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कोरोना संक्रमितों के शव के लिए एंबुलेंस तक नहीं
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गुरुग्राम (कमल शर्मा)। कोरोना संक्रमण के कारण लोग ही नहीं व्यवस्थाएं भी ध्वस्त हो गई हैं। मरीजों को इलाज के लिए बेड, ऑक्सीजन और वेंटिलेटर तो मिल ही नहीं रहे। वहीं, दूसरी ओर इस संक्रमण से मरने वालों के अस्पताल से श्मशानघाट तक ले जाने के लिए नौ घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ रहा लेकिन सरकारी एंबुलेंस नहीं मिल पा रही। आखिर में पीड़ित प्राइवेट एंबुलेंस से शव को श्मशानघाट लेकर जा रहे हैं।
अर्जुन नगर निवासी लवली के चाचा देवेंद्र कुमार की मंगलवार की सुबह साढ़े सात बजे कल्याणी अस्पताल में कोरोना से मौत हो गई थी। वह चाचा के शव को श्मशान घाट तक ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था कराने के लिए नौ घंटे तक परेशान रहे। उन्होंने इस अवधि में विधायक राकेश दौलताबाद, सीएमओ विरेंद्र यादव से मदद मांगी। सीएमओ का फोन उठा नहीं, विधायक ने अफसरों से बात करने का आश्वासन दिया। उनकी ओर से आश्वासन दिए जाने के बावजूद एंबुलेंस नहीं आई। बाद में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को फोन किया लेकिन फोन नहीं उठा। समस्या का समाधान कराने के लिए एसएमएस भी भेजा। कहीं से भी शव को अंतिम संस्कार के लिए मदनपुरी स्थित श्मशान घाट तक ले जाने की व्यवस्था नहीं हो पाई।
शव का चौथा नंबर
लवली ने बताया कि जिस व्यक्ति को सरकार ने शव को श्मशानघाट तक ले जाने का ठेका दिया है, उसने बताया कि पहले से ही 50 शव ले जाने हैं। इसके बाद एक प्राइवेट एंबुलेंस संचालक से बात की गई, उन्होंने कल्याणी अस्पताल से मदनपुरी श्मशानघाट तक शव ले जाने के लिए पांच हजार लिए। शाम चार बजे चाचा के शव को श्मशानघाट लेकर पहुंचे तो वहां अंतिम संस्कार के लिए प्लेटफार्म खाली ही नहीं थे। प्रतीक्षा लाइन में देवेंद्र कुमार के शव का चौथा नंबर था।
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लकड़ी एक हजार रुपये क्विंटल
श्मशानघाट पर अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी की व्यवस्था है लेकिन एक हजार रुपये क्विंटल की दर से मिलती है। दूसरे शहरों के परिजनों का कहना है कि शव का अंतिम संस्कार कराने वालों के 10 से 15 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं।
18500 रुपये में दे रहे हैं ऑक्सीजन का सिलिंडर
लवली ने बताया कि इलाज के लिए सिफारिश से बेड तो मिल गया। लेकिन अस्पताल में ऑक्सीजन के लिए मारामारी रही। बाहर के बाहर कुछ एजेंट 18500 रुपये में सिलिंडर देने की बात कर रहे थे। बाद में पलवल जिले से ब्लैक में ऑक्सीजन का सिलिंडर मंगवाया था। वहां भी सिलिंडर मंगवाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
आसानी से नहीं मिलती पीपी किट
पीड़ित परिजनों का कहना है कि अंतिम संस्कार के लिए पीपीई किट आसानी से नहीं मिलती है। लोगों से सिफारिश करानी पड़ रही है। वो भी निर्धारित दर से ज्यादा में उपलब्ध कराई जाती है।
सीएमओ विरेंद्र यादव ने ऑक्सीजन उपलब्धता तथा कोरोना संक्रमितों के अंतिम संस्कार के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था न होने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। उनका कहना है कि वैक्सीनेशन सहित सभी व्यवस्थाओं के लिए अलग-अलग नोडल अधिकारी नामित किए हैं। वही, इस बारे में ठीक से स्थिति स्पष्ट कर सकेंगे।
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अर्जुन नगर निवासी लवली के चाचा देवेंद्र कुमार की मंगलवार की सुबह साढ़े सात बजे कल्याणी अस्पताल में कोरोना से मौत हो गई थी। वह चाचा के शव को श्मशान घाट तक ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था कराने के लिए नौ घंटे तक परेशान रहे। उन्होंने इस अवधि में विधायक राकेश दौलताबाद, सीएमओ विरेंद्र यादव से मदद मांगी। सीएमओ का फोन उठा नहीं, विधायक ने अफसरों से बात करने का आश्वासन दिया। उनकी ओर से आश्वासन दिए जाने के बावजूद एंबुलेंस नहीं आई। बाद में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को फोन किया लेकिन फोन नहीं उठा। समस्या का समाधान कराने के लिए एसएमएस भी भेजा। कहीं से भी शव को अंतिम संस्कार के लिए मदनपुरी स्थित श्मशान घाट तक ले जाने की व्यवस्था नहीं हो पाई।
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शव का चौथा नंबर
लवली ने बताया कि जिस व्यक्ति को सरकार ने शव को श्मशानघाट तक ले जाने का ठेका दिया है, उसने बताया कि पहले से ही 50 शव ले जाने हैं। इसके बाद एक प्राइवेट एंबुलेंस संचालक से बात की गई, उन्होंने कल्याणी अस्पताल से मदनपुरी श्मशानघाट तक शव ले जाने के लिए पांच हजार लिए। शाम चार बजे चाचा के शव को श्मशानघाट लेकर पहुंचे तो वहां अंतिम संस्कार के लिए प्लेटफार्म खाली ही नहीं थे। प्रतीक्षा लाइन में देवेंद्र कुमार के शव का चौथा नंबर था।
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लकड़ी एक हजार रुपये क्विंटल
श्मशानघाट पर अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी की व्यवस्था है लेकिन एक हजार रुपये क्विंटल की दर से मिलती है। दूसरे शहरों के परिजनों का कहना है कि शव का अंतिम संस्कार कराने वालों के 10 से 15 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं।
18500 रुपये में दे रहे हैं ऑक्सीजन का सिलिंडर
लवली ने बताया कि इलाज के लिए सिफारिश से बेड तो मिल गया। लेकिन अस्पताल में ऑक्सीजन के लिए मारामारी रही। बाहर के बाहर कुछ एजेंट 18500 रुपये में सिलिंडर देने की बात कर रहे थे। बाद में पलवल जिले से ब्लैक में ऑक्सीजन का सिलिंडर मंगवाया था। वहां भी सिलिंडर मंगवाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
आसानी से नहीं मिलती पीपी किट
पीड़ित परिजनों का कहना है कि अंतिम संस्कार के लिए पीपीई किट आसानी से नहीं मिलती है। लोगों से सिफारिश करानी पड़ रही है। वो भी निर्धारित दर से ज्यादा में उपलब्ध कराई जाती है।
सीएमओ विरेंद्र यादव ने ऑक्सीजन उपलब्धता तथा कोरोना संक्रमितों के अंतिम संस्कार के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था न होने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। उनका कहना है कि वैक्सीनेशन सहित सभी व्यवस्थाओं के लिए अलग-अलग नोडल अधिकारी नामित किए हैं। वही, इस बारे में ठीक से स्थिति स्पष्ट कर सकेंगे।