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कार्यकारी अभियंताओं को नोटिस जारी होने के बाद अधिकारियों में बेचैनी
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गुरुग्राम। कार्य में लापरवाही बरतने पर नगर निगम आयुक्त की तरफ से नोटिस जारी किए जाने के बाद इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों में बेचैनी का माहौल है। वहीं, कार्यकारी अभियंताओं ने कहा कि पूरी मुस्तैदी से काम में जुटे हैं, नहीं मालूम नोटिस क्यों जारी हुआ है। वहीं, एक कार्यकारी अभियंता ने तो यहां तक कहा कि जलभराव वाली जगहों में से एक भी उनके इलाके में नहीं है। बावजूद इसके नोटिस जारी किए गए।
मालूम हो कि निगमायुक्त मुकेश कुमार आहूजा ने जलभराव वाली जगहों का चयन कर अधिकारियों से एक सप्ताह के अंदर सुझाव मांगा था। इसमें लापरवाही करने पर 9 कार्यकारी अभियंताओं को नोटिस जारी किए गए। एक सप्ताह पहले ही नगर निगम आयुक्त मुकेश कुमार ने कार्यभार संभाला है। शुरुआती बैठकों में ही उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कार्यकारी अभियंताओं को जलभराव वाली जगहों का चयन कर समस्या के समाधान का सुझाव देने का निर्देश दिया था। इसके लिए एक सप्ताह का समय भी दिया गया था। कार्य में लापरवाही पाए जाने पर 9 कार्यकारी अभियंताओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
जलभराव है शहर की सबसे बड़ी समस्या
इस बारे में अधिकांश कार्यकारी अभियंता अभी ज्यादा बोलने से बच रहे हैं लेकिन उनका कहना है कि वह पूरी मुस्तैदी के साथ अपने काम में लगे हुए हैं। समय रहते जलभराव वाली जगहों को चिन्हित कर समस्या का समाधान किया जाएगा। नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मानसून आने पर जलभराव शहर की सबसे बड़ी समस्या बन जाती है। इससे न सिर्फ जाम लगता है बल्कि लंबे समय तक जलजमाव होने के कारण बीमारियों के भी फैलने का खतरा बन जाता है। यही वजह है कि नगर निगम की तरफ से इसे सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आगामी दिनों में इसको लेकर कई बैठकें होंगी, जिसमें जीएमडीए के अधिकारियों से भी जवाब तलब किया जाएगा।
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पुराने ढर्रे पर चल रहे अधिकारी
दरअसल, अब भी नगर निगम के कई अधिकारी पुराने ढर्रे पर ही चल रहे हैं। पिछले साल भी जलभराव को लेकर कई बैठकें हुई थीं लेकिन उसका कोई समाधान नहीं निकल सका था। स्थिति यह थी कि पुराने शहर के साथ ही न्यू गुरुग्राम के कई इलाके जलमग्न दिखाई दिए थे। ऐसे में इस बार नगर निगम आयुक्त के सख्त रुख के चलते अधिकारियों की लापरवाही उन पर भारी पड़ सकती है।
अधिकारियों ने किया था निरीक्षण
निगमायुक्त के आदेश का पालन करते हुए कई कार्यकारी अभियंताओं ने शुक्रवार को नरसिंहपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की सर्विस लेन, फाजिलपुर गांव, बादशाहपुर, वाटिका चौक, मोहम्मदपुर झाड़सा, सेक्टर-9ए व आसपास के क्षेत्र, दरबारीपुर रोड, सैनी मोहल्ला बादशाहपुर सहित आसपास के उन सभी क्षेत्रों का निरीक्षण किया, जहां पर बारिश के दौरान जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है।
35 जगहों में से मेरे इलाके में एक भी नहीं
