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Gurugram News: कॉलेजों में मियावाकी तकनीक से बनेगा वनक्षेत्र
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100 स्क्वायर मीटर जमीन चिन्हित कर विभाग को सौंपनी होगी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सरकारी कॉलेजों में अब मियावाकी तकनीक से वनक्षेत्र विकसित किया जाएगा। इसके लिए कॉलेज 100 स्क्वायर मीटर जमीन चिन्हित की जाएगी। चिन्हित जमीन पर मियावाकी तकनीक से तीन साल में ही वनक्षेत्र विकसित हो सकेगा।
वन संरक्षण एक्ट 1980 के तहत वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए कॉलेजों में लैंड बैंक बनाया जाएगा। उच्च शिक्षा निदेशालय (डीएचई) ने सरकारी कॉलेजों को यह निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके लिए 100 स्क्वायर मीटर जमीन चिन्हित कर विभाग को रिपोर्ट सौंपनी होगी। इसके बाद इसमें तीन साल के अंदर वनक्षेत्र विकसित करना होगा। इस तकनीक के जरिए वनक्षेत्र में उगाए गए पौधों में दस फीसदी सघन बढ़ोतरी होगी। साथ ही डेढ़ मीटर हर साल पौधों की वृद्धि होगी। इससे कॉलेज के जरिए प्रदेश का ओपन वन क्षेत्र दायरा 12 फीसदी से अधिक करने का लक्ष्य है।
द्रोणाचार्य राजकीय कॉलेज के प्राचार्य वीरेंद्र अंतिल ने बताया कि मियावाकी तकनीक से बहुत कम जगह में अधिक पौधे लगाने होंगे। तीन साल बाद यह पौधे बगैर किसी बाहरी सहायता के अपना पोषण कर पेड़ के रूप में विकसित होंगे। सभी पौधे एक दूसरे से जड़ों के माध्यम से जुड़कर आपस में मजबूती देंगे।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सरकारी कॉलेजों में अब मियावाकी तकनीक से वनक्षेत्र विकसित किया जाएगा। इसके लिए कॉलेज 100 स्क्वायर मीटर जमीन चिन्हित की जाएगी। चिन्हित जमीन पर मियावाकी तकनीक से तीन साल में ही वनक्षेत्र विकसित हो सकेगा।
वन संरक्षण एक्ट 1980 के तहत वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए कॉलेजों में लैंड बैंक बनाया जाएगा। उच्च शिक्षा निदेशालय (डीएचई) ने सरकारी कॉलेजों को यह निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके लिए 100 स्क्वायर मीटर जमीन चिन्हित कर विभाग को रिपोर्ट सौंपनी होगी। इसके बाद इसमें तीन साल के अंदर वनक्षेत्र विकसित करना होगा। इस तकनीक के जरिए वनक्षेत्र में उगाए गए पौधों में दस फीसदी सघन बढ़ोतरी होगी। साथ ही डेढ़ मीटर हर साल पौधों की वृद्धि होगी। इससे कॉलेज के जरिए प्रदेश का ओपन वन क्षेत्र दायरा 12 फीसदी से अधिक करने का लक्ष्य है।
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द्रोणाचार्य राजकीय कॉलेज के प्राचार्य वीरेंद्र अंतिल ने बताया कि मियावाकी तकनीक से बहुत कम जगह में अधिक पौधे लगाने होंगे। तीन साल बाद यह पौधे बगैर किसी बाहरी सहायता के अपना पोषण कर पेड़ के रूप में विकसित होंगे। सभी पौधे एक दूसरे से जड़ों के माध्यम से जुड़कर आपस में मजबूती देंगे।
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