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Gurugram News: अगले तीन दशक तक पानी की मांग पूरा करेगी गुरुग्राम नहर

Thu, 29 May 2025 12:32 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 29 May 2025 12:32 AM IST
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Gurugram canal will meet the water demand for the next three decades
मनोज धर द्विवेदी
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गुरुग्राम। गुरुग्राम नहर (जीडब्ल्यूएस) और मेवात फीडर पाइपलाइन का आने वाले 30 साल की जरूरतों को देखते हुए निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए गुरुग्राम नहर की संशोधित डीपीआर तैयार करवाई जा रही है। सरकार की योजना है कि भविष्य में रेणुका, लखवार और किशाऊ बांधों से हरियाणा को मिलने वाले पानी को जीडब्ल्यूएस और मेवात फीडर को भी दिया जाएगा।
सरकार शहर में पेयजल उपलब्धता को बेहतर करने पर जोर दे रही है। इसके तहत सोनीपत के ककरोई से होकर गुरुग्राम नहर को पाइप लाइन में तब्दील कराने की योजना है। साल 1990 में बनी गुरुग्राम नहर जर्जर हालत में है। दूसरा यह कि नहर भविष्य में पानी की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है। ऐसे में जीडब्ल्यूएस को री-मॉडलिंग करने की तैयारी है। दूसरा सरकार मेवात में भी नहरी पानी सप्लाई की योजना रखी है। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की दो परियोजनाओं पर पिछले साल मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में स्थायी वित्त समिति-सी की बैठक हुई थी। इसमें केएमपी एक्सप्रेसवे के साथ मेवात फीडर पाइपलाइन और जीडब्ल्यूएस पर चर्चा हुई थी।
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जीडब्ल्यूएस को 175 क्यूसेक पानी के लिए डिजाइन किया था। अब री मॉडलिंग या पाइप लाइन में तब्दील कर 686 क्यूसेक के लिए डिजाइन किया जा रहा है। सिंचाई विभाग परियोजनाओं को साल 2050 में पानी की मांग को देखते हुए डिजाइन करा रहा है। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण, पब्लिक हेल्थ, एचएसआईआईडीसी और मेवात समेत अन्य साल 2030 में 373.74 क्यूसेक पानी की अतिरिक्त जरूरत होगी। इसी प्रकार साल 2040 में 496.53 और 2050 में सभी विभागों के लिए 686.40 क्यूसेक पानी की जरूरत होगी। जीडब्ल्यूएस और एनसीआर चैनल की क्षमता 400 क्यूसेक है जबकि, जीडब्ल्यूएस और मेवात फीडर पाइपलाइन के लिए प्रस्तावित जल की आवश्यकता एनसीआर चैनल के माध्यम से आपूर्ति सहित 988 क्यूसेक अनुमानित की गई है।
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इस परियोजना के लिए अतिरिक्त जल की आवश्यकता लगभग 588 क्यूसेक होगी। हरियाणा सिंचाई विभाग ने साल 2022 में रेणुका, लखवार और किशाऊ जैसे बांधों से पानी की उपलब्धता पर विस्तृत अध्ययन कराया था। इसे सरकार से अनुमोदन के बाद पहले ही ऊपरी यमुना नदी बोर्ड (यूवाईआरबी) को प्रस्तुत किया जा चुका है। रेणुका, लखवार और किशाऊ बांधों से हरियाणा का हिस्सा क्रमशः 266 क्यूसेक, 177 क्यूसेक और 709 क्यूसेक है। रेणुका और लखवार परियोजनाओं को 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य है। जीडब्ल्यूएस चैनल और मेवात पाइपलाइन परियोजना की प्रस्तावित आपूर्ति को समायोजित करने के लिए खुबरू हेड से काकरोई हेड तक नहर को भी री-मॉडलिंग की परियोजना को एक साथ शुरू करने की आवश्यकता होगी। जीडब्ल्यूएस 686.40 क्यूसेक डिजाइन किया जा रहा है। काकरोई हेड से गुरुग्राम तक पाइपलाइन से पानी लाया जाएगा। सिंचाई विभाग के तत्कालीन कार्यकारी अभियंता मंजीत हुड्डा ने बताया कि पहले नहर का कुछ भाग खुला और पाइप लाइन में तब्दील करने की योजना थी। उन्होंने बताया कि सीएम ने पूरी नहर को पाइप लाइन में तब्दील करने को कहा है।
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