{"_id":"6ac3dea6af747bc83e01b010","slug":"what-kind-of-investigation-is-this-informant-who-reported-theft-of-1-crore-not-made-a-witness-accused-acquitted-gurgaon-news-c-24-1-fbd1020-103289-2026-10-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"ये कैसी जांच : एक करोड़ कैश चोरी की सूचना देने वाले को नहीं बनाया गवाह, आरोपी बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ये कैसी जांच : एक करोड़ कैश चोरी की सूचना देने वाले को नहीं बनाया गवाह, आरोपी बरी
विज्ञापन
मॉल के प्रवेश-निकासी, पार्किंग एरिया की सीसीटीवी फुटेज तक लेना जरूरी नहीं समझा
एक करोड़ की पूरी रिकवरी के बावजूद आरोप साबित नहीं कर पाया अभियोजन पक्ष
बरामद की गई रकम को केस प्रॉपर्टी के तौर पर कोर्ट में दिखाया ही नहीं
सोनू यादव
गुरुग्राम।
दिल्ली-जयपुर हाईवे किनारे एंबियंस मॉल में कैश वैन से एटीएम में डालने की बजाय 1 करोड़ रुपये की नकदी चोरी की जांच में पुलिस की लापरवाही सामने आई है। जिला अदालत ने 23 सितंबर को इस मामले में 2 आरोपियों को बरी किया था। अब सामने आए ऑर्डर में पता चला कि जांच कर रही पुलिस टीम ने कैश चोरी की सूचना देने वाले को केस में गवाह तक नहीं बनाया। इतना ही नहीं मॉल के प्रवेश-निकासी के अलावा पार्किंग एरिया की सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस ने केस में शामिल नहीं किया।
इतना ही नहीं, एक करोड़ की बरामदगी के बावजूद केस प्रॉपर्टी के तौर पर इन रुपयों को कभी कोर्ट में पेश ही नहीं किया गया। वारदात में मौजूद अन्य लोगों, मॉल के गार्डाें आदि को भी न तो केस में गवाह बनाया और न ही कोई स्वतंत्र गवाह बनाया गया। चोरी हुए नोटों और बरामद हुए नोटों के सीरियल नंबर के मिलान का भी कोई प्रूफ अदालत में पेश नहीं किया गया। इन सभी पहलुओं को देखते हुए अदालत ने कहा कि आरोपियों से कुछ कथित बरामदगियां हुई थीं। इसके आधार पर शुरुआत में आरोपियों के खिलाफ संदेह था। अभियोजन पक्ष ने इन बरामदगियों को अपने मामले का आधार बनाया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी आरोप को सिद्ध करने के लिए पुख्ता प्रमाण आवश्यक हैं। अभियोजन पक्ष की यह प्राथमिक जिम्मेदारी थी कि वह सभी अपराधों के आवश्यक तत्वों को साबित करे। इसके लिए उन्हें ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करने थे।
एंबियंस मॉल नवंबर 2017 को हुई थी चोरी
एंबियंस मॉल में ये वारदात 24 नवंबर 2017 की शाम को हुई थी। कैश वैन एसआईएस प्रोसेगुर कैश सर्विस कंपनी की थी और यह वैन मॉल में स्थित एटीएम में पैसे डालने के लिए आई थी। वैन में कुल चार लोग सवार थे, जिनमें ड्राइवर, सुरक्षा गार्ड और दो कर्मचारी शामिल थे। वैन जैसे ही बेसमेंट में रुकी, आरोपी कर्मचारी हेमंत कुमार ने एटीएम में डालने के बहाने वैन से कैश से भरा बैग निकाला। उसने अपने साथियों से कहा कि वह पैसे लेकर लिफ्ट की तरफ जा रहा है। लेकिन वह एटीएम में पैसे डालने के बजाय एक करोड़ से भरा बैग लेकर भाग गया। वारदात के बाद हड़कंप मच गया। डीएलएफ फेज-2 थाना पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी हेमंत कुमार को गिरफ्तार किया। ये रोहतक जिले के ककराना गांव का रहने वाला है। बाद में पुलिस ने शेखर को भी रोहतक से गिरफ्तार किया। वो उस समय कानून की पढ़ाई कर रहा था। शेखर के पास ही चोरी के रुपये रखे गए। एक अन्य आरोपी राहुल को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पुलिस ने तीनों के खिलाफ चालान अदालत में पेश किया था। बाद में राहुल की मौत हो गई थी। आरोपी बनाए गए दो युवकों हेमंत व शेखर को न्यायाधीश निधी बेनीवाल की अदालत ने बरी कर दिया। वहीं तीसरे आरोपी राहुल की ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
