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Gurugram News: एनसीआर बना गैस चैंबर, धूम्रपान से भी ज्यादा घातक हवा
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शाम पांच बजे स्मॉग की चादर में लिपटी साइबर सिटी का नजारा। स्रोत अमर उजाला।
सांसों पर संकट: 24 घंटे में जैसे बीस सिगरेट पी रहे साइबर सिटी के लोग
स्वास्थ्य के लिए हानिकारक एनसीआर का वातावरण, विशेषज्ञ बोले, गैस चैंबर जैसी स्थिति
मूर्ति दलाल
गुरुग्राम। एनसीआर की हवा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो गई है। यहां हवाओं में घुला स्मॉग (धुंध और धूल) के कारण एनसीआर गैस चैंबर बन गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि 400 से अधिक वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में बगैर मास्क सांस लेना 24 घंटों में 20 सिगरेट पीने जितना हानिकारक है। इस हवा में घुले प्रदूषक रसायन अस्थमा, संक्रमण, सांसों में खिंचाव और फेफड़ों की सूजन जैसे दुष्प्रभाव का कारण है। बीते करीब दस दिन से जारी इस स्थिति में कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग इमरजेंसी के बाद आईसीयू में भर्ती करने पड़ रहे हैं। अलग-अलग विशेषज्ञों की राय में यह स्थिति स्वास्थ्य इमरजेंसी है। लंबे समय तक यह स्थिति निश्चित ही जानलेवा साबित होगी। बुधवार को जिले में औसतन एक्यूआई 386 रहा। यह बेहद खराब श्रेणी है। इसमें क्षेत्रवार एक्यूआई भी घातक रहा।
बीते चार दिन से स्थिति और घातक हो रही है। एनसीआर में रविवार को ग्रैप यानी ग्रेडिड एक्शन रिस्पांस प्लान-4 लागू करना पड़ा था। अब एनसीआर में निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। सड़कों और पौधों पर पानी का छिड़काव जारी है। बावजूद इसके चार दिनों में हालात काबू में नहीं आए। इस स्थिति के कारण पांचवीं तक के बच्चों की स्कूल की छुट्टियां करनी पड़ी। मंगलवार को गुरुग्राम के साथ ही पड़ोसी जिले फरीदाबाद में बीएस तीन (पेट्रोल) और बीएस चार (डीजल) श्रेणी के वाहनों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई। जिला उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने बताया कि राज्य के परिवहन आयुक्त ने दोनों श्रेणी के चार पहिया लाइट मोटर व्हीकल के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है।
इन दिनों 400 से अधिक एक्यूआई में सांस ले रहे एनसीआर वासियों के लिए यह हवा धूम्रपान करने से भी ज्यादा घातक है। इस हवा में सांस लेने से घातक प्रदूषक फेफड़ों में पहुंचते हैं। इससे शरीर के ऑक्सीजन प्रवाह में रुकावट आती है। इस कारण शरीर को कम ऑक्सीजन मिल रहा है। इससे मांसपेशियों में दर्द, तनाव, एलर्जी, श्वास नली में सूजन, श्वास में दिक्कत जैसी समस्याएं हो रही हैं। ऐसे मरीजों की संख्या अब अस्पताल में तेजी से बढ़ी है। यह वायु प्रदूषण के सीधे प्रभाव हैं। दूरगामी प्रभाव में लोगों को दिल, दिमाग, मांसपेशियों सहित मल्टीपल ऑर्गेन की दिक्कतें भी हो सकती हैं।
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- एके पांडेय, डिप्टी डीन, ईएसआई मेडिकल कॉलेज
एनसीआर के ज्यादातर घरों में बच्चों के लिए मिलेगा नैब्युलाइजर
