारण नगर निगम से पूछा जाएगा कि पंचायतों से प्राप्त हुई राशि में से गांवों में विकास कार्य करने में कितनी खर्च की गई है। इसके अलावा गांवों में क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं और उन पर कितनी राशि खर्च की गई है।
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झाड़सा निवासी एवं नगर निगम का चुनाव लड़ चुके प्रदीप जेलदार ने बताया कि नगर निगम से गांवों की उस कृषि भूमि का भी लेखा जोखा मांगा जाएगा जो उसे गांवों की पंचायत से प्राप्त हुई है। यह कृषि भूमि ग्रामीणों की थी। यह भूमि चकबंदी के दौरान लाल डोरा बढ़वाने पर ग्रामीणों की जमीन में से पंचायत के पास गई थी। यह भूमि ग्रामीणों को सुविधा एवं रास्ते उपलब्ध कराने के लिए ली गई थी।

उधर नगर निगम के दोनों निर्णयों का विरोध कर रहे ग्रामीणों में शामिल बसई निवासी रामनिवास फौजी ने बताया कि नगर निगम से शहर की भांति गांवों में भी भवन उप नियम लागू करने के बारे में पूछा जाएगा कि क्या उसने यह निर्णय लागू करने से पहले गांवों की स्थिति का आकलन किया था, क्या गांवों में भवन उप नियम लागू करने के लिए सड़कें एवं गलिया मौजूद हैं। अगर नियमों का पालन करने वाली स्थिति नहीं है तो फिर गांवों में कैसे मकानों के नक्शे पास किए जाएंगे।
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