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Gurugram News: बदलती जीवन शैली का असर, 30 प्रतिशत युवाओं में खून की कमी
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सेहत : स्वास्थ्य विभाग की एनीमिया मुक्त हरियाणा 2024-25 की रिपोर्ट में हुआ यह खुलासा
चिंता : 30 प्रतिशत युवाओं में खून की कमी
- स्वास्थ्य विभाग की एनीमिया मुक्त हरियाणा 2024-25 की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
- 06 से 09 और 10 से 19 आयु वर्ग में लड़कियों से ज्यादा लड़के एनीमिया से ग्रस्त
- एक महीने के लिए शुरु हुआ निगरानी कार्यक्रम, विभाग जागरूक करने में जुटा
सौम्या गुप्ता
गुरुग्राम। हरियाणा में करीब 30 फीसदी युवा एनीमिया (खून की कमी) से ग्रसित हैं। यह खुलासा स्वास्थ्य विभाग की एनीमिया मुक्त हरियाणा 2024-25 की रिपोर्ट में हुआ है। अभी तक एनीमिया की शिकायत आम तौर पर महिलाओं में आती थी। स्वास्थ्य महकमा हर साल एनीमिया अभियान के तहत सर्वे करवाता है। इस साल भी यह अभियान 01 जुलाई से शुरू हो गया है, जो कि 31 जुलाई तक चलेगा।
बीते वर्ष गुरुग्राम में लगभग 3 लाख 70 हजार 131 लोगों की खून की जांच की गई थी। जिसमें से सबसे अधिक 20 से 49 वर्ष के बीच महिलाओं में यह समस्या पाई गई है। दूसरे नंबर पर 10 से 19 वर्ष के बीच लड़कियों में खून की कमी की समस्या देखने को मिली। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 30 प्रतिशत युवा खून की कमी से ग्रस्त हैं। विशेषज्ञों की मानें तो बदलती लाइफस्टाइल की वजह से युवाओं में यह समस्या देखने को मिल रही है।
स्वास्थ्य विभाग ने खून की कमी को माइल्ड, माॅडेरट, सीवियर श्रेणियों में बांटा हुआ है। साल 2024-25 में कुल 1874 लोग सीवियर पाए गए थे। जिले में 41 सीएचसी, पीएचसी व यूपीएचसी में निशुल्क एनीमिया जांच की जाती है। सबसे अधिक गर्भवती व 10-19 वर्ष के बच्चों में यह समस्या देखने को मिली है। महिलाओं और पुरुषों में यदि 12 ग्राम से ऊपर हीमोग्लोबिन की मात्रा पाई जाती है, तो इसे सही माना जाता है, लेकिन यदि इससे कम हो, तो वे एनीमिया पीड़ित होते हैं। 7 ग्राम के बीच हीमोग्लोबिन की मात्रा वाले लोगों को मॉडरेट एनीमिया कहा जाता है। 12 ग्राम से कम हीमोग्लोबिन वाले मरीजों को माइनर एनीमिया कहते हैं। आयरन और प्रोटीन की कमी से एनीमिया के मामले बढ़ते हैं। साथ ही, बी-12 की कमी या कुछ अन्य बीमारियों में भी शरीर में आयरन की कमी हो जाती है।
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एनीमिया के लक्षण
कमजोरी व थकान महसूस होना, चक्कर आना व धुंधला दिखाई पड़ना। ये सभी एनीमिया के लक्षण माने जाते हैं। स्वस्थ होने के लिए विभिन्न तरह के साग-पात, मुनगा, भाजी, पालक, भथुवा, मेथी का साग, गुड़, दूध और चना खाया जा सकता है।
प्रदेश को एनीमिया मुक्त बनाना विभाग का लक्ष्य है। इसके लिए विशेष अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। युवाओं ने शारीरिक गतिविधियां कम कर दी हैं और उनका खानपान भी बिगड़ गया है। कुछ तो नशे की लत से ग्रस्त हैं। इसी वजह से शरीर में खून की कमी हो जाती है। ऐसे युवाओं को एनीमिया के बारे में जानकारी देकर उन्हें जागरूक किया जा रहा है। - डॉ. रश्मि बत्तरा, डिप्टी सीएमओ, स्वास्थ्य महकमा
