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शिक्षा में दो तिहाई प्रैक्टिकल तथा एक तिहाई थ्योरी हो - राज्यपाल
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गुरुग्राम विश्वविद्यालय की समारिका का विमोचन करते राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, आनंद मोहन शरण, ड?
- फोटो : Gurgaon
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गुरुग्राम। आज के बदलते परिवेश में शिक्षाविद् विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा दें, जिसमें दो तिहाई हिस्सा प्रैक्टिकल तथा एक तिहाई थ्योरी का हो ताकि वे अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद नौकरी मांगने वालों की बजाय नौकरी देने वाले बन सकें। नई शिक्षा नीति में इसी विषय पर जोर दिया गया है। उक्त बातें हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने बृहस्पतिवार को सेक्टर-51 स्थित गुरुग्राम विश्वविद्यालय में आयोजित प्रथम दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्यातिथि संबोधित करते हुए कहीं।
दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय के 270 छात्र-छात्राओं को राज्यपाल द्वारा उपाधियां प्रदान की गईं, इसमें 16 विभागों के वर्ष-2018 और वर्ष-2019 बैच के विद्यार्थी शामिल थे। इसके साथ ही समारोह में 17 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक भी प्रदान किए गए। राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि देश में गरीबी और बेरोजगारी को दूर करने का सबसे बड़ा माध्यम शिक्षा है। इसमें युवाओं को ऐसी शिक्षा दी जानी चाहिए जो उन्हें अपना व्यवसाय या रोजगार शुरू करने में सहायक हो।
कौशल विकास महत्वपूर्ण
राज्यपाल ने कहा कि आज की परिस्थिति को देखते हुए युवाओं का कौशल विकास करना महत्वपूर्ण है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया नामक कार्यक्रम शुरू किए। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे स्किल इंडिया के माध्यम से मेक इन इंडिया को अपनाएं और आंत्रप्रेन्योर बनें। उन्होंने युवाओं से सीधा संवाद स्थापित करते हुए कहा कि आप अपने नए इनोवेटिव आइडियाज के साथ काम करें तभी भारत उन्नति के रास्ते पर आगे बढे़गा।
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हरियाणा में देश का पहला स्किल विश्वविद्यालय
अगर विश्व में दूसरे देशों के साथ भारत को प्रतिस्पर्धा करनी है तो वोकेशनल एजुकेशन और स्किल को बढ़ाने पर बल देना जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए हरियाणा में देश की पहली स्किल यूनिवर्सिटी स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि पहली बार नई शिक्षा नीति में भारत सरकार ने दूसरे देशों के समान युवाओं को 7 व 8 ग्रेड की शिक्षा प्रदान करने की सोची है। बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि इतने ग्रेड के साथ पास होने वाले विद्यार्थी विदेशों में सीधे नौकरी पा सकेंगे, अन्यथा पहले हमारे युवाओं को वहां नौकरी प्राप्त करने के लिए टेस्ट पास करना होता था।
होना चाहिए एक इन्क्यूबेशन सेंटर
उन्होंने कहा कि हर विश्वविद्यालय में एक इन्क्यूबेशन सेंटर होना चाहिए, जो युवाओं के उद्यमशीलता के विचारों को मूर्त रूप देने में उनकी मदद करे। राज्यपाल ने यह भी कहा कि हर विश्वविद्यालय अपने क्षेत्र की ‘लोकल नीड्स’ अर्थात स्थानीय जरूरतों के आधार पर नए-नए डिप्लोमा कोर्स प्रारंभ करे। इन कोर्सों में स्थानीय युवा दाखिला लेकर अपने हुनर को निखारते हुए काम शुरू कर पाएंगे जिससे वे अपने रोजगार के साधन जुटा सकते हैं।
कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएं
