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पोल्ट्री फॉर्म संचालकों को बाहरी बीमारियों के प्रति जागरूक कर रही टीमें
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गुरुग्राम। प्रदेश में बर्ड फ्लू ने दस्तक दे दी है, लेकिन जिले में बर्ड फ्लू का कोई मामला अब तक सामने नहीं आया है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग व वन विभाग की टीमें सतर्क हैं और अपने स्तर पर इसकी निगरानी भी कर रही हैं। वहीं, वन्य जीव विभाग भी प क्षियों पर नजर रख रहा है। पशु चिकित्सा विभाग खास तौर पर अलर्ट मोड पर है। बर्ड फ्लू की जांच के लिए जिले से दो नमूने जालंधर लैब में भेजे गए हैं, जिनकी एक-दो दिन में रिपोर्ट आ जाएगी। इसके बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। पशु चिकित्सा विभाग के मुताबिक बर्ड फ्लू की पु ष्टि होने पर अन्य पंछियों में फैलने से रोकने के लिए एक किलोमीटर के दायरे में पक्षियों की कलिंग की जाएगी। वहीं, रैपिड रिस्पांस टीमें खास तौर पर पोल्ट्री फॉर्म संचालकों को बाहरी बीमारियों के प्रति जागरूक कर रही हैं।
वहीं, बर्ड फ्लू को देखते हुए प्रशासन की तरफ से 22 रैपिड रिस्पांस टीमें (आरआरटी) गठित कर दी गई हैं। वन्य जीव संरक्षण विभाग के मुताबिक जिस तरह से पिछले तीन-चार दिनों में विभिन्न जगहों पर कौवों की मौत हुई है। उसके बाद खास तौर पर कौवों पर विशेष नजर रखी जा रही है। पिछले 8 जनवरी को जालंधर लैब में भेजे गए दो नमूनों में से एक नमूना कौवे का ही है जबकि एक अन्य पक्षी का नमूना शामिल है।
पशुपालकों को जागरूक कर रहीं टीमें :
वहीं, निगरानी के लिए गठित की गई 22 आरआरटी टीमें पक्षियों पर नजर रखने के साथ ही पशु पालकों को जागरूक भी कर रही हैं। खास तौर पर पोल्ट्री फॉर्म संचालकों को बर्ड फ्लू के खतरों के प्रति जागरूक किया जा रहा है, जिसके तहत मुख्य रूप से बाहरी बीमारी के प्रति सतर्कता बरतने का सुझाव दिया जा रहा है। वन्य जीव संरक्षण विभाग के मुताबिक पोल्ट्री फॉर्म संचालकों को चारदीवारी को दुरुस्त करने के लिए कहा जा रहा है।
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8 जनवरी को आयोजित हो चुकी है कार्यशाला :
बर्ड फ्लू को देखते हुए प्रशासन की तरफ से पिछले 8 जनवरी को जिले में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इसमें जिले के सभी 8 पशु चिकित्सकों ने हिस्सा लिया था। कार्यशाला में तय किया गया है कि मुंहखुर व गलघोंटू टीका लगाने के दौरान भी चिकित्सक पशु पालकों को बर्ड फ्लू के प्रति जागरूक करेंगे। वहीं, किसी भी तरह के संदिग्ध लक्षण पाए जाने पर पशुओं की जांच भी की जाएगी। विभाग की तरफ से हर 6 माह में मुंहखुर व गलघोंटू का टीकाकरण किया जाता है। 22 आरआरटी टीमें लोगों को जागरूक तो कर ही रही हैं लेकिन जैसे ही बर्ड फ्लू की दिक्कत आएगी, उसके 1 किलोमीटर के दायरे में पक्षियों की कलिंग की जाएगी। हालांकि, बर्ड फ्लू के लक्षण दिखने के बाद ही विभाग इस तरह के किसी फैसले पर विचार करेगा।
इन जगहों पर विशेष नजर :
प्रदेश में बर्ड फ्लू के दस्तक देने के बाद वन विभाग की वन्य जीव शाखा सक्रिय हो गई है। अपने स्तर पर स्वास्थ्य विभाग व पशुपालन विभाग भी कार्रवाई कर रहा है लेकिन कुछ जगहों पर खास नजर रखी जा रही है। इनमें सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान, नजफगढ़ ड्रेन, दमदमा झील, बसई वेटलैंड, सेक्टर-52 स्थित देवीलाल पार्क, भोंडसी स्थित भारत यात्रा केंद्र सहित कई जगह शामिल हैं। ओतना ही नहीं वन्य छेत्र अरावली में भी विभाग नजर रख रहा है।
