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Gurugram News: अवैध निर्माण पर अदालत ने दिए निगम कर्मियों पर कार्रवाई के आदेश
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कहा- पता होने के बावजूद नहीं रोका जा सका निर्माण, अशोक विहार में महिला ने भवन का अवैध निर्माण कर बेच दिया था
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। अशोक विहार में अवैध निर्माण कर फ्लैट बेचने के मामले में अदालत ने चिंता जाहिर की है। अदालत ने माना कि निगम को 2021 में ही अवैध निर्माण के बारे में पता चल गया था, इसके बावजूद उसको रोका नहीं जा सका। अदालत ने निगम आयुक्त पर अधिकारियों पर कार्रवाई करने का आदेश दिया है। यह आदेश सिविल जज जूनियर डिवीजन शिवानी राणा की अदालत ने दिया है। यह आदेश अदालत ने अवैध निर्माण में मिले बिजली कनेक्शन को काटने पर बहाल करने की मांग के दौरान दिए गए। एक अन्य मामले में भी अदालत अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश दे चुकी है।
गौरव खंडेलवाल और सोनिका शर्मा ने अदालत में दायर की याचिका में बताया कि उन्होंने अशोक विहार फेज-1 में जून 2025 में एक फ्लैट सुशीला से खरीदा था। उनका कहना है कि वह नियमित रूप से बिजली बिल और नगर निगम टैक्स का भुगतान कर रहे थे। नगर निगम की वेबसाइट पर उनकी प्रॉपर्टी वैध दिखा रहा है। जून 2026 में बिजली विभाग ने नगर निगम की सिफारिश पर उनके फ्लैट का बिजली कनेक्शन काट दिया। निगम की तरफ से दलील दी गई कि भवन बनाने के लिए अनुमति नहीं ली गई थी। निगम ने भवन को सील भी किया था। अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि केवल प्रॉपर्टी टैक्स भरने या पोर्टल पर स्टेटस वैध दिखने से कोई अवैध निर्माण कानूनी नहीं हो जाता। टैक्स केवल मौजूदा क्षेत्र और स्थिति के आधार पर लिया जाने वाला एक वित्तीय शुल्क है।
निगम आयुक्त को दिए कार्रवाई करने के आदेश
अदालत ने अपने आदेश में विभाग को पता ही नहीं था कि कोई गैर- कानूनी निर्माण किया गया है। नगर निगम विभाग ने 2021 से ही इस गैर-कानूनी निर्माण के बारे में पता था। निगम 2021 में ही इसे गिराने का आदेश जारी कर दिया गया था, लेकिन फिर भी विभाग ने इसे नहीं गिराया जबकि भवन पर लगाई गई सील तोड़ दी थी। आगे भी निर्माण जारी रखा था। सुशीला उन फ्लैटों को बेचने में भी सफल रही। अदालत ने कहा कि नगर निगम सब-रजिस्ट्रार को कोई भी सेल डीड रजिस्टर न करने के लिए सूचित करता, या खुद जरूरी कार्रवाई करता जो गिराने का आदेश पारित होने के बावजूद नहीं की गई। अदालत ने निगम आयुक्त को आदेश दिया है कि जिन अधिकारियों ने नगर निगम एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन किया उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। अशोक विहार में अवैध निर्माण कर फ्लैट बेचने के मामले में अदालत ने चिंता जाहिर की है। अदालत ने माना कि निगम को 2021 में ही अवैध निर्माण के बारे में पता चल गया था, इसके बावजूद उसको रोका नहीं जा सका। अदालत ने निगम आयुक्त पर अधिकारियों पर कार्रवाई करने का आदेश दिया है। यह आदेश सिविल जज जूनियर डिवीजन शिवानी राणा की अदालत ने दिया है। यह आदेश अदालत ने अवैध निर्माण में मिले बिजली कनेक्शन को काटने पर बहाल करने की मांग के दौरान दिए गए। एक अन्य मामले में भी अदालत अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश दे चुकी है।
गौरव खंडेलवाल और सोनिका शर्मा ने अदालत में दायर की याचिका में बताया कि उन्होंने अशोक विहार फेज-1 में जून 2025 में एक फ्लैट सुशीला से खरीदा था। उनका कहना है कि वह नियमित रूप से बिजली बिल और नगर निगम टैक्स का भुगतान कर रहे थे। नगर निगम की वेबसाइट पर उनकी प्रॉपर्टी वैध दिखा रहा है। जून 2026 में बिजली विभाग ने नगर निगम की सिफारिश पर उनके फ्लैट का बिजली कनेक्शन काट दिया। निगम की तरफ से दलील दी गई कि भवन बनाने के लिए अनुमति नहीं ली गई थी। निगम ने भवन को सील भी किया था। अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि केवल प्रॉपर्टी टैक्स भरने या पोर्टल पर स्टेटस वैध दिखने से कोई अवैध निर्माण कानूनी नहीं हो जाता। टैक्स केवल मौजूदा क्षेत्र और स्थिति के आधार पर लिया जाने वाला एक वित्तीय शुल्क है।
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निगम आयुक्त को दिए कार्रवाई करने के आदेश
अदालत ने अपने आदेश में विभाग को पता ही नहीं था कि कोई गैर- कानूनी निर्माण किया गया है। नगर निगम विभाग ने 2021 से ही इस गैर-कानूनी निर्माण के बारे में पता था। निगम 2021 में ही इसे गिराने का आदेश जारी कर दिया गया था, लेकिन फिर भी विभाग ने इसे नहीं गिराया जबकि भवन पर लगाई गई सील तोड़ दी थी। आगे भी निर्माण जारी रखा था। सुशीला उन फ्लैटों को बेचने में भी सफल रही। अदालत ने कहा कि नगर निगम सब-रजिस्ट्रार को कोई भी सेल डीड रजिस्टर न करने के लिए सूचित करता, या खुद जरूरी कार्रवाई करता जो गिराने का आदेश पारित होने के बावजूद नहीं की गई। अदालत ने निगम आयुक्त को आदेश दिया है कि जिन अधिकारियों ने नगर निगम एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन किया उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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