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मार्च निकाल उठाई कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग
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गुरुग्राम। कृषि कानूनों के खिलाफ एवं आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में जिले में गतिविधि शुरू हो गई है। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले अनेक संगठनों के पदाधिकारियों ने सोमवार को शहर में मार्च किया। इसे बाद लघु सचिवालय पहुंचकर उपायुक्त को अपनी मांग के संबंध में ज्ञापन दिया। इस दौरान धरना-प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसानों, मजदूरों, विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनैतिक दलों आदि के पदाधिकारियों ने जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष संतोख सिंह की नेतृत्व में मार्च किया। सभी लोग मोर चौक पर एकत्रित हुए और वहां कुछ देर तक धरना दिया। इसके बाद वे गुरुद्वारा रोड, कोर्ट रोड से होते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। यहां पर उन्होंने उपायुक्त अमित खत्री को कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी की गारंटी कानून बनाने की मांग के संबंध में ज्ञापन दिया। उन्होंने कहा कि नए कृषि कानून पूरी तरह किसान विरोधी है। इनको रद्द करके एमएसपी की गारंटी का कानून बनाया जाए। इन कानून के माध्यम से सरकार खेत खलिहानों को बड़े पूंजीपतियों के हाथ गिरवी रखने का षडयंत्र कर रही है। किसान अपने ही खेत में मजदूर बन कर रह जाएंगे। नए कृषि कानूनों से जमाखोरी, मुनाफाखोरी व कालाबाजारी बढ़ेगी। सरकार ने मनुष्य के जीवन के लिए आटा, दाल, अनाज और सब्जियों को आवश्यक वस्तुएं घोषित करके कानून बनाया था, सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में बदलाव करके अनाज, दलहन, खाद्य तेल, सब्जी आदि को अनिवार्य वस्तुओं की सूची से हटा दिया है। इस मौके पर राव कमलबीर सिंह, पार्षद आरएस राठी, गजेसिंह कबलाना, बीरू सरपंच, सतबीर संधू, सुधीर चौैधरी, डॉ. समशुद्दीन, कल्याण सिंह, नवनीत रौज, कामरेड सतबीर सिंह, मनोज शौरान, सुनील कटारिया आदि मौजूद रहे।
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संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसानों, मजदूरों, विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनैतिक दलों आदि के पदाधिकारियों ने जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष संतोख सिंह की नेतृत्व में मार्च किया। सभी लोग मोर चौक पर एकत्रित हुए और वहां कुछ देर तक धरना दिया। इसके बाद वे गुरुद्वारा रोड, कोर्ट रोड से होते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। यहां पर उन्होंने उपायुक्त अमित खत्री को कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी की गारंटी कानून बनाने की मांग के संबंध में ज्ञापन दिया। उन्होंने कहा कि नए कृषि कानून पूरी तरह किसान विरोधी है। इनको रद्द करके एमएसपी की गारंटी का कानून बनाया जाए। इन कानून के माध्यम से सरकार खेत खलिहानों को बड़े पूंजीपतियों के हाथ गिरवी रखने का षडयंत्र कर रही है। किसान अपने ही खेत में मजदूर बन कर रह जाएंगे। नए कृषि कानूनों से जमाखोरी, मुनाफाखोरी व कालाबाजारी बढ़ेगी। सरकार ने मनुष्य के जीवन के लिए आटा, दाल, अनाज और सब्जियों को आवश्यक वस्तुएं घोषित करके कानून बनाया था, सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में बदलाव करके अनाज, दलहन, खाद्य तेल, सब्जी आदि को अनिवार्य वस्तुओं की सूची से हटा दिया है। इस मौके पर राव कमलबीर सिंह, पार्षद आरएस राठी, गजेसिंह कबलाना, बीरू सरपंच, सतबीर संधू, सुधीर चौैधरी, डॉ. समशुद्दीन, कल्याण सिंह, नवनीत रौज, कामरेड सतबीर सिंह, मनोज शौरान, सुनील कटारिया आदि मौजूद रहे।
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