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Gurugram News: गली में कुत्ते छतों में बंदर, हमले के डर से लोग घरों के अंदर
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होडल में बंदरों और आवारा कुत्तों का आतंक, प्रशासन की चुप्पी से बढ़ी लोगों की परेशानी
-शिकायतों के बाद भी नहीं हुआ समाधान, महिलाएं और बच्चे दहशत में; रोजाना हो रहे हमले और हादसे
संवाद न्यूज एजेंसी
होडल। शहर में बंदरों और आवारा कुत्तों का आतंक इतना बढ़ चुका है कि लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। नगर परिषद प्रशासन की लापरवाही के कारण आए दिन लोग बंदरों और कुत्तों के हमलों का शिकार हो रहे हैं। घरों की छतों पर बंदरों के झुंड डेरा जमाए रहते हैं, वहीं गलियों और रास्तों में आवारा कुत्तों का जमावड़ा देखने को मिलता है। नागरिकों ने बताया कि इस समस्या से निजात पाने के लिए कई बार वार्ड पार्षदों, नगर परिषद अधिकारियों और यहां तक कि एसडीएम को शिकायत दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) के प्रधान रमनलाल पंखीया, उदयभान, गिरधारीलाल, भोले, श्यामलाल, सुरेश गुप्ता, अधिवक्ता धर्मेंद्र चौहान, हरीओम गर्ग, जोगेंद्र सिंह, कृष्णकुमार सौरोत और धर्मवीर बिंदल समेत अन्य लोगों ने बताया कि बंदर और कुत्ते झुंड बनाकर घूमते हैं और महिलाओं व बच्चों पर हमला कर घायल कर देते हैं। महिलाएं छतों पर कपड़े सुखाने से डरने लगी हैं और बच्चे घर से बाहर निकलने में कतराने लगे हैं।
हाल ही में कुंज बिहार कॉलोनी में 55 वर्षीय बिजन बंदरों के उत्पात के कारण गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया। वे फिलहाल दिल्ली के अस्पताल में उपचाराधीन हैं। इसी प्रकार गजेंद्र (35) और घसीटा राम पर भी बंदरों ने अचानक हमला कर दिया, जिससे वे घायल हो गए। ।
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समस्या सिर्फ कॉलोनियों तक सीमित नहीं है। बंदरों और कुत्तों का आतंक शहर के बाजार, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, सरकारी कार्यालय, विद्यालय, लघु सचिवालय और मंदिरों तक फैला हुआ है। तहसील और कोर्ट परिसर तक भी ये उत्पाती बंदर पहुंच चुके हैं। आरडब्ल्यूए प्रधान रमनलाल पंखीया ने बताया कि नागरिकों ने विधायक हरिंद्र सिंह को भी इस समस्या से अवगत कराया था। विधायक ने बंदरों को पकड़वाने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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-शिकायतों के बाद भी नहीं हुआ समाधान, महिलाएं और बच्चे दहशत में
संवाद न्यूज एजेंसी
होडल। शहर में बंदरों और आवारा कुत्तों का आतंक इतना बढ़ चुका है कि लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। नगर परिषद प्रशासन की लापरवाही के कारण आए दिन लोग बंदरों और कुत्तों के हमलों का शिकार हो रहे हैं। घरों की छतों पर बंदरों के झुंड डेरा जमाए रहते हैं, वहीं गलियों और रास्तों में आवारा कुत्तों का जमावड़ा देखने को मिलता है। नागरिकों ने बताया कि इस समस्या से निजात पाने के लिए कई बार वार्ड पार्षदों, नगर परिषद अधिकारियों और यहां तक कि एसडीएम को शिकायत दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) के प्रधान रमनलाल पंखीया, उदयभान, गिरधारीलाल, भोले, श्यामलाल, सुरेश गुप्ता, अधिवक्ता धर्मेंद्र चौहान, हरीओम गर्ग, जोगेंद्र सिंह, कृष्णकुमार सौरोत और धर्मवीर बिंदल समेत अन्य लोगों ने बताया कि बंदर और कुत्ते झुंड बनाकर घूमते हैं और महिलाओं व बच्चों पर हमला कर घायल कर देते हैं। महिलाएं छतों पर कपड़े सुखाने से डरने लगी हैं और बच्चे घर से बाहर निकलने में कतराने लगे हैं।
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हाल ही में कुंज बिहार कॉलोनी में 55 वर्षीय बिजन बंदरों के उत्पात के कारण गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया। वे फिलहाल दिल्ली के अस्पताल में उपचाराधीन हैं। इसी प्रकार गजेंद्र (35) और घसीटा राम पर भी बंदरों ने अचानक हमला कर दिया, जिससे वे घायल हो गए। ।
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समस्या सिर्फ कॉलोनियों तक सीमित नहीं है। बंदरों और कुत्तों का आतंक शहर के बाजार, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, सरकारी कार्यालय, विद्यालय, लघु सचिवालय और मंदिरों तक फैला हुआ है। तहसील और कोर्ट परिसर तक भी ये उत्पाती बंदर पहुंच चुके हैं। आरडब्ल्यूए प्रधान रमनलाल पंखीया ने बताया कि नागरिकों ने विधायक हरिंद्र सिंह को भी इस समस्या से अवगत कराया था। विधायक ने बंदरों को पकड़वाने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।