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Gurugram News: विशेष प्रोत्साहन पैकेज से बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे माइक्रो उद्यम
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उद्यमियों ने एक शिफ्ट में चलने वाली यूनिट्स के लिए पैकेज की आवश्यकता पर दिया जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। जिले के एमएसएमई सेक्टर के उद्यमियों ने ऐसे उद्योगों जिसमें एक शिफ्ट में काम चलता है, उनके लिए सरकार से विशेष पैकेज की मांग की है। कई उद्योग अकेले व्यक्ति या दो तीन लोग मिलकर चला रहे हैं। एमएसएमई के लिए बने पैकेज में उनका ध्यान नहीं रखा गया है। गुरुग्राम में करीब 25 हजार ऐसी छोटी-छोटी इकाइयां हैं। महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे कुटीर उद्योग को देखे तो यह आकड़ा करीब एक लाख तक जाएगा।
उद्यमियों ने कहा कि एमएसएमई सेक्टर की नई वर्गीकरण व्यवस्था, जो एक अप्रैल 2025 से लागू हुई है, इसके अनुसार अब उद्योगों को प्लांट एवं मशीनरी में निवेश और वार्षिक टर्नओवर के आधार पर माइक्रो, स्मॉल और मीडियम श्रेणियों में विभाजित किया गया है। माइक्रो यूनिट्स की सीमा 2.50 करोड़ रुपये निवेश और 10 करोड़ रुपये टर्नओवर तक निर्धारित की गई है, जबकि मीडियम यूनिट्स की ऊपरी सीमा 125 करोड़ रुपये निवेश और 500 करोड़ रुपये टर्नओवर तक है।
एमएसएमई चेंबर ऑफ कॉमर्स के वाइस चेयरमैन विनोद गुप्ता ने यह जोर देते हुए कहा कि माइक्रो यूनिट्स का स्वरूप, संसाधन और चुनौतियां बड़ी यूनिट्स से भिन्न होती हैं। अतः उन्हें विशिष्ट दृष्टिकोण और समर्थन की आवश्यकता है। हाल ही में प्रकाशित पीआईबी रिपोर्ट के अनुसार, एमएसएमई क्षेत्र का ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) दर्शाया गया है कि यह लगभग 30.1 प्रतिशत तक भारत की जीडीपी में योगदान देता है।
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-- -- -- -- -- -उद्यमियों की मांग
-एक शिफ्ट में चलने वाली यूनिट्स को ब्याज दरों में रियायत दी जाए। चूंकि ये इकाइयां बहुत सीमित संसाधनों में काम करती हैं, उन्हें ऋण पर सस्ता एवं आसान एक्सेस मिलना चाहिए।
-बिजली फिक्स्ड चार्ज में शिफ्ट/खपत आधारित बदलाव किया जाए। माइक्रो इकाइयां बिजली का कम उपभोग करती हैं, अतः उन्हें समान मासिक फिक्स चार्ज देना अन्यायपूर्ण है।
-माइक्रो उद्योगों के उद्योगपतियों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा आदि सामाजिक सुरक्षा की सुविधा होनी चाहिए।
-रेंट/लीज आधारित औद्योगिक शेड्स हों, ताकि छोटे उद्यम अपनी पूंजी जमीन/भवन में नहीं फंसाएं, बल्कि उत्पादन और मशीनरी निवेश पर जोर दें।
-सरल ऑडिट और निरीक्षण की व्यवस्था हो, सिर्फ एमएसएमई सर्टिफिकेट आधारित निरीक्षण हो, विभागों के विविध ऑडिट नियमों और अनुपालन बोझ को कम किया जाए।
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अगर एमएसएमई सेक्टर 30 प्रतिशत तक जीडीपी में योगदान दे रहा है और लगभग 62 प्रतिशत रोजगार संजोए हुए है, तो यह अविश्वसनीय महत्व का भाग है। इसे विशेष प्रोत्साहन नहीं मिला तो यह अवसर हाथ से निकल जाएगा। - विनोद गुप्ता वाइस चेयरमैन एमएसएमई चैंबर ऑफ कॉमर्स
एमएसएमई सेक्टर निर्माण क्षेत्र में 35.4 प्रतिशत का योगदान देता है और निर्यात में 45.73 प्रतिशत हिस्सा रखता है। माइक्रो इकाइयों के उद्योगों को औद्योगिक इकाइयों के लिए दिए गए बिजली के फिक्स चार्ज से मुक्त रखा जाए। उन्हें दूसरी छूटें भी दी जानी चाहिए, ताकि वे अपना अस्तित्व बनाए रखें। - नवनीत गोयल
उद्योग पंजीकरण पोर्टल एवं अन्य स्रोतों के अनुसार, देश में लगभग 6.44 करोड़ एमएसएमई इकाइयां पंजीकृत हैं, जिनमें लगभग 26.77 करोड़ लोग रोजगार प्राप्त करते हैं। उद्यम पोर्टल से पंजीकृत एमएसएमई इकाइयों ने अब तक 28 करोड़ रोजगार अवसर उत्पन्न किए हैं। मगर छोटे उद्यम सहयोग के अभाव में बंद हो रहे हैं। -रविंद्र जैन
