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Gurugram News: एसटीपी के शोधित पानी से हरी भरी होगी केएमपी की ग्रीन बेल्ट
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जीएमडीए मानेसर से केएमपी तक डलवा रहा पांच किमी लाइन, अक्तूबर तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) मानेसर से केएमपी (कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस) तक सीवर शोधित पानी सप्लाई करने के लिए पांच किमी पाइप डालने का कार्य अक्तूबर तक पूरा कर लेगा। पानी का उपयोग केएमपी की ग्रीन बेल्ट में हरियाली बढ़ाने के लिए किया जाएगा। योजना के अनुसार 15-20 एमएलडी पानी सप्लाई होगी।
केएमपी की ग्रीन बेल्ट और सेंट्रल वर्ज पर पौधे लगे हुए हैं लेकिन सिंचाई के लिए बेहतर साधन नहीं है। दूसरा केएमपी पर 30 मीटर चौड़ी ग्रीन बेल्ट डिवाइडर पर बनी हुई है। इस ग्रीन बेल्ट में पौधे लगे हुए हैं। पौधे बचाने के लिए टैंकर के जरिये सिंचाई करानी पड़ती है। योजना के अनुसार मानेसर की कंपनियों के गंदे पानी को शोधित करने के लिए 55 एमएलडी का सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट ) लगा है। दूसरा 25 एमएलडी का सीवर शोधन संयंत्र बनकर तैयार है। जल्द ही इसका शुभारंभ किया जाना है।
मानेसर से केएमपी तक करीब पांच किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाई जा रही है। पाइप लाइन बिछाने पर लगभग चार करोड़ रुपये खर्च होंगे। यहां से एक्सप्रेस-वे की ग्रीन बेल्ट की सिंचाई करने की योजना है। जीएमडीए के अनुसार चार किलोमीटर लाइन डाली जा चुकी है। शेष लाइन डालने का कार्य अक्तूबर तक पूरा कर लिया जाएगा। पानी का प्रयोग केएमपी की ग्रीन बेल्ट या अन्य जगहों पर किया जा सकता है। करीब 15-20 एमएलडी पानी की सप्लाई केएमपी पर की जानी है।
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शोधित पानी का उपयोग हरियाली बढ़ाने में होने से यमुना में छोड़ने की जरूरत नहीं होगी। सीवर के शोधित पानी का उपयोग बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार ने एक पालिसी बनाई हुई है। साल 2030 तक शोधित पानी का इस्तेमाल 80 फीसदी तक करने का लक्ष्य रखा गया है। जीएमडीए के मुख्य अभियंता राजेंद्र सिंह जांगड़ा ने बताया कि केएमपी तक सीवर शोधित पानी पहुंचाने की योजना है। उन्होंने बताया कि पानी का प्रयोग हरियाली में किया जाना है।
इंडस्ट्री, कृषि और अरावली में किया जा रहा प्रयोग
जीएमडीए के बहरामपुर संयंत्र से शोधित पानी का प्रयोग करीब 20 एमएलडी सेक्टरों में ग्रीन बेल्ट में किया जा रहा है। वहीं, 10 एमएलडी पानी कपड़ा उद्योग को दिया जा रहा है। दो एमएलडी पानी सकतपुर गांव के पास अरावली की हरियाली में प्रयोग किया जा रहा है। 1.5 एमडीएल पानी वजीराबाद झील में और दो एमएलडी पानी निर्माण कार्य में प्रयोग किया जा रहा है। तीन एमएलडी पानी भोंडसी में पुलिस लाइन में पौधे के लिए दिया जा रहा है। धनवापुर एसटीपी से करीब 80 एमएलडी पानी बादली झज्जर में सिंचाई कार्य के लिए दिया जा रहा है। इसके अलावा जीएमडीए ने पुरानी दिल्ली रोड, सनथ रोड, ताऊ देवी लाल पार्क सेक्टर- 22 और वायुसेना स्टेशन में सीवर शोधित पानी की आपूर्ति के लिए पंपिंग मशीन और मुख्य वितरण रिसाइकिल पाइप लाइन के साथ भूमिगत टैंक के निर्माण करा रहा है। इसे भी जल्द पूरा करने का लक्ष्य है।