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डॉक्टरों की लापरवाही से जच्चा-बच्चा की मौत, हंगामा
Updated Thu, 02 Aug 2018 08:16 PM IST
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डॉक्टरों की लापरवाही से जच्चा-बच्चा की मौत, हंगामा
-परिजनों ने समय पर इलाज न मिलने का लगाया आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सिविल लाइन स्थित नागरिक अस्पताल में बृहस्पतिवार को प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा की मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। आरोप है कि महिला को रेफर करने के बाद उसे करीब 45 मिनट तक ड्राइवर और अन्य स्टाफ के इंतजार में एंबुलेंस में ही इंतजार करना पड़ा। इसी बीच महिला ने दम तोड़ दिया। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने इस बात को सिरे से नकार दिया है। हालांकि परिजनों की ओर से इस मामले की कहीं भी कोई शिकायत नहीं दी गई है।
मूल रूप से उत्तरप्रदेश के फर्रूखाबाद निवासी राजेश कुमार उर्फ राजू ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ सरहोल गंाव में रहता है। बृहस्पतिवार सुबह करीब 4 बजे उन्होंने अपनी गर्भवती पत्नी नेहा (22) को प्रसव पीड़ा होने के बाद सिविल लाइन स्थित नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया था। सुबह करीब 7 बजे उसने लड़के को जन्म दिया। थोड़ी देर बाद ही डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। जिसके बाद राजू व अन्य परिजनों ने डॉक्टरों से महिला मरीज से मिलने का अनुरोध किया, लेकिन आरोप है कि अस्पताल के स्टाफ ने उन्हें थप्पड़ मारकर भगाने की धमकी दे वापस भेज दिया।
राजू की माने तो कुछ देर बाद ही डॉक्टरों ने उनकी पत्नी की भी हालात गंभीर बताते हुए उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया। रेफर करने के बाद मरीज को एंबुलेंस में शिफ्ट किया गया, लेकिन करीब 45 मिनट तक न तो एंबुलेंस का ड्राइवर और न ही कोई अन्य स्टाफ या डॉक्टर एंबुलेंस में पहुंचा। इस बीच मरीज ने एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया। वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि महिला को जिस समय अस्पताल में भर्ती किया गया था उसकी हालत खराब थी। जांच में पता चला कि महिला को उच्च रक्तचाप की समस्या थी, जिसके कारण उसे दौरे पड़ते थे। प्रसव के दौरान भी महिला को दौरा पड़ा, जिसके चलते बच्चे को सांस नहीं मिल पाई और वह मृत पैदा हुआ। वहीं इसके बाद महिला की भी हालत खराब होती गई और इससे मौत हो गई।
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एंबुलेंस कंट्रोल रूम का भी रिकॉड चेक किया गया है। देरी की कोई भी बात अब तक सामने नहीं आई है। मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है। यदि किसी की गलती पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. गुलशन अरोड़ा, सिविल सर्जन
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लापरवाही के मामले
09 जुलाई: एक गर्भवती की संास की नली में जूस अटकने से मौत हो गई थी।
25 अप्रैैल : एंबुलेंस में प्रसव के बाद नवजात की मौत हो गई थी।
20 अप्रैल : अस्पताल स्टाफ की लापरवाही के कारण गर्भवती ने गायनी वार्ड के शौचालय में ही बच्चे को जन्म दिया था, जिसे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था।
10 फरवरी : आधार कार्ड न होने के कारण महिला को इलाज नहीं दिया गया था, जिसके बाद महिला ने अस्पताल के गेट पर ही बच्चे को जन्म दिया था।
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-परिजनों ने समय पर इलाज न मिलने का लगाया आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सिविल लाइन स्थित नागरिक अस्पताल में बृहस्पतिवार को प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा की मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। आरोप है कि महिला को रेफर करने के बाद उसे करीब 45 मिनट तक ड्राइवर और अन्य स्टाफ के इंतजार में एंबुलेंस में ही इंतजार करना पड़ा। इसी बीच महिला ने दम तोड़ दिया। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने इस बात को सिरे से नकार दिया है। हालांकि परिजनों की ओर से इस मामले की कहीं भी कोई शिकायत नहीं दी गई है।
मूल रूप से उत्तरप्रदेश के फर्रूखाबाद निवासी राजेश कुमार उर्फ राजू ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ सरहोल गंाव में रहता है। बृहस्पतिवार सुबह करीब 4 बजे उन्होंने अपनी गर्भवती पत्नी नेहा (22) को प्रसव पीड़ा होने के बाद सिविल लाइन स्थित नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया था। सुबह करीब 7 बजे उसने लड़के को जन्म दिया। थोड़ी देर बाद ही डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। जिसके बाद राजू व अन्य परिजनों ने डॉक्टरों से महिला मरीज से मिलने का अनुरोध किया, लेकिन आरोप है कि अस्पताल के स्टाफ ने उन्हें थप्पड़ मारकर भगाने की धमकी दे वापस भेज दिया।
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राजू की माने तो कुछ देर बाद ही डॉक्टरों ने उनकी पत्नी की भी हालात गंभीर बताते हुए उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया। रेफर करने के बाद मरीज को एंबुलेंस में शिफ्ट किया गया, लेकिन करीब 45 मिनट तक न तो एंबुलेंस का ड्राइवर और न ही कोई अन्य स्टाफ या डॉक्टर एंबुलेंस में पहुंचा। इस बीच मरीज ने एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया। वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि महिला को जिस समय अस्पताल में भर्ती किया गया था उसकी हालत खराब थी। जांच में पता चला कि महिला को उच्च रक्तचाप की समस्या थी, जिसके कारण उसे दौरे पड़ते थे। प्रसव के दौरान भी महिला को दौरा पड़ा, जिसके चलते बच्चे को सांस नहीं मिल पाई और वह मृत पैदा हुआ। वहीं इसके बाद महिला की भी हालत खराब होती गई और इससे मौत हो गई।
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एंबुलेंस कंट्रोल रूम का भी रिकॉड चेक किया गया है। देरी की कोई भी बात अब तक सामने नहीं आई है। मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है। यदि किसी की गलती पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. गुलशन अरोड़ा, सिविल सर्जन
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लापरवाही के मामले
09 जुलाई: एक गर्भवती की संास की नली में जूस अटकने से मौत हो गई थी।
25 अप्रैैल : एंबुलेंस में प्रसव के बाद नवजात की मौत हो गई थी।
20 अप्रैल : अस्पताल स्टाफ की लापरवाही के कारण गर्भवती ने गायनी वार्ड के शौचालय में ही बच्चे को जन्म दिया था, जिसे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था।
10 फरवरी : आधार कार्ड न होने के कारण महिला को इलाज नहीं दिया गया था, जिसके बाद महिला ने अस्पताल के गेट पर ही बच्चे को जन्म दिया था।