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में खुलासा हो चुका है कि 400-500 एक्यूआई सामान्य व्यक्ति के लिए 24 घंटों में 20 से 30 सिगरेट पीने जितना घातक है। मौजूदा समय में एनसीआर ऐसा ही गैस चैंबर बना हुआ है। बीते दो से तीन वर्षों में सर्दियों के मौसम में यही स्थिति देखने को मिल रही है। इसी कारण बीते कुछ वर्षों से ज्यादातर बच्चों की छाती सर्दी आते ही जाम हो रही है। हर बच्चे को नैब्युलाइजर की जरूरत पड़ रही है। यह स्थिति फेफड़ों पर पड़ने वाले दबाव के कारण है। बच्चों को भाप देकर नैब्युलाइज करने की बार-बार नौबत आ रही है। पहले दुर्लभ घरों में मिलने वाला नैब्युलाइजर ज्यादातर अभिभावकों की अब जरूरत हो गया है। प्रदूषण के 2.5 एमएम के कण फेफड़ों के रास्ते दिल और शरीर के हर अंग तक पहुंच रहे हैं।
-पीयूष गोयल, मणिपाल अस्पताल पल्मोनोलॉजी विभाग विशेषज्ञ
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डॉक्टर भी खांसते हुए दे रहे दवा
दूषित वातावरण का हाल ऐसा है कि जहां लोग खांसते हुए अस्पताल पहुंच रहे हैं, वहीं डॉक्टर भी उन्हें खांसते हुए ही दवा दे रहे हैं। सीने में कफ बन गया है। सांसें फूल रही हैं। यह स्थिति एक दिन में 20 से 30 सिगरेट पीने वाले मरीजों की होती है। गैस चैंबर बने एनसीआर में स्वस्थ लोग भी ऐसी दिक्कतें झेल रहे हैं। कई मरीज डिप्रेशन महसूस करने लगे हैं। ऐसे मरीज कई गुना बढ़े हैं। माहौल दम घोंटने वाली हवाओं के कारण हुआ है। यह प्रदूषण के सीधे प्रभाव हैं, लंबे समय तक इस हवा में सांस लेने वाले लोगों को जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं।
- डॉ. कुलदीप ग्रोवर, सीके बिरला अस्पताल के क्रिटिकल केयर प्लमोनोलॉजिस्ट
विभिन्न इलाकों में ऐसी रही एक्यूआई की स्थिति
ग्वाल पहाड़ी क्षेत्र - एक्यूआई 383
सेक्टर 51 क्षेत्र - एक्यूआई 379
टेरी ग्राम क्षेत्र - एक्यूआई 408
- विकास सदन क्षेत्र - एक्यूआई 370
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स्वास्थ्य के लिए हानिकारक एनसीआर का वातावरण, विशेषज्ञ बोले, गैस चैंबर जैसी स्थिति
मूर्ति दलाल
गुरुग्राम। एनसीआर की हवा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो गई है। यहां हवाओं में घुला स्मॉग (धुंध और धूल) के कारण एनसीआर गैस चैंबर बन गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि 400 से अधिक वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में बगैर मास्क सांस लेना 24 घंटों में 20 सिगरेट पीने जितना हानिकारक है। इस हवा में घुले प्रदूषक रसायन अस्थमा, संक्रमण, सांसों में खिंचाव और फेफड़ों की सूजन जैसे दुष्प्रभाव का कारण है। बीते करीब दस दिन से जारी इस स्थिति में कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग इमरजेंसी के बाद आईसीयू में भर्ती करने पड़ रहे हैं। अलग-अलग विशेषज्ञों की राय में यह स्थिति स्वास्थ्य इमरजेंसी है। लंबे समय तक यह स्थिति निश्चित ही जानलेवा साबित होगी। बुधवार को जिले में औसतन एक्यूआई 386 रहा। यह बेहद खराब श्रेणी है। इसमें क्षेत्रवार एक्यूआई भी घातक रहा।