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चिंता : 30 प्रतिशत युवाओं में खून की कमी
- स्वास्थ्य विभाग की एनीमिया मुक्त हरियाणा 2024-25 की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
- 06 से 09 और 10 से 19 आयु वर्ग में लड़कियों से ज्यादा लड़के एनीमिया से ग्रस्त
- एक महीने के लिए शुरु हुआ निगरानी कार्यक्रम, विभाग जागरूक करने में जुटा
सौम्या गुप्ता
गुरुग्राम। हरियाणा में करीब 30 फीसदी युवा एनीमिया (खून की कमी) से ग्रसित हैं। यह खुलासा स्वास्थ्य विभाग की एनीमिया मुक्त हरियाणा 2024-25 की रिपोर्ट में हुआ है। अभी तक एनीमिया की शिकायत आम तौर पर महिलाओं में आती थी। स्वास्थ्य महकमा हर साल एनीमिया अभियान के तहत सर्वे करवाता है। इस साल भी यह अभियान 01 जुलाई से शुरू हो गया है, जो कि 31 जुलाई तक चलेगा।
बीते वर्ष गुरुग्राम में लगभग 3 लाख 70 हजार 131 लोगों की खून की जांच की गई थी। जिसमें से सबसे अधिक 20 से 49 वर्ष के बीच महिलाओं में यह समस्या पाई गई है। दूसरे नंबर पर 10 से 19 वर्ष के बीच लड़कियों में खून की कमी की समस्या देखने को मिली। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 30 प्रतिशत युवा खून की कमी से ग्रस्त हैं। विशेषज्ञों की मानें तो बदलती लाइफस्टाइल की वजह से युवाओं में यह समस्या देखने को मिल रही है।
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स्वास्थ्य विभाग ने खून की कमी को माइल्ड, माॅडेरट, सीवियर श्रेणियों में बांटा हुआ है। साल 2024-25 में कुल 1874 लोग सीवियर पाए गए थे। जिले में 41 सीएचसी, पीएचसी व यूपीएचसी में निशुल्क एनीमिया जांच की जाती है। सबसे अधिक गर्भवती व 10-19 वर्ष के बच्चों में यह समस्या देखने को मिली है। महिलाओं और पुरुषों में यदि 12 ग्राम से ऊपर हीमोग्लोबिन की मात्रा पाई जाती है, तो इसे सही माना जाता है, लेकिन यदि इससे कम हो, तो वे एनीमिया पीड़ित होते हैं। 7 ग्राम के बीच हीमोग्लोबिन की मात्रा वाले लोगों को मॉडरेट एनीमिया कहा जाता है। 12 ग्राम से कम हीमोग्लोबिन वाले मरीजों को माइनर एनीमिया कहते हैं। आयरन और प्रोटीन की कमी से एनीमिया के मामले बढ़ते हैं। साथ ही, बी-12 की कमी या कुछ अन्य बीमारियों में भी शरीर में आयरन की कमी हो जाती है।
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एनीमिया के लक्षण
कमजोरी व थकान महसूस होना, चक्कर आना व धुंधला दिखाई पड़ना। ये सभी एनीमिया के लक्षण माने जाते हैं। स्वस्थ होने के लिए विभिन्न तरह के साग-पात, मुनगा, भाजी, पालक, भथुवा, मेथी का साग, गुड़, दूध और चना खाया जा सकता है।
प्रदेश को एनीमिया मुक्त बनाना विभाग का लक्ष्य है। इसके लिए विशेष अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। युवाओं ने शारीरिक गतिविधियां कम कर दी हैं और उनका खानपान भी बिगड़ गया है। कुछ तो नशे की लत से ग्रस्त हैं। इसी वजह से शरीर में खून की कमी हो जाती है। ऐसे युवाओं को एनीमिया के बारे में जानकारी देकर उन्हें जागरूक किया जा रहा है। - डॉ. रश्मि बत्तरा, डिप्टी सीएमओ, स्वास्थ्य महकमा