रोजगार के क्षेत्र में मैंकिसे ग्लोबल की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एमएसएमई सेक्टर कुल रोजगार का लगभग 62 प्रतिशत हिस्सा है। रोजगार उपलब्ध कराने में भी छोटी इकाइयां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, उनको ध्यान में रखते हुए नीतियों में परिवर्तन करना होगा। - विनोद वाधवा
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। जिले के एमएसएमई सेक्टर के उद्यमियों ने ऐसे उद्योगों जिसमें एक शिफ्ट में काम चलता है, उनके लिए सरकार से विशेष पैकेज की मांग की है। कई उद्योग अकेले व्यक्ति या दो तीन लोग मिलकर चला रहे हैं। एमएसएमई के लिए बने पैकेज में उनका ध्यान नहीं रखा गया है। गुरुग्राम में करीब 25 हजार ऐसी छोटी-छोटी इकाइयां हैं। महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे कुटीर उद्योग को देखे तो यह आकड़ा करीब एक लाख तक जाएगा।
उद्यमियों ने कहा कि एमएसएमई सेक्टर की नई वर्गीकरण व्यवस्था, जो एक अप्रैल 2025 से लागू हुई है, इसके अनुसार अब उद्योगों को प्लांट एवं मशीनरी में निवेश और वार्षिक टर्नओवर के आधार पर माइक्रो, स्मॉल और मीडियम श्रेणियों में विभाजित किया गया है। माइक्रो यूनिट्स की सीमा 2.50 करोड़ रुपये निवेश और 10 करोड़ रुपये टर्नओवर तक निर्धारित की गई है, जबकि मीडियम यूनिट्स की ऊपरी सीमा 125 करोड़ रुपये निवेश और 500 करोड़ रुपये टर्नओवर तक है।
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एमएसएमई चेंबर ऑफ कॉमर्स के वाइस चेयरमैन विनोद गुप्ता ने यह जोर देते हुए कहा कि माइक्रो यूनिट्स का स्वरूप, संसाधन और चुनौतियां बड़ी यूनिट्स से भिन्न होती हैं। अतः उन्हें विशिष्ट दृष्टिकोण और समर्थन की आवश्यकता है। हाल ही में प्रकाशित पीआईबी रिपोर्ट के अनुसार, एमएसएमई क्षेत्र का ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) दर्शाया गया है कि यह लगभग 30.1 प्रतिशत तक भारत की जीडीपी में योगदान देता है।
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-एक शिफ्ट में चलने वाली यूनिट्स को ब्याज दरों में रियायत दी जाए। चूंकि ये इकाइयां बहुत सीमित संसाधनों में काम करती हैं, उन्हें ऋण पर सस्ता एवं आसान एक्सेस मिलना चाहिए।
-बिजली फिक्स्ड चार्ज में शिफ्ट/खपत आधारित बदलाव किया जाए। माइक्रो इकाइयां बिजली का कम उपभोग करती हैं, अतः उन्हें समान मासिक फिक्स चार्ज देना अन्यायपूर्ण है।
-माइक्रो उद्योगों के उद्योगपतियों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा आदि सामाजिक सुरक्षा की सुविधा होनी चाहिए।
-रेंट/लीज आधारित औद्योगिक शेड्स हों, ताकि छोटे उद्यम अपनी पूंजी जमीन/भवन में नहीं फंसाएं, बल्कि उत्पादन और मशीनरी निवेश पर जोर दें।
-सरल ऑडिट और निरीक्षण की व्यवस्था हो, सिर्फ एमएसएमई सर्टिफिकेट आधारित निरीक्षण हो, विभागों के विविध ऑडिट नियमों और अनुपालन बोझ को कम किया जाए।
अगर एमएसएमई सेक्टर 30 प्रतिशत तक जीडीपी में योगदान दे रहा है और लगभग 62 प्रतिशत रोजगार संजोए हुए है, तो यह अविश्वसनीय महत्व का भाग है। इसे विशेष प्रोत्साहन नहीं मिला तो यह अवसर हाथ से निकल जाएगा। - विनोद गुप्ता वाइस चेयरमैन एमएसएमई चैंबर ऑफ कॉमर्स
एमएसएमई सेक्टर निर्माण क्षेत्र में 35.4 प्रतिशत का योगदान देता है और निर्यात में 45.73 प्रतिशत हिस्सा रखता है। माइक्रो इकाइयों के उद्योगों को औद्योगिक इकाइयों के लिए दिए गए बिजली के फिक्स चार्ज से मुक्त रखा जाए। उन्हें दूसरी छूटें भी दी जानी चाहिए, ताकि वे अपना अस्तित्व बनाए रखें। - नवनीत गोयल
उद्योग पंजीकरण पोर्टल एवं अन्य स्रोतों के अनुसार, देश में लगभग 6.44 करोड़ एमएसएमई इकाइयां पंजीकृत हैं, जिनमें लगभग 26.77 करोड़ लोग रोजगार प्राप्त करते हैं। उद्यम पोर्टल से पंजीकृत एमएसएमई इकाइयों ने अब तक 28 करोड़ रोजगार अवसर उत्पन्न किए हैं। मगर छोटे उद्यम सहयोग के अभाव में बंद हो रहे हैं। -रविंद्र जैन
रोजगार के क्षेत्र में मैंकिसे ग्लोबल की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एमएसएमई सेक्टर कुल रोजगार का लगभग 62 प्रतिशत हिस्सा है। रोजगार उपलब्ध कराने में भी छोटी इकाइयां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, उनको ध्यान में रखते हुए नीतियों में परिवर्तन करना होगा। - विनोद वाधवा