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) मानेसर से केएमपी (कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस) तक सीवर शोधित पानी सप्लाई करने के लिए पांच किमी पाइप डालने का कार्य अक्तूबर तक पूरा कर लेगा। पानी का उपयोग केएमपी की ग्रीन बेल्ट में हरियाली बढ़ाने के लिए किया जाएगा। योजना के अनुसार 15-20 एमएलडी पानी सप्लाई होगी।
केएमपी की ग्रीन बेल्ट और सेंट्रल वर्ज पर पौधे लगे हुए हैं लेकिन सिंचाई के लिए बेहतर साधन नहीं है। दूसरा केएमपी पर 30 मीटर चौड़ी ग्रीन बेल्ट डिवाइडर पर बनी हुई है। इस ग्रीन बेल्ट में पौधे लगे हुए हैं। पौधे बचाने के लिए टैंकर के जरिये सिंचाई करानी पड़ती है। योजना के अनुसार मानेसर की कंपनियों के गंदे पानी को शोधित करने के लिए 55 एमएलडी का सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट ) लगा है। दूसरा 25 एमएलडी का सीवर शोधन संयंत्र बनकर तैयार है। जल्द ही इसका शुभारंभ किया जाना है।
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मानेसर से केएमपी तक करीब पांच किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाई जा रही है। पाइप लाइन बिछाने पर लगभग चार करोड़ रुपये खर्च होंगे। यहां से एक्सप्रेस-वे की ग्रीन बेल्ट की सिंचाई करने की योजना है। जीएमडीए के अनुसार चार किलोमीटर लाइन डाली जा चुकी है। शेष लाइन डालने का कार्य अक्तूबर तक पूरा कर लिया जाएगा। पानी का प्रयोग केएमपी की ग्रीन बेल्ट या अन्य जगहों पर किया जा सकता है। करीब 15-20 एमएलडी पानी की सप्लाई केएमपी पर की जानी है।
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शोधित पानी का उपयोग हरियाली बढ़ाने में होने से यमुना में छोड़ने की जरूरत नहीं होगी। सीवर के शोधित पानी का उपयोग बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार ने एक पालिसी बनाई हुई है। साल 2030 तक शोधित पानी का इस्तेमाल 80 फीसदी तक करने का लक्ष्य रखा गया है। जीएमडीए के मुख्य अभियंता राजेंद्र सिंह जांगड़ा ने बताया कि केएमपी तक सीवर शोधित पानी पहुंचाने की योजना है। उन्होंने बताया कि पानी का प्रयोग हरियाली में किया जाना है।
इंडस्ट्री, कृषि और अरावली में किया जा रहा प्रयोग
जीएमडीए के बहरामपुर संयंत्र से शोधित पानी का प्रयोग करीब 20 एमएलडी सेक्टरों में ग्रीन बेल्ट में किया जा रहा है। वहीं, 10 एमएलडी पानी कपड़ा उद्योग को दिया जा रहा है। दो एमएलडी पानी सकतपुर गांव के पास अरावली की हरियाली में प्रयोग किया जा रहा है। 1.5 एमडीएल पानी वजीराबाद झील में और दो एमएलडी पानी निर्माण कार्य में प्रयोग किया जा रहा है। तीन एमएलडी पानी भोंडसी में पुलिस लाइन में पौधे के लिए दिया जा रहा है। धनवापुर एसटीपी से करीब 80 एमएलडी पानी बादली झज्जर में सिंचाई कार्य के लिए दिया जा रहा है। इसके अलावा जीएमडीए ने पुरानी दिल्ली रोड, सनथ रोड, ताऊ देवी लाल पार्क सेक्टर- 22 और वायुसेना स्टेशन में सीवर शोधित पानी की आपूर्ति के लिए पंपिंग मशीन और मुख्य वितरण रिसाइकिल पाइप लाइन के साथ भूमिगत टैंक के निर्माण करा रहा है। इसे भी जल्द पूरा करने का लक्ष्य है।