बीते चार दिन से स्थिति और घातक हो रही है। एनसीआर में रविवार को ग्रैप यानी ग्रेडिड एक्शन रिस्पांस प्लान-4 लागू करना पड़ा था। अब एनसीआर में निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। सड़कों और पौधों पर पानी का छिड़काव जारी है। बावजूद इसके चार दिनों में हालात काबू में नहीं आए। इस स्थिति के कारण पांचवीं तक के बच्चों की स्कूल की छुट्टियां करनी पड़ी। मंगलवार को गुरुग्राम के साथ ही पड़ोसी जिले फरीदाबाद में बीएस तीन (पेट्रोल) और बीएस चार (डीजल) श्रेणी के वाहनों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई। जिला उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने बताया कि राज्य के परिवहन आयुक्त ने दोनों श्रेणी के चार पहिया लाइट मोटर व्हीकल के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है।
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इन दिनों 400 से अधिक एक्यूआई में सांस ले रहे एनसीआर वासियों के लिए यह हवा धूम्रपान करने से भी ज्यादा घातक है। इस हवा में सांस लेने से घातक प्रदूषक फेफड़ों में पहुंचते हैं। इससे शरीर के ऑक्सीजन प्रवाह में रुकावट आती है। इस कारण शरीर को कम ऑक्सीजन मिल रहा है। इससे मांसपेशियों में दर्द, तनाव, एलर्जी, श्वास नली में सूजन, श्वास में दिक्कत जैसी समस्याएं हो रही हैं। ऐसे मरीजों की संख्या अब अस्पताल में तेजी से बढ़ी है। यह वायु प्रदूषण के सीधे प्रभाव हैं। दूरगामी प्रभाव में लोगों को दिल, दिमाग, मांसपेशियों सहित मल्टीपल ऑर्गेन की दिक्कतें भी हो सकती हैं।
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- एके पांडेय, डिप्टी डीन, ईएसआई मेडिकल कॉलेज
एनसीआर के ज्यादातर घरों में बच्चों के लिए मिलेगा नैब्युलाइजर
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में खुलासा हो चुका है कि 400-500 एक्यूआई सामान्य व्यक्ति के लिए 24 घंटों में 20 से 30 सिगरेट पीने जितना घातक है। मौजूदा समय में एनसीआर ऐसा ही गैस चैंबर बना हुआ है। बीते दो से तीन वर्षों में सर्दियों के मौसम में यही स्थिति देखने को मिल रही है। इसी कारण बीते कुछ वर्षों से ज्यादातर बच्चों की छाती सर्दी आते ही जाम हो रही है। हर बच्चे को नैब्युलाइजर की जरूरत पड़ रही है। यह स्थिति फेफड़ों पर पड़ने वाले दबाव के कारण है। बच्चों को भाप देकर नैब्युलाइज करने की बार-बार नौबत आ रही है। पहले दुर्लभ घरों में मिलने वाला नैब्युलाइजर ज्यादातर अभिभावकों की अब जरूरत हो गया है। प्रदूषण के 2.5 एमएम के कण फेफड़ों के रास्ते दिल और शरीर के हर अंग तक पहुंच रहे हैं।
-पीयूष गोयल, मणिपाल अस्पताल पल्मोनोलॉजी विभाग विशेषज्ञ
डॉक्टर भी खांसते हुए दे रहे दवा
दूषित वातावरण का हाल ऐसा है कि जहां लोग खांसते हुए अस्पताल पहुंच रहे हैं, वहीं डॉक्टर भी उन्हें खांसते हुए ही दवा दे रहे हैं। सीने में कफ बन गया है। सांसें फूल रही हैं। यह स्थिति एक दिन में 20 से 30 सिगरेट पीने वाले मरीजों की होती है। गैस चैंबर बने एनसीआर में स्वस्थ लोग भी ऐसी दिक्कतें झेल रहे हैं। कई मरीज डिप्रेशन महसूस करने लगे हैं। ऐसे मरीज कई गुना बढ़े हैं। माहौल दम घोंटने वाली हवाओं के कारण हुआ है। यह प्रदूषण के सीधे प्रभाव हैं, लंबे समय तक इस हवा में सांस लेने वाले लोगों को जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं।
- डॉ. कुलदीप ग्रोवर, सीके बिरला अस्पताल के क्रिटिकल केयर प्लमोनोलॉजिस्ट
विभिन्न इलाकों में ऐसी रही एक्यूआई की स्थिति
ग्वाल पहाड़ी क्षेत्र - एक्यूआई 383
सेक्टर 51 क्षेत्र - एक्यूआई 379
टेरी ग्राम क्षेत्र - एक्यूआई 408
- विकास सदन क्षेत्र - एक्यूआई 370