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फूलों से महिलाओं को दिया रोजगार, बना रही आत्मनिर्भर

Sun, 07 Mar 2021 11:11 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 07 Mar 2021 11:11 PM IST
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Employment given to women with flowers, making them self-reliant
गुरुग्राम। बंदिशें जरूर हैं, लेकिन उन्हें तोड़कर कुछ कर दिखाने की शक्ति भी तो महिलाओं में हैं। अगर अपने हुनर को पहचानकर काम किया जाए, तो मंजिल को पाना आसान है। इसी का उदाहरण बन रही हैं जिले की पूनम सेहरावत। कुछ अलग कर दिखाने के जुनून में उन्होंने खुद को तो आत्मनिर्भर बनाया, साथ ही अन्य महिलाओं को भी रोजगार का अवसर दिया। पुरी डिप्लोमैटिक सोसाइटी निवासी पूनम मंदिर में चढ़ने वाले फूलों से अगरबत्ती, प्रतिमाएं, दिए बनाने का काम करती हैं।
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पूनम ने आरोही इंटरप्राइजेज के नाम से अपनी कंपनी शुरू की है। साल 2018 में फूलों का प्रयोग करने की योजना बनाई थी। उन्होंने बताया कि सामान्य महिलाओं की तरह ही वे भी बचपन में पिता और शादी के बाद पति पर निर्भर रहीं। जब बच्चे पढ़ने के लिए दूर चले गए तो उन्हें अहसास हुआ कि जीवन में खुद के लिए क्या किया है। इसी सवाल के जवाब खोजने के लिए वह हर दिन कुछ अलग करने लगी। जब वह मंदिर गईं, तो आस्था के नाम पर अर्पित फूलों को कूड़ेदान में गिरता देख मन दुखी हुआ। उसी दौरान उन्होंने इन फूलों का प्रयोग करने की ठानी। कई कंपनियों से इन फूलों का प्रयोग करने के लिए संपर्क किया। कोई मदद नहीं मिलने पर उन्होंने इंटरनेट पर सर्च किया। अगरबत्ती बनाने की विधि देखी और खुद से ही काम शुरू किया। इसके लिए वह हर दिन मंदिर में जाती और फूलों को एकत्रित करतीं।
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200 से ज्यादा महिलाओं को किया प्रशिक्षित
पूनम ने बताया कि अब वह फूलों के साथ अन्य पूजा सामग्री का भी प्रयोग कई उत्पाद बनाने के लिए करती हैं। माता पर चढ़ने वाली चूनरी से पोटली बनाने का काम करती हैं। अगरबत्ती, धूपबत्ती, दिए और मूर्तियां बनाने का प्रशिक्षण भी महिलाओं को देती है। वह अब तक 200 से ज्यादा महिलाओं को निशुल्क प्रशिक्षण दे चुकी हैं। वह कश्मीर, उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों में भी प्रशिक्षण दे चुकी हैं। 10 से ज्यादा महिलाएं उनके साथ काम करती हैं। वहीं बहुत सी महिलाओं को उनके घर पर ही काम देती हैं।
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कई बार टूूटीं पर नहीं मानी हार
पूनम बताती हैं कि इस मंजिल तक पहुंचने की राह आसान नहीं थी। बहुत बार लोग उन्हें समझ नहीं पा रहे थे। मैैं कूड़ेदान से फूलों को चुन कर लाती थी। वहीं शुरुआत में दो महीने तक सुुखाए गए फूल बारिश की वजह से खराब हो गए। उस दिन मेरी मेहनत पूरी तरह खराब हो गई। लेकिन अगले दिन मैं उतने ही उत्साह के साथ उठी और दोबारा काम शुरू किया। इसी तरह महिलाओं को कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।
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