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Gurugram News: नेहरू स्टेडियम में सीसीटीवी कैमरे और न ही सुरक्षा गार्ड
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रोज 400 से ज्यादा खिलाड़ी अभ्यास करने पहुंचते हैं स्टेडियम
शिवम राजपूत
गुरुग्राम। नेहरू स्टेडियम की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दी गई है। रोहतक में 16 साल के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हार्दिक राठी की मौत ने पूरे प्रदेश में खेल सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है लेकिन गुरुग्राम का खेल विभाग अब भी सबक लेने को तैयार नहीं दिख रहा। हालात ऐसे हैं कि नेहरू स्टेडियम में रोजाना 400 से ज्यादा बच्चे अभ्यास करने पहुंचते हैं मगर उनकी सुरक्षा के लिए स्टेडियम में न तो कोई सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और न ही सिक्योरिटी गार्ड तैनात है। स्टेडियम में दो गेट हैं जहां से प्रवेश पूरी तरह खुला है जो चाहे अंदर आ सकता है और बाहर जा सकता है। पूछताछ करने के लिए गेट पर कोई भी नहीं है। खिलाड़ी और अभिभावक लगातार सवाल उठा रहे हैं कि जहां बच्चे खेलते हैं, वहां ऐसी लापरवाही क्यों बरती जा रही है।
सबसे चिंताजनक बात यह कि इसी स्टेडियम परिसर में वॉलीबॉल खिलाड़ियों का हॉस्टल और मैस भी है। यह सभी खिलाड़ी अलग-अलग जिलों से यहां खेल नर्सरी में आए हैं। खिलाड़ी यहां 24 घंटे रहते हैं लेकिन हॉस्टल के बाहर भी न कोई कैमरा है और न ही कोई गार्ड। इसका सीधा मतलब यह कि किसी भी अनजान व्यक्ति का अंदर पहुंचना बेहद आसान है।
कुछ अभिभावकों का कहना है कि हम बच्चों को खेल सीखने भेजते हैं, उन्हें खतरे में डालने नहीं। यह स्थिति इसलिए और गंभीर हो जाती है क्योंकि रोहतक का हादसा अभी लोगों के जेहन में ताजा है। वहां खराब इंफ्रास्ट्रक्चर ने एक खिलाड़ी की जान ले ली और गुरुग्राम में भी लगातार ऐसी लापरवाही जारी है। सवाल उठता है कि क्या खेल विभाग को किसी नए हादसे का इंतजार है। स्टेडियम नगरपालिका और खेल विभाग दोनों की जिम्मेदारी है, लेकिन दोनों तरफ से कोई ठोस कदम नहीं दिख रहा। आखिर कैमरे लगाने में इतनी देर क्यों, गार्ड तैनात करने में दिक्कत क्या है और हॉस्टल में सुरक्षा व्यवस्था शून्य क्यों है।
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जिला खेल अधिकारी से इस पर बात की गई तो उन्होंने कहा कि विभाग सुरक्षा को लेकर गंभीर है और जल्द ही सुधार किए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि सीसीटीवी कैमरे और सिक्योरिटी गार्ड की आवश्यकता को लेकर प्रस्ताव भेजा गया है तथा खिलाड़ियों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है। स्टेडियम में जल्द ही यह सारी चीजें लगाई जाएंगी।
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शिवम राजपूत
गुरुग्राम। नेहरू स्टेडियम की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दी गई है। रोहतक में 16 साल के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हार्दिक राठी की मौत ने पूरे प्रदेश में खेल सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है लेकिन गुरुग्राम का खेल विभाग अब भी सबक लेने को तैयार नहीं दिख रहा। हालात ऐसे हैं कि नेहरू स्टेडियम में रोजाना 400 से ज्यादा बच्चे अभ्यास करने पहुंचते हैं मगर उनकी सुरक्षा के लिए स्टेडियम में न तो कोई सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और न ही सिक्योरिटी गार्ड तैनात है। स्टेडियम में दो गेट हैं जहां से प्रवेश पूरी तरह खुला है जो चाहे अंदर आ सकता है और बाहर जा सकता है। पूछताछ करने के लिए गेट पर कोई भी नहीं है। खिलाड़ी और अभिभावक लगातार सवाल उठा रहे हैं कि जहां बच्चे खेलते हैं, वहां ऐसी लापरवाही क्यों बरती जा रही है।
सबसे चिंताजनक बात यह कि इसी स्टेडियम परिसर में वॉलीबॉल खिलाड़ियों का हॉस्टल और मैस भी है। यह सभी खिलाड़ी अलग-अलग जिलों से यहां खेल नर्सरी में आए हैं। खिलाड़ी यहां 24 घंटे रहते हैं लेकिन हॉस्टल के बाहर भी न कोई कैमरा है और न ही कोई गार्ड। इसका सीधा मतलब यह कि किसी भी अनजान व्यक्ति का अंदर पहुंचना बेहद आसान है।
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कुछ अभिभावकों का कहना है कि हम बच्चों को खेल सीखने भेजते हैं, उन्हें खतरे में डालने नहीं। यह स्थिति इसलिए और गंभीर हो जाती है क्योंकि रोहतक का हादसा अभी लोगों के जेहन में ताजा है। वहां खराब इंफ्रास्ट्रक्चर ने एक खिलाड़ी की जान ले ली और गुरुग्राम में भी लगातार ऐसी लापरवाही जारी है। सवाल उठता है कि क्या खेल विभाग को किसी नए हादसे का इंतजार है। स्टेडियम नगरपालिका और खेल विभाग दोनों की जिम्मेदारी है, लेकिन दोनों तरफ से कोई ठोस कदम नहीं दिख रहा। आखिर कैमरे लगाने में इतनी देर क्यों, गार्ड तैनात करने में दिक्कत क्या है और हॉस्टल में सुरक्षा व्यवस्था शून्य क्यों है।
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जिला खेल अधिकारी से इस पर बात की गई तो उन्होंने कहा कि विभाग सुरक्षा को लेकर गंभीर है और जल्द ही सुधार किए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि सीसीटीवी कैमरे और सिक्योरिटी गार्ड की आवश्यकता को लेकर प्रस्ताव भेजा गया है तथा खिलाड़ियों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है। स्टेडियम में जल्द ही यह सारी चीजें लगाई जाएंगी।