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Gurugram News: इंपीरिया एस्फेरा आरडब्ल्यूए को हरेरा ने दी राहत
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बिल्डर को रखरखाव व इससे जुड़े फंड आरडब्ल्यूए को हैंडओवर करने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रही सेक्टर-37सी स्थित इंपीरिया एस्फेरा सोसाइटी के आरडब्ल्यूए को हरेरा (हरियाणा भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण) कोर्ट ने राहत दी है। कोर्ट ने सोसाइटी के रखरखाव की जिम्मेदारी आरडब्ल्यूए को सौंपने के साथ-साथ सारे फंड भी आरडब्ल्यूए को हैंडओवर करने के आदेश दिए हैं। इस आदेश के पालन के लिए 90 दिन का समय दिया गया है।
कोर्ट के आदेश से एक जुलाई को सोसाइटी के आरडब्ल्यूए को तीन टावरों में रखरखाव की जिम्मेदारी मिली थी, मगर बिल्डर ने सिंकिंग फंड (रखरखाव की राशि) और आईएफएमएस (इंटरेस्ट फ्री मेंटनेंस सेक्यूरिटी) की राशि नहीं दी थी। हरेरा कोर्ट ने आदेश जारी किया है कि सिंकिंग फंड और आईएफएमएस की राशि 30 दिनों के भीतर आरडब्ल्यूए को सौंपी जाए। इस आदेश के अनुसार कॉमन एरिया मेंटनेंस चार्ज का लेखा-जोखा भी बिल्डर को देना होगा। सोसाइटी से संबंधित दस्तावेज और कॉमन एरिया हैंडओवर करने होंगे। कब्जा मिलने के पांच साल तक सोसाइटी में कमियों को ठीक करने की जिम्मेदारी भी बिल्डर पर होगी।
अबतक सोसाइटी के तीन टावरों के रखरखाव की जिम्मेदारी आरडब्ल्यूए को मिली थी मगर अब कोर्ट के आदेश के बाद से नौ टावरों की जिम्मेदारी आरडब्ल्यूए को मिलेगी। महिला नेतृत्व में चल रही इंपीरिया एस्फेरा की आरडब्ल्यूए टीम ने इस आदेश को लेकर खुशी जताई है। आरडब्ल्यूए अध्यक्ष रिंकी सिंह और महासचिव गीतिका भारद्वाज ने कहा कि हमारे लिए ये केवल एक केस की जीत नहीं बल्कि सोसाइटी में रहने वाले 600 परिवारों की जीत है। हमने कभी निजी स्वार्थ नहीं देखा बल्कि एक जुट होकर संघर्ष किया है। उन्होंने बिल्डर की अनियमितताओं को लेकर लंबी लड़ाई लड़ी है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रही सेक्टर-37सी स्थित इंपीरिया एस्फेरा सोसाइटी के आरडब्ल्यूए को हरेरा (हरियाणा भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण) कोर्ट ने राहत दी है। कोर्ट ने सोसाइटी के रखरखाव की जिम्मेदारी आरडब्ल्यूए को सौंपने के साथ-साथ सारे फंड भी आरडब्ल्यूए को हैंडओवर करने के आदेश दिए हैं। इस आदेश के पालन के लिए 90 दिन का समय दिया गया है।
कोर्ट के आदेश से एक जुलाई को सोसाइटी के आरडब्ल्यूए को तीन टावरों में रखरखाव की जिम्मेदारी मिली थी, मगर बिल्डर ने सिंकिंग फंड (रखरखाव की राशि) और आईएफएमएस (इंटरेस्ट फ्री मेंटनेंस सेक्यूरिटी) की राशि नहीं दी थी। हरेरा कोर्ट ने आदेश जारी किया है कि सिंकिंग फंड और आईएफएमएस की राशि 30 दिनों के भीतर आरडब्ल्यूए को सौंपी जाए। इस आदेश के अनुसार कॉमन एरिया मेंटनेंस चार्ज का लेखा-जोखा भी बिल्डर को देना होगा। सोसाइटी से संबंधित दस्तावेज और कॉमन एरिया हैंडओवर करने होंगे। कब्जा मिलने के पांच साल तक सोसाइटी में कमियों को ठीक करने की जिम्मेदारी भी बिल्डर पर होगी।
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अबतक सोसाइटी के तीन टावरों के रखरखाव की जिम्मेदारी आरडब्ल्यूए को मिली थी मगर अब कोर्ट के आदेश के बाद से नौ टावरों की जिम्मेदारी आरडब्ल्यूए को मिलेगी। महिला नेतृत्व में चल रही इंपीरिया एस्फेरा की आरडब्ल्यूए टीम ने इस आदेश को लेकर खुशी जताई है। आरडब्ल्यूए अध्यक्ष रिंकी सिंह और महासचिव गीतिका भारद्वाज ने कहा कि हमारे लिए ये केवल एक केस की जीत नहीं बल्कि सोसाइटी में रहने वाले 600 परिवारों की जीत है। हमने कभी निजी स्वार्थ नहीं देखा बल्कि एक जुट होकर संघर्ष किया है। उन्होंने बिल्डर की अनियमितताओं को लेकर लंबी लड़ाई लड़ी है।
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