एक करोड़ की पूरी रिकवरी के बावजूद आरोप साबित नहीं कर पाया अभियोजन पक्ष
बरामद की गई रकम को केस प्रॉपर्टी के तौर पर कोर्ट में दिखाया ही नहीं
सोनू यादव
गुरुग्राम।
दिल्ली-जयपुर हाईवे किनारे एंबियंस मॉल में कैश वैन से एटीएम में डालने की बजाय 1 करोड़ रुपये की नकदी चोरी की जांच में पुलिस की लापरवाही सामने आई है। जिला अदालत ने 23 सितंबर को इस मामले में 2 आरोपियों को बरी किया था। अब सामने आए ऑर्डर में पता चला कि जांच कर रही पुलिस टीम ने कैश चोरी की सूचना देने वाले को केस में गवाह तक नहीं बनाया। इतना ही नहीं मॉल के प्रवेश-निकासी के अलावा पार्किंग एरिया की सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस ने केस में शामिल नहीं किया।
इतना ही नहीं, एक करोड़ की बरामदगी के बावजूद केस प्रॉपर्टी के तौर पर इन रुपयों को कभी कोर्ट में पेश ही नहीं किया गया। वारदात में मौजूद अन्य लोगों, मॉल के गार्डाें आदि को भी न तो केस में गवाह बनाया और न ही कोई स्वतंत्र गवाह बनाया गया। चोरी हुए नोटों और बरामद हुए नोटों के सीरियल नंबर के मिलान का भी कोई प्रूफ अदालत में पेश नहीं किया गया। इन सभी पहलुओं को देखते हुए अदालत ने कहा कि आरोपियों से कुछ कथित बरामदगियां हुई थीं। इसके आधार पर शुरुआत में आरोपियों के खिलाफ संदेह था। अभियोजन पक्ष ने इन बरामदगियों को अपने मामले का आधार बनाया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी आरोप को सिद्ध करने के लिए पुख्ता प्रमाण आवश्यक हैं। अभियोजन पक्ष की यह प्राथमिक जिम्मेदारी थी कि वह सभी अपराधों के आवश्यक तत्वों को साबित करे। इसके लिए उन्हें ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करने थे।
विज्ञापन
एंबियंस मॉल नवंबर 2017 को हुई थी चोरी
एंबियंस मॉल में ये वारदात 24 नवंबर 2017 की शाम को हुई थी। कैश वैन एसआईएस प्रोसेगुर कैश सर्विस कंपनी की थी और यह वैन मॉल में स्थित एटीएम में पैसे डालने के लिए आई थी। वैन में कुल चार लोग सवार थे, जिनमें ड्राइवर, सुरक्षा गार्ड और दो कर्मचारी शामिल थे। वैन जैसे ही बेसमेंट में रुकी, आरोपी कर्मचारी हेमंत कुमार ने एटीएम में डालने के बहाने वैन से कैश से भरा बैग निकाला। उसने अपने साथियों से कहा कि वह पैसे लेकर लिफ्ट की तरफ जा रहा है। लेकिन वह एटीएम में पैसे डालने के बजाय एक करोड़ से भरा बैग लेकर भाग गया। वारदात के बाद हड़कंप मच गया। डीएलएफ फेज-2 थाना पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी हेमंत कुमार को गिरफ्तार किया। ये रोहतक जिले के ककराना गांव का रहने वाला है। बाद में पुलिस ने शेखर को भी रोहतक से गिरफ्तार किया। वो उस समय कानून की पढ़ाई कर रहा था। शेखर के पास ही चोरी के रुपये रखे गए। एक अन्य आरोपी राहुल को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पुलिस ने तीनों के खिलाफ चालान अदालत में पेश किया था। बाद में राहुल की मौत हो गई थी। आरोपी बनाए गए दो युवकों हेमंत व शेखर को न्यायाधीश निधी बेनीवाल की अदालत ने बरी कर दिया। वहीं तीसरे आरोपी राहुल की ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी।
विज्ञापन