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Gurugram News: मरीज के बिल में धांधली, अस्पताल को लौटाने होंगे 1.08 लाख रुपये

Wed, 04 Sep 2024 02:56 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 04 Sep 2024 02:56 AM IST
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Fraud in patient's bill, hospital will have to return Rs 1.08 lakh
45 दिनों में करना होगा भुगतान, उसके बाद 12 फीसदी ब्याज दर से वसूली जाएगी राशि
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। उपभोक्ता आयोग ने मैक्स अस्पताल को उपभोक्ता से तयशुदा रेट से अधिक वसूली के मामले में 1.08 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया है। आयोग ने इस मामले में पाया कि मैक्स अस्पताल द्वारा वसूल की गई अतिरिक्त राशि न केवल सेवा में कमी थी, बल्कि यह अनुचित व्यापार व्यवहार भी था।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि अस्पताल ने केवल गलत तरीके से ज्यादा बिल जारी किया, बल्कि शिकायतकर्ता की बेटी को डिस्चार्ज न करके अनुचित तरीके से उत्पीड़न भी किया। आयोग ने मैक्स अस्पताल को निर्देश दिया अतिरिक्त वसूली की राशि को नौ फीसदी ब्याज दर के साथ शिकायतकर्ता को लौटाए। साथ ही पचास हजार रुपये का मानसिक पीड़ा का मुआवजा और 11 हजार रुपये की कानूनी लागत भी अदा करे। अगर अस्पताल 45 दिनों के भीतर भुगतान करने में विफल रहता है, तो यह राशि 12 फीसदी ब्याज दर के साथ वसूल की जाएगी।
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पालम विहार के रहने वाले शिकायतकर्ता मानव तलवार ने अपने परिवार के लिए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से एक कैशलेस स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी, जो 25 फरवरी 2024 तक वैध थी। मानव की बेटी की गले से संबंधित बीमारी की 26 मई 2023 को मैक्स अस्पताल में सर्जरी हुई थी। यह सर्जरी जीआईपीएसए द्वारा निर्धारित दर के तहत कवर की गई थी, जिसमें कुल लागत 66,304 रुपये होनी चाहिए थी। लेकिन, अस्पताल ने बिना पूर्व-अनुमोदन के सर्जरी की और 27 मई 2023 को मानव तलवार को करीब 1.75 लाख का बिल थमा दिया था। जोकि जीआईपीएसए के अनुसार तयशुदा दर से दोगुना था। जब मानव तलवार ने इस वसूली पर सवाल उठाया, तो अस्पताल ने बिना पूरी रकम का भुगतान किए उनकी बेटी को डिस्चार्ज करने से मना कर दिया। इसके बाद मानव ने अस्पताल के खिलाफ उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में याचिका दायर कर दी थी।
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आयाेग ने इस मामले में उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने चेतावनी दी है कि अगर आदेश का पालन नहीं किया गया, तो शिकायतकर्ता को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत न्यायालय में याचिका दायर करने का अधिकार होगा, जिसमें एक महीने से तीन साल तक की सजा हो सकती है, साथ ही 25 हजार से एक लाख रुपये तक का जुर्माना भी हो सकता है।
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