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Gurugram News: मिट्टी के दीयों से जगमगाएगा मिलेनियम सिटी का हर घर
Tue, 14 Oct 2025 11:23 PM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
Updated Tue, 14 Oct 2025 11:23 PM IST
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- आधुनिकता के शहर में परंपरा की खुशबू, कारीगरों के चाक पर घूमती उम्मीदें
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम।
त्योहार का समय यानी आधुनिकता और परंपरा का सुंदर संगम। मिलेनियम सिटी के घर भले ही आधुनिक साज-सज्जा और डिजाइनर लाइटों से चमक उठें, लेकिन दिवाली की असली रौनक अब भी मिट्टी के दीयों की लौ से ही जगमगाती है।
त्योहारों के इस मौसम में बाजारों में लाइटिंग और डिजाइनर दीयों की भरमार है पर घरों में आज भी मिट्टी की सादगी और संस्कृति की सुगंध जलती दिखाई देती है। यही कारण है कि शहर के कुम्हारों के चाक एक महीने पहले ही उम्मीदों से घूमने लगते हैं। कारीगरों के पास हर साल की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में ऑर्डर आने शुरू हो गए हैं।
अब काम पहले से आसान हो गया है अब इलेक्ट्रिक चाक आने से समय बचता है और ज्यादा दीये तैयार हो जाते हैं। पहले हाथ से बनाते थे तो एक दीये में कई मिनट लग जाते थे। अब नवरात्र से ही दिवाली की तैयारी शुरू हो जाती है। अब दूर-दूर से भी ऑर्डर मिल रहे हैं और केवल दीयों ही नहीं, बल्कि मिट्टी की मूर्तियों और सजावटी बर्तनों की भी काफी मांग है।
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- मौसम, स्थानीय कारीगर
पिछले पांच सालों से मैं मिट्टी के दीये बेच रही हूं। लोग डिजाइनर दीये से ज्यादा मिट्टी के दीये पसंद कर रहे हैं। हर साल से ज्यादा इस साल मिट्टी के दीयों और सामान की मांग है। शायद पहले से ज्यादा अब लोग पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक हुए हैं। ये अच्छी बात है, इससे छोटे-छोटे कारीगरों को रोजगार मिलता है और उनकी दिवाली भी शुभ हो जाती है।
- पूजा, स्थानीय कारीगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम।
त्योहार का समय यानी आधुनिकता और परंपरा का सुंदर संगम। मिलेनियम सिटी के घर भले ही आधुनिक साज-सज्जा और डिजाइनर लाइटों से चमक उठें, लेकिन दिवाली की असली रौनक अब भी मिट्टी के दीयों की लौ से ही जगमगाती है।
त्योहारों के इस मौसम में बाजारों में लाइटिंग और डिजाइनर दीयों की भरमार है पर घरों में आज भी मिट्टी की सादगी और संस्कृति की सुगंध जलती दिखाई देती है। यही कारण है कि शहर के कुम्हारों के चाक एक महीने पहले ही उम्मीदों से घूमने लगते हैं। कारीगरों के पास हर साल की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में ऑर्डर आने शुरू हो गए हैं।
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अब काम पहले से आसान हो गया है अब इलेक्ट्रिक चाक आने से समय बचता है और ज्यादा दीये तैयार हो जाते हैं। पहले हाथ से बनाते थे तो एक दीये में कई मिनट लग जाते थे। अब नवरात्र से ही दिवाली की तैयारी शुरू हो जाती है। अब दूर-दूर से भी ऑर्डर मिल रहे हैं और केवल दीयों ही नहीं, बल्कि मिट्टी की मूर्तियों और सजावटी बर्तनों की भी काफी मांग है।
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- मौसम, स्थानीय कारीगर
पिछले पांच सालों से मैं मिट्टी के दीये बेच रही हूं। लोग डिजाइनर दीये से ज्यादा मिट्टी के दीये पसंद कर रहे हैं। हर साल से ज्यादा इस साल मिट्टी के दीयों और सामान की मांग है। शायद पहले से ज्यादा अब लोग पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक हुए हैं। ये अच्छी बात है, इससे छोटे-छोटे कारीगरों को रोजगार मिलता है और उनकी दिवाली भी शुभ हो जाती है।
- पूजा, स्थानीय कारीगर