{"_id":"69ad684ec4bbd0bace00d20b","slug":"design-changes-safety-improvements-metro-becomes-stronger-gurgaon-news-c-24-1-gur1002-81539-2026-03-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gurugram News: डिजाइन में बदलाव, सुरक्षा में सुधार, मेट्रो हुई और मजबूत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gurugram News: डिजाइन में बदलाव, सुरक्षा में सुधार, मेट्रो हुई और मजबूत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आठ तीव्रता का भूकंप झेलेगी गुरुग्राम मेट्रो, तेज रफ्तार के साथ मिलेगी बेमिसाल सुरक्षा
मनोज धर द्विवेदी
गुरुग्राम। ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो परियोजना के निर्माण में सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। मेट्रो के सिविल स्ट्रक्चर को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि (सिस्मिक जोन-4) वह 7.9 से 8 तीव्रता तक के भूकंप के झटकों को भी सहन कर सके। निर्माण में विशेष सेफ्टी कोड और आधुनिक इंजीनियरिंग मानकों का ध्यान दिया जा रहा है।
गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड के अनुसार, मेट्रो के पिलर, गर्डर और अन्य संरचनात्मक हिस्सों को भूकंपरोधी तकनीक के आधार पर तैयार किया जा रहा है। इससे किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। जीएमआरएल के एक अधिकारी ने बताया कि जब मेट्रो परियोजना को मंजूरी दी गई थी तक दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र सिस्मिक जोन-4 में था। इसी अनुसार मेट्रो के सिविल वर्क में पिलर समेत अन्य मानकों को तैयार किया गया था। हाल में केंद्र सरकार ने दिल्ली-एनसीआर को सिस्मिक जोन-5 में शामिल कर लिया था। ऐसे में मेट्रो के पिलर की डिजाइन में बदलाव करना पड़ रहा था, उसमें पिलर की मोटाई और बढ़ गई थी। इससे बीच में नए मानकों के अनुसार डिजाइन बदलनी पड़ रही थी, इससे निर्माण कार्य में देर हो रही थी।
हालांकि, अब केंद्र से इस क्षेत्र को सिस्मिक जोन-4 में दोबारा रखा है। ऐसे पहले बनी स्ट्रक्चरल डिजाइन के अनुसार काम होगा। उनका कहना है कि गुरुग्राम मेट्रो परियोजना में उच्च स्तर के भूकंपरोधी मानकों को अपनाया जा रहा है। निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है और विभिन्न हिस्सों के डिजाइन में सुरक्षा और टिकाऊपन को प्राथमिकता दी जा रही है। जीएमआरएल की ओर से मिलेनियम सिटी सेंटर से साइबर सिटी तक करीब 27.05 किमी मेट्रो का निर्माण किया जाना है। पहले चरण में मिलेनियम सिटी सेंटर से सेक्टर-नौ तक मेट्रो का निर्माण कार्य चल रहा है। इसमें पिलर निर्माण की प्रक्रिया चल रही है।
विज्ञापन
सिस्मिक जोन-4
सिस्मिक जोन-4 वह क्षेत्र होता है, जहां भूकंप का खतरा अधिक माना जाता है। आमतौर पर 7 से 7.9 तीव्रता तक के भूकंप आ सकते हैं। सिस्मिक जोन-4 में दिल्ली-एनसीआर समेत अन्य क्षेत्र शामिल हैं। वहीं, सोहना फॉल्ट लाइन दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक दरार (फाल्ट लाइन) है, जो गुरुग्राम के पास सोहना इलाके से होकर गुजरती है। फॉल्ट लाइन वह जगह होती है जहां पृथ्वी की परतों (टेक्टोनिक प्लेटों) में दरार होती है और हलचल होने पर भूकंप आ सकता है।
विज्ञापन
मनोज धर द्विवेदी
गुरुग्राम। ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो परियोजना के निर्माण में सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। मेट्रो के सिविल स्ट्रक्चर को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि (सिस्मिक जोन-4) वह 7.9 से 8 तीव्रता तक के भूकंप के झटकों को भी सहन कर सके। निर्माण में विशेष सेफ्टी कोड और आधुनिक इंजीनियरिंग मानकों का ध्यान दिया जा रहा है।
गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड के अनुसार, मेट्रो के पिलर, गर्डर और अन्य संरचनात्मक हिस्सों को भूकंपरोधी तकनीक के आधार पर तैयार किया जा रहा है। इससे किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। जीएमआरएल के एक अधिकारी ने बताया कि जब मेट्रो परियोजना को मंजूरी दी गई थी तक दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र सिस्मिक जोन-4 में था। इसी अनुसार मेट्रो के सिविल वर्क में पिलर समेत अन्य मानकों को तैयार किया गया था। हाल में केंद्र सरकार ने दिल्ली-एनसीआर को सिस्मिक जोन-5 में शामिल कर लिया था। ऐसे में मेट्रो के पिलर की डिजाइन में बदलाव करना पड़ रहा था, उसमें पिलर की मोटाई और बढ़ गई थी। इससे बीच में नए मानकों के अनुसार डिजाइन बदलनी पड़ रही थी, इससे निर्माण कार्य में देर हो रही थी।
विज्ञापन
हालांकि, अब केंद्र से इस क्षेत्र को सिस्मिक जोन-4 में दोबारा रखा है। ऐसे पहले बनी स्ट्रक्चरल डिजाइन के अनुसार काम होगा। उनका कहना है कि गुरुग्राम मेट्रो परियोजना में उच्च स्तर के भूकंपरोधी मानकों को अपनाया जा रहा है। निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है और विभिन्न हिस्सों के डिजाइन में सुरक्षा और टिकाऊपन को प्राथमिकता दी जा रही है। जीएमआरएल की ओर से मिलेनियम सिटी सेंटर से साइबर सिटी तक करीब 27.05 किमी मेट्रो का निर्माण किया जाना है। पहले चरण में मिलेनियम सिटी सेंटर से सेक्टर-नौ तक मेट्रो का निर्माण कार्य चल रहा है। इसमें पिलर निर्माण की प्रक्रिया चल रही है।
विज्ञापन
सिस्मिक जोन-4
सिस्मिक जोन-4 वह क्षेत्र होता है, जहां भूकंप का खतरा अधिक माना जाता है। आमतौर पर 7 से 7.9 तीव्रता तक के भूकंप आ सकते हैं। सिस्मिक जोन-4 में दिल्ली-एनसीआर समेत अन्य क्षेत्र शामिल हैं। वहीं, सोहना फॉल्ट लाइन दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक दरार (फाल्ट लाइन) है, जो गुरुग्राम के पास सोहना इलाके से होकर गुजरती है। फॉल्ट लाइन वह जगह होती है जहां पृथ्वी की परतों (टेक्टोनिक प्लेटों) में दरार होती है और हलचल होने पर भूकंप आ सकता है।