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Gurugram News: कचरे में जाने की जगह अगरबत्ती बन सुगंध बिखेरते हैं पूजा के फूल

Tue, 28 Apr 2026 01:25 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 28 Apr 2026 01:25 AM IST
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Instead of ending up in the trash, puja flowers spread fragrance by turning into incense sticks.
फूलों से तैयार करती हैं धूप, अगरबत्ती, माता की चुनरी से दुल्हन का लहंगा
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प्रकृति की रक्षा और जरूरतमंदों की मदद में जुटीं महिलाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। शहर के कुछ संगठनों ने हाशिये के लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त करने के साथ-साथ प्रकृति का संरक्षण भी किया है। आवाकायम और आनंदा वृंदा ऐसे ही संगठन हैं जो मंदिरों में पूजा के बाद फेंके जाने वाले फूलों को मंगवाकर उससे अगरबत्ती, धूप बत्ती, होली के समय गुलाल बनवाते हैं।
इसके अलावा महिलाएं माता को चढ़ाई जाने वाली चुन्नी की मदद से लहंगे तैयार करती हैं, जिन्हें जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के विवाह में दिया जाता है। अरावली की पहाड़ियों के साथ सनसेट बोलवार्ड रोड पर आईएम गुड़गांव ने मंदिर समाधान हब बनाया है। यह उनके शहर में छह समाधान हब में से एक है। इस समाधान हब में कार्यकर्ता शहर के 15 मंदिरों से कचरे में जाने वाली पूजन सामग्री एकत्र कर उनकी छंटाई करते हैं। समाधान हब प्रोजेक्ट प्रमुख नमृता चौधरी बताती हैं कि मंदिरों से प्राप्त फूलों को सुखाकर, चुन्नियों को साफ कर कार्यकर्ता आवाकायम और आनंद वृंदा को सौंप देते हैं।
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आवाकायम की संस्थापक मधुमिता पुरी बताती हैं कि समाधान हब समेत दिल्ली एनसीआर के मंदिरों से प्राप्त फूलों को पाउडर बनाकर उसकी धूप बत्ती और अगरबत्ती बनाई जाती है। हैवी चुन्नियों की मदद से दुल्हन का लहंगा तैयार करते हैं। इस कार्य में दिव्यांग महिलाओं के अलावा दिव्यांग पुरुषों की मदद ली जाती है। इस कार्य में ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं। आवाकायम एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ गिरे हुए फूल होता है। समाज के हाशिये के लाेगों की मदद से पूजा के फूलों को कचरे में जाने से बचाकर आर्थिक संसाधन तैयार करने का कार्य संगठन 2002 से कर रहा है। आनंदा वृंदा एक आइआइटियन राघव मोहिता ने शुरू किया। राघव मंदिरों के फूलों से महिलाओं की मदद से गुलाल और धूप बत्ती बनवाते हैं। प्रकृति की सुरक्षा की दृष्टि से इसकी पैंकिंग भी बॉयोडिग्रेडबल होती है। राघव के अनुसार उनकी छोटी यूनिट है मगर एक साल में 50,000 बॉयोडेग्रेडेबल पैकिंग कराकर उन्होंने प्लास्टिक प्रकृति में जाने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं।
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वर्जन
हम लोग हर रिसाइकिल होने वाली चीजों को साफ कर उसको पुन: प्रयोग के लिए तैयार कराते हैं। उन संगठनों को दे देते हैं जो जरूरतमंद महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए काम कर रही हैं। -नमृता चौधरी, समाधान हब, आईएम गुड़गांव


दिव्यांगों की मदद से हम लोग फूलों से गुलाल, अगरबत्ती जैसे उत्पाद तैयार करवाते हैं। माता की हैवी चुन्नी से लहंगे बनाए जाते हैं, जिन्हें जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के विवाह पर दिया जाता है। -मधुमिता पुरी, संस्थापक, आवाकायम
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