व्यापक जलभराव वाली 35 जगहें चिन्हित की गई हैं। इसमें से मेरे इलाके में एक भी नहीं है। फिर भी हम आयुक्त महोदय के निर्देशानुसार सर्वे कर रहे हैं। जहां पर थोड़ी सी भी जलभराव की आशंका होगी, उसको दुरुस्त किया जाएगा। नोटिस दिए जाने की कोई जानकारी नहीं है।
- गोपाल कलावत, कार्यकारी अभियंता-1, नगर निगम गुरुग्राम।
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मालूम हो कि निगमायुक्त मुकेश कुमार आहूजा ने जलभराव वाली जगहों का चयन कर अधिकारियों से एक सप्ताह के अंदर सुझाव मांगा था। इसमें लापरवाही करने पर 9 कार्यकारी अभियंताओं को नोटिस जारी किए गए। एक सप्ताह पहले ही नगर निगम आयुक्त मुकेश कुमार ने कार्यभार संभाला है। शुरुआती बैठकों में ही उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कार्यकारी अभियंताओं को जलभराव वाली जगहों का चयन कर समस्या के समाधान का सुझाव देने का निर्देश दिया था। इसके लिए एक सप्ताह का समय भी दिया गया था। कार्य में लापरवाही पाए जाने पर 9 कार्यकारी अभियंताओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
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जलभराव है शहर की सबसे बड़ी समस्या
इस बारे में अधिकांश कार्यकारी अभियंता अभी ज्यादा बोलने से बच रहे हैं लेकिन उनका कहना है कि वह पूरी मुस्तैदी के साथ अपने काम में लगे हुए हैं। समय रहते जलभराव वाली जगहों को चिन्हित कर समस्या का समाधान किया जाएगा। नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मानसून आने पर जलभराव शहर की सबसे बड़ी समस्या बन जाती है। इससे न सिर्फ जाम लगता है बल्कि लंबे समय तक जलजमाव होने के कारण बीमारियों के भी फैलने का खतरा बन जाता है। यही वजह है कि नगर निगम की तरफ से इसे सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आगामी दिनों में इसको लेकर कई बैठकें होंगी, जिसमें जीएमडीए के अधिकारियों से भी जवाब तलब किया जाएगा।
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पुराने ढर्रे पर चल रहे अधिकारी
दरअसल, अब भी नगर निगम के कई अधिकारी पुराने ढर्रे पर ही चल रहे हैं। पिछले साल भी जलभराव को लेकर कई बैठकें हुई थीं लेकिन उसका कोई समाधान नहीं निकल सका था। स्थिति यह थी कि पुराने शहर के साथ ही न्यू गुरुग्राम के कई इलाके जलमग्न दिखाई दिए थे। ऐसे में इस बार नगर निगम आयुक्त के सख्त रुख के चलते अधिकारियों की लापरवाही उन पर भारी पड़ सकती है।
अधिकारियों ने किया था निरीक्षण
निगमायुक्त के आदेश का पालन करते हुए कई कार्यकारी अभियंताओं ने शुक्रवार को नरसिंहपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की सर्विस लेन, फाजिलपुर गांव, बादशाहपुर, वाटिका चौक, मोहम्मदपुर झाड़सा, सेक्टर-9ए व आसपास के क्षेत्र, दरबारीपुर रोड, सैनी मोहल्ला बादशाहपुर सहित आसपास के उन सभी क्षेत्रों का निरीक्षण किया, जहां पर बारिश के दौरान जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है।
35 जगहों में से मेरे इलाके में एक भी नहीं
व्यापक जलभराव वाली 35 जगहें चिन्हित की गई हैं। इसमें से मेरे इलाके में एक भी नहीं है। फिर भी हम आयुक्त महोदय के निर्देशानुसार सर्वे कर रहे हैं। जहां पर थोड़ी सी भी जलभराव की आशंका होगी, उसको दुरुस्त किया जाएगा। नोटिस दिए जाने की कोई जानकारी नहीं है।
- गोपाल कलावत, कार्यकारी अभियंता-1, नगर निगम गुरुग्राम।