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तय समय में नहीं निकला हल तो होगी राज्यस्तरीय महापंचायत : चढूनी
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गुरुग्राम। कासन, सहरावन व कुकडोला की 1810 एकड़ जमीन के अधिग्रहण का मुद्दा तूल पकड़ रहा है। किसानों के समर्थन में मंगलवार को मानेसर पहुंचे किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने यदि आठ दिन में इस मुद्दे का कोई हल नहीं निकाला तो मानेसर में किसानों की राज्यस्तरीय महापंचायत होगी। मंगलवार को गुरुग्राम आगमन पर मुख्यमंत्री ने किसानों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया। इस दौरान गुरुग्राम के लोक निर्माण विभाग में किसानों की 11 सदस्यीय समिति से हुई वार्ता में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आठ दिन का समय लेकर नई नीति के तहत किसानों को लाभ पहुंचाने का आश्वासन दिया है।
मुख्यमंत्री के गुरुग्राम आगमन को देखते हुए आंदोलनकारी किसानों की ओर से चढूनी ने सरकार और प्रशासन को दोपहर एक बजे तक वार्ता करने का अल्टीमेटम दे दिया था, इसके कुछ देर बाद ही किसानों को वार्ता के लिए बुला लिया गया। जमीन बचाओ किसान बचाओ संघर्ष समिति के कहने पर मंगलवार को धरनास्थल पर हुई पंचायत की अध्यक्षता करते हुए किसान नेता चढूनी ने कहा कि जमीन बचाने के लिए जमीर का जिंदा होना जरूरी है।
प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुराग ढांढा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुधीर चौधरी, आम आदमी पार्टी के संगठन मंत्री पंकज, प्रभाकर गौड़, प्रवीण शर्मा, माइकल सैनी, पूर्व विधायक रामबीर, श्योचंद सरपंच, गजराज सरपंच, सतदेव सरपंच कासन, रोहतास यादव, मोती लाल, चरण सिंह खड़खड़ी आदि सहित भारी संख्या में क्षेत्र के किसान और महिला शक्ति उपस्थित रही।
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लघु सचिवालय में किया प्रदर्शन
गुरुग्राम। मानेसर में संघर्षरत किसानों के एक गुट ने जिला राजस्व अधिकारी कार्यालय के बाहर धरना दिया। यहां किसानों ने जल्द से जल्द समस्या का समाधान करने को कहा। यहीं से किसान पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में सीएम से मिलने के लिए गए।
70 फीसदी किसान सहमत नहीं तो अधिग्रहण नहीं : अजय सिंह
गुरुग्राम। जमीन अधिग्रहण के खिलाफ मानेसर स्थित एचआईआईडीसी में 56 दिनों से किसानों का बेमियादी धरना प्रदर्शन जारी है। मंगलवार को कांग्रेस के ओबीसी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय चेयरमैन एवं प्रदेश के पूर्व बिजली मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव किसानों के बीच पहुंचे और उन्हें भरोसा दिलाया कि कांग्रेस हर कदम पर उनके साथ हैं। कांग्रेस ने नया भूमि अधिग्रहण कानून बनाया है, जिसके तहत जब तक 70 प्रतिशत किसान जमीन देने के लिए सहमत न हो जाएं तब तक अधिग्रहण नहीं हो सकता है इसलिए किसान एकजुट हों और अधिग्रहण से इनकार कर दें। भाजपा सरकार किसानों की जमीन सस्ते दामों पर हड़पना चाहती है। यही भाजपा किसानों पर तीन नए कृषि कानून थोप रही थी, जिसमें किसानों की जीत हुई। कैप्टन ने कहा कि किसान परेशान हैं और भाजपा के जनप्रतिनिधियों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। कांग्रेस ने ही संसद से विधानसभा तक इस मामले को उठाया है। किसान जहां कहेंगे वहां कांग्रेस मौजूद रहेगी। सरकार या तो बाजार भाव के अनुसार भुगतान करे या जमीन छोड़ दे। मानेसर के बजाय सोहना के आईएमटी में अपना प्लांट लगा लें।
सरकार दे रही 55 लाख, किसान मांग रहे 11 करोड़