राज्यपाल ने कहा कि कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित करने की काफी संभावनाएं हैं। इसी प्रकार, हेल्थ सेक्टर में रोजगार के अवसरों का स्कोप है। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के दौरान हमने देखा कि अस्पतालों में वेंटिलेटर तो थे लेकिन उनको चलाने वाले नहीं थे। युवाओं को इसका प्रशिक्षण दिया जाए तो वह उनके लिए उपयोगी होगा। इसके साथ राज्यपाल ने संस्कारयुक्त नैतिक शिक्षा प्रदान करने पर बल देते हुए कहा कि युवाओं को जीवन में खुद पर विश्वास होना चाहिए।
चरित्र निर्माण पर भी दें बल
उन्होंने अंग्रेजी कहावत का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर धन की हानि होती है तो समझें कि कुछ नही खोया, स्वास्थ्य का नुकसान होने पर कुछ हानि हुई लेकिन अगर आप चरित्र खो देते हैं तो सब कुछ खो देते हैं, इसलिए शिक्षण संस्थान चरित्र निर्माण पर बल दें। कोविड महामारी काल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस दौरान भी शिक्षा रुकी नहीं और तकनीक के माध्यम से ऑनलाइन शिक्षा की नई प्रथा शुरू हुई। राज्यपाल ने सभी प्रदेशवासियों से अपील की कि वे कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन अवश्य लगवाएं और कोविड पर विजय प्राप्त करें।
सेक्टर-85 में बन रहा विवि का भव्य परिसर
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मार्कंडेय आहुजा ने कहा कि गुरुग्राम विश्वविद्यालय की स्थापना हुए 3 वर्ष का समय हुआ है और इस थोड़े से अंतराल में यहां पर विभिन्न प्रकार के 28 कोर्स शुरू किए गए हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में यह विश्वविद्यालय सेक्टर-51 में अस्थाई तौर पर चलाया जा रहा है और विश्वविद्यालय का अपना भवन सेक्टर-85 में बन रहा है। उन्होंने ये भी कहा कि अगले कुछ समय में 8 कोर्सों की कक्षाएं नए कैंपस में शुरू करने की योजना है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के निर्माणाधीन भवन की सैटेलाइट से फोटो लेंगे तो वह भगवान गणेश के आकार का दिखाई देगा।
इस अवसर पर गुरुग्राम विधायक सुधीर सिंगला, पटौदी के विधायक सत्यप्रकाश जरावता, हरेरा गुरुग्राम के चेयरमैन डॉ. केके खंडेलवाल, जेसी बोस विश्वविद्यालय फरीदाबाद के कुलपति डॉ. दिनेश अग्रवाल, श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के कुलपति राज नेहरू, आईआईएलएम यूनिवर्सिटी की कुलपति सुजाता साही, केंद्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ़ के पूर्व कुलपति डॉ. आरसी कुहाड़, डॉ. अंजू, विश्वविद्यालय के एग्जीक्यूटिव काउंसिल तथा अकेडमिक काउंसिल के सदस्यगण भी उपस्थित थे।
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दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय के 270 छात्र-छात्राओं को राज्यपाल द्वारा उपाधियां प्रदान की गईं, इसमें 16 विभागों के वर्ष-2018 और वर्ष-2019 बैच के विद्यार्थी शामिल थे। इसके साथ ही समारोह में 17 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक भी प्रदान किए गए। राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि देश में गरीबी और बेरोजगारी को दूर करने का सबसे बड़ा माध्यम शिक्षा है। इसमें युवाओं को ऐसी शिक्षा दी जानी चाहिए जो उन्हें अपना व्यवसाय या रोजगार शुरू करने में सहायक हो।
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कौशल विकास महत्वपूर्ण
राज्यपाल ने कहा कि आज की परिस्थिति को देखते हुए युवाओं का कौशल विकास करना महत्वपूर्ण है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया नामक कार्यक्रम शुरू किए। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे स्किल इंडिया के माध्यम से मेक इन इंडिया को अपनाएं और आंत्रप्रेन्योर बनें। उन्होंने युवाओं से सीधा संवाद स्थापित करते हुए कहा कि आप अपने नए इनोवेटिव आइडियाज के साथ काम करें तभी भारत उन्नति के रास्ते पर आगे बढे़गा।
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हरियाणा में देश का पहला स्किल विश्वविद्यालय