अभी तक जिले में बर्ड फ्लू की पुष्टि नहीं हुई है। बावजूद इसके हम सतर्क हैं और इसीलिए 8 जनवरी को एक विस्तृत कार्यशाला का भी आयोजन किया जा चुका है। 22 आरआरटी टीमें कड़ी निगरानी कर रही हैं। जालंधर में भेजे गए नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
- डॉ. पुनीता गहलावत, डिप्टी डायरेक्टर, पशुधन विकास परियोजना
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वहीं, बर्ड फ्लू को देखते हुए प्रशासन की तरफ से 22 रैपिड रिस्पांस टीमें (आरआरटी) गठित कर दी गई हैं। वन्य जीव संरक्षण विभाग के मुताबिक जिस तरह से पिछले तीन-चार दिनों में विभिन्न जगहों पर कौवों की मौत हुई है। उसके बाद खास तौर पर कौवों पर विशेष नजर रखी जा रही है। पिछले 8 जनवरी को जालंधर लैब में भेजे गए दो नमूनों में से एक नमूना कौवे का ही है जबकि एक अन्य पक्षी का नमूना शामिल है।
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पशुपालकों को जागरूक कर रहीं टीमें :
वहीं, निगरानी के लिए गठित की गई 22 आरआरटी टीमें पक्षियों पर नजर रखने के साथ ही पशु पालकों को जागरूक भी कर रही हैं। खास तौर पर पोल्ट्री फॉर्म संचालकों को बर्ड फ्लू के खतरों के प्रति जागरूक किया जा रहा है, जिसके तहत मुख्य रूप से बाहरी बीमारी के प्रति सतर्कता बरतने का सुझाव दिया जा रहा है। वन्य जीव संरक्षण विभाग के मुताबिक पोल्ट्री फॉर्म संचालकों को चारदीवारी को दुरुस्त करने के लिए कहा जा रहा है।
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8 जनवरी को आयोजित हो चुकी है कार्यशाला :
बर्ड फ्लू को देखते हुए प्रशासन की तरफ से पिछले 8 जनवरी को जिले में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इसमें जिले के सभी 8 पशु चिकित्सकों ने हिस्सा लिया था। कार्यशाला में तय किया गया है कि मुंहखुर व गलघोंटू टीका लगाने के दौरान भी चिकित्सक पशु पालकों को बर्ड फ्लू के प्रति जागरूक करेंगे। वहीं, किसी भी तरह के संदिग्ध लक्षण पाए जाने पर पशुओं की जांच भी की जाएगी। विभाग की तरफ से हर 6 माह में मुंहखुर व गलघोंटू का टीकाकरण किया जाता है। 22 आरआरटी टीमें लोगों को जागरूक तो कर ही रही हैं लेकिन जैसे ही बर्ड फ्लू की दिक्कत आएगी, उसके 1 किलोमीटर के दायरे में पक्षियों की कलिंग की जाएगी। हालांकि, बर्ड फ्लू के लक्षण दिखने के बाद ही विभाग इस तरह के किसी फैसले पर विचार करेगा।
इन जगहों पर विशेष नजर :
प्रदेश में बर्ड फ्लू के दस्तक देने के बाद वन विभाग की वन्य जीव शाखा सक्रिय हो गई है। अपने स्तर पर स्वास्थ्य विभाग व पशुपालन विभाग भी कार्रवाई कर रहा है लेकिन कुछ जगहों पर खास नजर रखी जा रही है। इनमें सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान, नजफगढ़ ड्रेन, दमदमा झील, बसई वेटलैंड, सेक्टर-52 स्थित देवीलाल पार्क, भोंडसी स्थित भारत यात्रा केंद्र सहित कई जगह शामिल हैं। ओतना ही नहीं वन्य छेत्र अरावली में भी विभाग नजर रख रहा है।
अभी तक जिले में बर्ड फ्लू की पुष्टि नहीं हुई है। बावजूद इसके हम सतर्क हैं और इसीलिए 8 जनवरी को एक विस्तृत कार्यशाला का भी आयोजन किया जा चुका है। 22 आरआरटी टीमें कड़ी निगरानी कर रही हैं। जालंधर में भेजे गए नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
- डॉ. पुनीता गहलावत, डिप्टी डायरेक्टर, पशुधन विकास परियोजना