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Gurugram News: बागवानी के कूड़े से बनेगी खाद
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- दो अलग-अलग प्लांट लगाने की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। नगर निगम ने शहर की सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पार्कों और ग्रीन बेल्ट से निकलने वाले बागवानी कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने की योजना तैयार की है। निगम की ओर से 50 लाख रुपये की लागत से अलग-अलग दो प्लांट लगाए जा रहे हैं। जिससे निगम को प्रति टन तीन हजार का राजस्व मिलेगा। यह योजना देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के सफल मॉडल पर आधारित है।
बता दें कि शहर में प्रतिदिन करीब सौ टन बागवानी कूड़ा निकलता है। इसको निस्तारण के लिए अभी तक निगम के पास कोई संसाधन और योजना नहीं है। गुरुग्राम निगम ने पहले 100 टीपीडी (टन प्रतिदिन) का बड़ा प्लांट लगाने की योजना बनाई थी, लेकिन अब उसे बदलकर 25 से 50 टीपीडी क्षमता का प्लांट लगाने का निर्णय लिया है। यह प्लांट एक निजी एजेंसी लगाएगी, जो प्लांट का संचालन करेगी और निगम को प्रति टन कूड़े के निस्तारण पर तीन हजार का भुगतान करेगी। यह प्लांट शहर के 1,458 पार्कों और ग्रीन बेल्ट से निकलने वाले बागवानी कूड़े को संसाधित करेगा। इससे ईंधन के लिए ब्लॉक बनाएगा, जिनका उपयोग औद्योगिक भट्ठियों और सीमेंट फैक्टरियों में किया जा सकता है। अगर यह प्लांट सफल हो जाता है तो निगम की तरफ से 50 टन प्रतिदिन वाला दूसरा प्लांट भी नए गुरुग्राम के लिए लगाया जा सकता है।
इंदौर ने आदर्श मॉडल स्थापित किया
इंदौर ने पूरे देश के लिए कचरा प्रबंधन का एक आदर्श मॉडल स्थापित किया है। जहां कचरे को उसके स्रोत पर ही अलग-अलग श्रेणियों में छांटा जाता है, जिससे उसका निपटान आसान हो जाता है। इंदौर में बागवानी कूड़े को भी अलग से इकट्ठा किया जाता है। इंदौर के नेहरू पार्क जैसे स्थानों पर बागवानी कचरे से जैविक खाद बनाई जाती है, जिसका उपयोग पार्कों और बगीचों में किया जाता है। इससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है। इंदौर में निजी एजेंसियों के सहयोग से बागवानी कचरे से ब्रिकेट और छरें बनाए जाते हैं, जिनका उपयोग कोयले और लकड़ी के विकल्प के रूप में औद्योगिक बॉयलरों में होता है।
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वर्जन
बागवानी के कचरे खाद्य बनाने वाले प्रोजेक्ट पर नगर-निगम अलग-अलग दो प्लांट लगाएगा। जिससे सफाई के साथ निगम को आय भी होगी। - प्रदीप दहिया, आयुक्त, नगर निगम, गुरुग्राम।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। नगर निगम ने शहर की सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पार्कों और ग्रीन बेल्ट से निकलने वाले बागवानी कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने की योजना तैयार की है। निगम की ओर से 50 लाख रुपये की लागत से अलग-अलग दो प्लांट लगाए जा रहे हैं। जिससे निगम को प्रति टन तीन हजार का राजस्व मिलेगा। यह योजना देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के सफल मॉडल पर आधारित है।
बता दें कि शहर में प्रतिदिन करीब सौ टन बागवानी कूड़ा निकलता है। इसको निस्तारण के लिए अभी तक निगम के पास कोई संसाधन और योजना नहीं है। गुरुग्राम निगम ने पहले 100 टीपीडी (टन प्रतिदिन) का बड़ा प्लांट लगाने की योजना बनाई थी, लेकिन अब उसे बदलकर 25 से 50 टीपीडी क्षमता का प्लांट लगाने का निर्णय लिया है। यह प्लांट एक निजी एजेंसी लगाएगी, जो प्लांट का संचालन करेगी और निगम को प्रति टन कूड़े के निस्तारण पर तीन हजार का भुगतान करेगी। यह प्लांट शहर के 1,458 पार्कों और ग्रीन बेल्ट से निकलने वाले बागवानी कूड़े को संसाधित करेगा। इससे ईंधन के लिए ब्लॉक बनाएगा, जिनका उपयोग औद्योगिक भट्ठियों और सीमेंट फैक्टरियों में किया जा सकता है। अगर यह प्लांट सफल हो जाता है तो निगम की तरफ से 50 टन प्रतिदिन वाला दूसरा प्लांट भी नए गुरुग्राम के लिए लगाया जा सकता है।
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इंदौर ने आदर्श मॉडल स्थापित किया
इंदौर ने पूरे देश के लिए कचरा प्रबंधन का एक आदर्श मॉडल स्थापित किया है। जहां कचरे को उसके स्रोत पर ही अलग-अलग श्रेणियों में छांटा जाता है, जिससे उसका निपटान आसान हो जाता है। इंदौर में बागवानी कूड़े को भी अलग से इकट्ठा किया जाता है। इंदौर के नेहरू पार्क जैसे स्थानों पर बागवानी कचरे से जैविक खाद बनाई जाती है, जिसका उपयोग पार्कों और बगीचों में किया जाता है। इससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है। इंदौर में निजी एजेंसियों के सहयोग से बागवानी कचरे से ब्रिकेट और छरें बनाए जाते हैं, जिनका उपयोग कोयले और लकड़ी के विकल्प के रूप में औद्योगिक बॉयलरों में होता है।
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बागवानी के कचरे खाद्य बनाने वाले प्रोजेक्ट पर नगर-निगम अलग-अलग दो प्लांट लगाएगा। जिससे सफाई के साथ निगम को आय भी होगी। - प्रदीप दहिया, आयुक्त, नगर निगम, गुरुग्राम।