मानेसर में अलग-अलग योजनाओं के लिए गांव कासन, सहरावन, कुकडौला गांव की 1810 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। सरकार इसके लिए 55 लाख रुपये किले का भाव दे रही है, जबकि किसान 11 करोड़ रुपये प्रति किले मांग रहे हैं। इसी को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है। बीती 14 अगस्त को किसानों ने दिल्ली-जयपुर हाईवे भी जाम किया था।
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मुख्यमंत्री के गुरुग्राम आगमन को देखते हुए आंदोलनकारी किसानों की ओर से चढूनी ने सरकार और प्रशासन को दोपहर एक बजे तक वार्ता करने का अल्टीमेटम दे दिया था, इसके कुछ देर बाद ही किसानों को वार्ता के लिए बुला लिया गया। जमीन बचाओ किसान बचाओ संघर्ष समिति के कहने पर मंगलवार को धरनास्थल पर हुई पंचायत की अध्यक्षता करते हुए किसान नेता चढूनी ने कहा कि जमीन बचाने के लिए जमीर का जिंदा होना जरूरी है।
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प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुराग ढांढा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुधीर चौधरी, आम आदमी पार्टी के संगठन मंत्री पंकज, प्रभाकर गौड़, प्रवीण शर्मा, माइकल सैनी, पूर्व विधायक रामबीर, श्योचंद सरपंच, गजराज सरपंच, सतदेव सरपंच कासन, रोहतास यादव, मोती लाल, चरण सिंह खड़खड़ी आदि सहित भारी संख्या में क्षेत्र के किसान और महिला शक्ति उपस्थित रही।
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लघु सचिवालय में किया प्रदर्शन
गुरुग्राम। मानेसर में संघर्षरत किसानों के एक गुट ने जिला राजस्व अधिकारी कार्यालय के बाहर धरना दिया। यहां किसानों ने जल्द से जल्द समस्या का समाधान करने को कहा। यहीं से किसान पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में सीएम से मिलने के लिए गए।
70 फीसदी किसान सहमत नहीं तो अधिग्रहण नहीं : अजय सिंह
गुरुग्राम। जमीन अधिग्रहण के खिलाफ मानेसर स्थित एचआईआईडीसी में 56 दिनों से किसानों का बेमियादी धरना प्रदर्शन जारी है। मंगलवार को कांग्रेस के ओबीसी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय चेयरमैन एवं प्रदेश के पूर्व बिजली मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव किसानों के बीच पहुंचे और उन्हें भरोसा दिलाया कि कांग्रेस हर कदम पर उनके साथ हैं। कांग्रेस ने नया भूमि अधिग्रहण कानून बनाया है, जिसके तहत जब तक 70 प्रतिशत किसान जमीन देने के लिए सहमत न हो जाएं तब तक अधिग्रहण नहीं हो सकता है इसलिए किसान एकजुट हों और अधिग्रहण से इनकार कर दें। भाजपा सरकार किसानों की जमीन सस्ते दामों पर हड़पना चाहती है। यही भाजपा किसानों पर तीन नए कृषि कानून थोप रही थी, जिसमें किसानों की जीत हुई। कैप्टन ने कहा कि किसान परेशान हैं और भाजपा के जनप्रतिनिधियों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। कांग्रेस ने ही संसद से विधानसभा तक इस मामले को उठाया है। किसान जहां कहेंगे वहां कांग्रेस मौजूद रहेगी। सरकार या तो बाजार भाव के अनुसार भुगतान करे या जमीन छोड़ दे। मानेसर के बजाय सोहना के आईएमटी में अपना प्लांट लगा लें।
सरकार दे रही 55 लाख, किसान मांग रहे 11 करोड़
मानेसर में अलग-अलग योजनाओं के लिए गांव कासन, सहरावन, कुकडौला गांव की 1810 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। सरकार इसके लिए 55 लाख रुपये किले का भाव दे रही है, जबकि किसान 11 करोड़ रुपये प्रति किले मांग रहे हैं। इसी को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है। बीती 14 अगस्त को किसानों ने दिल्ली-जयपुर हाईवे भी जाम किया था।