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दूतावास की तरफ से स्थिति स्पष्ट होती तो पहले ही निकल जाते

Sat, 26 Feb 2022 11:38 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 26 Feb 2022 11:38 PM IST
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Had the situation been clear from the embassy side, they would have left earlier.
गुरुग्राम। रूस की सेना यूक्रेन पर पूरी तरह कब्जा करने के उद्देश्य से राजधानी कीव की तरफ जिस तेजी से बढ़ रही है, वैसे ही भारतीय छात्रों में खुद को लेकर असुरक्षा की भावना भी बढ़ती जा रही है। यूक्रेन के जापोरीज्ज्या व सुमी स्टेट में अधिकांश छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। अमर उजाला से बातचीत में छात्रों ने बताया कि यदि पहले ही दूतावास की तरफ से स्थिति स्पष्ट कर दी जाती तो शायद वह समय रहते अपने घर पहुंच जाते।
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यूक्रेन की जापोरीज्ज्या स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे छात्र सागर ने बताया कि 16 फरवरी तक दूतावास की तरफ से स्थिति स्पष्ट नहीं की गई थी। सागर फर्रूखनगर के गांव मोहम्मदपुर सैदपुर के निवासी हैं और यूक्रेन से एमबीबीएस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहली एडवाइजरी में भारतीय दूतावास ने कहा था कि आप चाहें तो निकल सकते हैं जबकि 4 दिन बाद 20 फरवरी को एक एडवाइजरी जारी कर कहा जाता है कि आपको निकल जाना चाहिए। इसके बाद छात्रों ने अपने हिसाब से टिकट कराए लेकिन तब तक स्थिति खराब हो चुकी थी। सागर की भी 24 फरवरी की वापसी की टिकट थी लेकिन तब तक यूक्रेन ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था।
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कांट्रेक्टर्स की चिंता भी बढ़ी
संकट के बाद से ही उन कांट्रेक्टर्स की चिंता भी बढ़ गई है, जो भारतीय छात्रों का यूक्रेन की विश्वविद्यालयों में दाखिला कराते हैं। जापोरीज्ज्या स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी के छात्र सागर ने बताया कि अलर्ट सायरन बजते ही उन्हें अपने साथियों के साथ बंकर में जाना पड़ता है। हालांकि, जापोरीज्ज्या शहर के अंदर अभी काफी हद तक स्थिति सामान्य है लेकिन जैसे-जैसे रूसी सेना आगे बढ़ रही है छात्रों की चिंता भी बढ़ती जा रही है।
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सुरक्षित निकालने के लिए लगातार बैठकें
जापोरीज्ज्या शहर युद्धग्रस्त दोनेंस्क व लोहांस्क से महज 250-280 किलोमीटर दूर ही है। यहां पर स्थिति इसलिए भी ज्यादा खराब नहीं है क्योंकि रूस के टारगेट पर होने के कारण पहले से ही भारी संख्या में यूक्रेन के सैनिक यहां पर मौजूद थे। पलवल निवासी ओम ने बताया कि जापोरीज्ज्या स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में अब भी 1383 भारतीय छात्र मौजूद हैं। छात्रों को सुरक्षित निकालने के लिए कांट्रेक्टर्स व यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट लगातार बैठकें कर रहे हैं।
दूतावास से नहीं हो पा रहा संपर्क
अलवर (राजस्थान) के मूल निवासी सुनील ने बताया कि यूक्रेन में जो स्थितियां बन रही हैं उसको देखते हुए खाने-पीने की चीजों को लेकर समस्या बढ़ सकती है। वहीं, इमरजेंसी लागू होने की वजह से अब आरओ का पानी नहीं मिल पा रहा है। छात्रों के पास अब सिर्फ एक सप्ताह के लिए ही आरओ के पानी का भंडार बचा है। चिंता की बात यह है कि भारतीय दूतावास से कोई खास प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है। संपर्क करने पर या तो लाइन व्यस्त जाती है या फिर बात नहीं हो पाती है।
यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे कुल 1800 छात्र
छात्रों ने बताया कि पिछले तीन-चार दिन से बिजली व इंटरनेट कनेक्शन भी बाधित होने की सूचना मिल रही है। यदि ऐसा हुआ तो उनकी समस्या काफी बढ़ जाएगी और घर वालों से संपर्क भी टूट जाएगा। जापोरीज्ज्या स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में इस समय कुल करीब 1800 भारतीय छात्र पढ़ रहे हैं, जिसमें से लगभग 400 छात्र वहां से निकल चुके हैं।

अन्य देशों के दूतावास ने स्पष्ट कर दी थी स्थिति
छात्र ओम ने बताया कि भारतीय दूतावास अगर 16 फरवरी को ही कह देता तो हम पहले ही चले जाते। मोरक्को, यूएसए समेत अन्य देशों के दूतावास ने अपने छात्रों को स्पष्ट तौर पर कह दिया था कि आप यूक्रेन छोड़ दीजिए। ऐसे में छात्र समय रहते निकल गए। एमबीबीएस कर रहे पलवल के ओम ने बातचीत के दौरान बताया कि ऑफलाइन कक्षाओं के चक्कर में वह पिछले 8 फरवरी को ही यूक्रेन लौटे थे और अब यह स्थिति हो गई।
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