अगर विश्व में दूसरे देशों के साथ भारत को प्रतिस्पर्धा करनी है तो वोकेशनल एजुकेशन और स्किल को बढ़ाने पर बल देना जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए हरियाणा में देश की पहली स्किल यूनिवर्सिटी स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि पहली बार नई शिक्षा नीति में भारत सरकार ने दूसरे देशों के समान युवाओं को 7 व 8 ग्रेड की शिक्षा प्रदान करने की सोची है। बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि इतने ग्रेड के साथ पास होने वाले विद्यार्थी विदेशों में सीधे नौकरी पा सकेंगे, अन्यथा पहले हमारे युवाओं को वहां नौकरी प्राप्त करने के लिए टेस्ट पास करना होता था।
होना चाहिए एक इन्क्यूबेशन सेंटर
उन्होंने कहा कि हर विश्वविद्यालय में एक इन्क्यूबेशन सेंटर होना चाहिए, जो युवाओं के उद्यमशीलता के विचारों को मूर्त रूप देने में उनकी मदद करे। राज्यपाल ने यह भी कहा कि हर विश्वविद्यालय अपने क्षेत्र की ‘लोकल नीड्स’ अर्थात स्थानीय जरूरतों के आधार पर नए-नए डिप्लोमा कोर्स प्रारंभ करे। इन कोर्सों में स्थानीय युवा दाखिला लेकर अपने हुनर को निखारते हुए काम शुरू कर पाएंगे जिससे वे अपने रोजगार के साधन जुटा सकते हैं।
कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएं
राज्यपाल ने कहा कि कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित करने की काफी संभावनाएं हैं। इसी प्रकार, हेल्थ सेक्टर में रोजगार के अवसरों का स्कोप है। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के दौरान हमने देखा कि अस्पतालों में वेंटिलेटर तो थे लेकिन उनको चलाने वाले नहीं थे। युवाओं को इसका प्रशिक्षण दिया जाए तो वह उनके लिए उपयोगी होगा। इसके साथ राज्यपाल ने संस्कारयुक्त नैतिक शिक्षा प्रदान करने पर बल देते हुए कहा कि युवाओं को जीवन में खुद पर विश्वास होना चाहिए।
चरित्र निर्माण पर भी दें बल
उन्होंने अंग्रेजी कहावत का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर धन की हानि होती है तो समझें कि कुछ नही खोया, स्वास्थ्य का नुकसान होने पर कुछ हानि हुई लेकिन अगर आप चरित्र खो देते हैं तो सब कुछ खो देते हैं, इसलिए शिक्षण संस्थान चरित्र निर्माण पर बल दें। कोविड महामारी काल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस दौरान भी शिक्षा रुकी नहीं और तकनीक के माध्यम से ऑनलाइन शिक्षा की नई प्रथा शुरू हुई। राज्यपाल ने सभी प्रदेशवासियों से अपील की कि वे कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन अवश्य लगवाएं और कोविड पर विजय प्राप्त करें।
सेक्टर-85 में बन रहा विवि का भव्य परिसर
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मार्कंडेय आहुजा ने कहा कि गुरुग्राम विश्वविद्यालय की स्थापना हुए 3 वर्ष का समय हुआ है और इस थोड़े से अंतराल में यहां पर विभिन्न प्रकार के 28 कोर्स शुरू किए गए हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में यह विश्वविद्यालय सेक्टर-51 में अस्थाई तौर पर चलाया जा रहा है और विश्वविद्यालय का अपना भवन सेक्टर-85 में बन रहा है। उन्होंने ये भी कहा कि अगले कुछ समय में 8 कोर्सों की कक्षाएं नए कैंपस में शुरू करने की योजना है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के निर्माणाधीन भवन की सैटेलाइट से फोटो लेंगे तो वह भगवान गणेश के आकार का दिखाई देगा।
इस अवसर पर गुरुग्राम विधायक सुधीर सिंगला, पटौदी के विधायक सत्यप्रकाश जरावता, हरेरा गुरुग्राम के चेयरमैन डॉ. केके खंडेलवाल, जेसी बोस विश्वविद्यालय फरीदाबाद के कुलपति डॉ. दिनेश अग्रवाल, श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के कुलपति राज नेहरू, आईआईएलएम यूनिवर्सिटी की कुलपति सुजाता साही, केंद्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ़ के पूर्व कुलपति डॉ. आरसी कुहाड़, डॉ. अंजू, विश्वविद्यालय के एग्जीक्यूटिव काउंसिल तथा अकेडमिक काउंसिल के सदस्यगण भी उपस्थित थे।